नादौन (वरिष्ठ पत्रकार बलबीर परमार):
भाजपा नेता एवं नादौन के पूर्व विधायक विजय अग्निहोत्री ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री को सार्वजनिक मंचों से बयानबाजी करने से पहले इतिहास के पन्ने पलटकर वास्तविक तथ्यों की जानकारी ले लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री झूठ बोलना बंद करें और जनता को गुमराह करने के बजाय तथ्यों के आधार पर बात करें।
विजय अग्निहोत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने हालिया नादौन दौरे के दौरान डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को लेकर जो दावे किए हैं, वे उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों से कतई मेल नहीं खाते। वर्ष 2012 से 2017 तक नादौन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व स्वयं विजय अग्निहोत्री कर रहे थे, सुखविंदर सिंह सुक्खू नहीं। उस दौरान प्रदेश में भले ही कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन नादौन से भाजपा विधायक के रूप में वे खुद जनता की आवाज बने हुए थे।
विधायक मैं था तो सुक्खू ने कैसे दिलाई वन स्वीकृति?
पूर्व विधायक ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री जनसभा में यह दावा कर रहे हैं कि 22 फरवरी 2014 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति दी, 1 मार्च 2014 को 179 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान हुआ और उन्होंने (सुक्खू ने) विधायक रहते हुए वन स्वीकृति दिलवाई। अग्निहोत्री ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्पष्ट करें कि जब 2014 में नादौन के विधायक वे खुद (विजय अग्निहोत्री) थे, तो सुक्खू किस हैसियत से अपने विधायक रहते वन स्वीकृति दिलाने की बात कह रहे हैं।
मोदी सरकार ने दिए ₹393 करोड़, जयराम सरकार ने पूरी की औपचारिकताएं
विजय अग्निहोत्री ने वास्तविक आंकड़े सामने रखते हुए कहा कि डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने 393 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि उपलब्ध करवाई थी। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस महत्वपूर्ण संस्थान के लिए जरूरी भूमि और वैधानिक स्वीकृतियां तक मुहैया नहीं करवाई थीं। वर्ष 2017 में जब पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी, तब जाकर तमाम औपचारिकताएं पूरी हुईं और निर्माण कार्य को वास्तविक गति मिली।
श्रेय लेने की होड़ में सच न झुठलाएं मुख्यमंत्री
उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को विकास कार्यों का श्रेय लेने की जल्दबाजी में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश नहीं करना चाहिए। सार्वजनिक जीवन में बयानबाजी से ज्यादा महत्व ऐतिहासिक सच्चाई और दस्तावेजों का होता है। नादौन की जनता उस दौर के घटनाक्रम और हकीकत से भलीभांति परिचित है, इसलिए मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे जनता के सामने गलत बयानी करने से बचें।

