पुराने कार्ड हो जाएंगे अमान्य, नए सिरे से कार्ड बनाने की तैयारी; शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए बनेंगे ‘शिकायत निवारण केंद्र’
विशेष रिपोर्ट: मीनाक्षी, पंजाब दस्तक
शिमला: हिमाचल प्रदेश के करीब 10 लाख परिवारों को कैशलेस स्वास्थ्य सुरक्षा देने वाली राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हिमकेयर’ योजना में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल होने जा रहा है। सरकार इस पूरी व्यवस्था को नए सिरे से पुनर्गठित कर रही है, जिसके तहत अब बीमा का जिम्मा एक नई निजी कंपनी को सौंपा जाएगा।
टेंडर प्रक्रिया पूरी: 8 दिग्गज कंपनियों को पछाड़ आदित्य बिरला बनी L-1
स्वास्थ्य विभाग द्वारा बुलाई गई टेंडर प्रक्रिया में देश की 8 बड़ी इंश्योरेंस कंपनियों ने हिस्सा लिया था। सभी बोलियों का गहन आकलन करने के बाद ‘आदित्य बिरला इंश्योरेंस कंपनी’ सबसे कम दर (L-1) पेश करके इस टेंडर को हासिल करने में सफल रही है। अब प्रदेशवासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं इसी कंपनी के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।
शिकायतों के निवारण के लिए स्थापित होंगे विशेष केंद्र
स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंघमार ने जानकारी देते हुए बताया कि आम जनता को पारदर्शी और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। टेंडर प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है।
उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने पर लाभार्थियों को किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए ‘शिकायत निवारण केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर कार्ड बनाने, अस्पतालों में भर्ती होने और बीमा दावा (क्लेम) से जुड़ी समस्याओं का तुरंत मौके पर ही निपटारा किया जाएगा।
कार्डधारकों के लिए 4 सबसे महत्वपूर्ण बातें:
रद्द होंगे पुराने हिमकेयर कार्ड: नई व्यवस्था लागू होते ही मौजूदा हिमकेयर कार्डों की वैधता समाप्त हो जाएगी। कार्डधारकों को नई योजना के तहत पुनः पंजीकरण कराकर नया कार्ड बनवाना अनिवार्य होगा।
सालाना प्रीमियम देना होगा अनिवार्य: अब मुफ्त व्यवस्था की जगह लाभार्थियों को सालाना आधार पर प्रीमियम की राशि चुकानी पड़ सकती है।
आर्थिक स्थिति के आधार पर तय होंगी दरें: सरकार समाज के अलग-अलग वर्गों की आय के हिसाब से प्रीमियम की दरें निर्धारित करने पर विचार कर रही है। संपन्न परिवारों से अधिक शुल्क लेने का प्रस्ताव है।
दिसंबर से लागू करने का लक्ष्य: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना को इसी वर्ष दिसंबर तक धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी की जाए।
सरकार के खजाने पर सालाना ₹420 करोड़ का आएगा वित्तीय भार
सूत्रों के अनुसार, नई योजना के तहत राज्य सरकार प्रति परिवार लगभग ₹4,200 के हिसाब से बीमा कंपनी को भुगतान करेगी। इस पूरी व्यवस्था पर सरकार को सालाना करीब ₹420 करोड़ खर्च करने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री सुक्खू का सख्त निर्देश:
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे बीमा कंपनी के साथ बैठक कर प्रीमियम दरों को और कम कराने का प्रयास करें, ताकि सरकारी खजाने और आम जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।
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