शिमला में 2016-21 एरियर की मांग को लेकर पेंशनर

पेंशनरों का फूटा आक्रोश: 2016-21 का एरियर असली मुद्दा, स्वयंभू नेता आत्माराम पर बरसे बुजुर्ग—सीएम सुक्खू से की दूरी बनाने की अपील!

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​विशेष रिपोर्ट: सुरेंदर राणा (वरिष्ठ पत्रकार)
​पंजाब दस्तक (शिमला): राजधानी शिमला में उपायुक्त (DC) कार्यालय के बाहर वैलिडेशन एक्ट के नाम पर ‘पेंशनर स्टेट एंड सेंटर जॉइंट फ्रंट’ के तथाकथित धरने को लेकर हिमाचल प्रदेश के वास्तविक पेंशनरों में भारी उबाल आ गया है। ऐतिहासिक रिज मैदान पर एकत्रित हुए विभिन्न विभागों के दर्जनों वरिष्ठ पेंशनरों ने इस धरने को मुट्ठी भर लोगों का ड्रामा बताते हुए स्वयंभू नेता आत्माराम के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोल दिया है।


​”असली मुद्दा 2016 से 2021 का एरियर, वैलिडेशन एक्ट सिर्फ चेहरा चमकाने का स्टंट”
रिज मैदान पर वरिष्ठ पत्रकार सुरेंदर राणा से विशेष बातचीत करते हुए सचिवालय से सेवानिवृत्त रमेश शर्मा जी, बी. आर. ठाकुर जी, वन विभाग से जी. एस. चंदेल जी, स्वास्थ्य विभाग से घनश्याम जी, वन विभाग से तीर्थराम जी और बक्शीराम जी सहित कई पूर्व अधिकारियों व कर्मचारियों ने तीखे तेवर दिखाए। पेंशनरों ने दो टूक कहा कि हिमाचल के बुजुर्ग पेंशनरों का आज सबसे बड़ा और जलता हुआ मुद्दा 2016 से 2021 के बीच रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन विसंगतियां और उनका रुका हुआ एरियर है। इस वास्तविक दर्द को छोड़कर तथाकथित नेता गैर-जरूरी मुद्दों पर 10-15 लोगों को साथ लेकर अपना चेहरा चमकाने में जुटा है।


​”बताए स्वयंभू नेता, उसके साथ हिमाचल का कौन सा पेंशनर खड़ा है?”
वरिष्ठ पेंशनरों ने गुस्से में कहा कि तथाकथित नेता को थोड़ी शर्म आनी चाहिए। उन्होंने सीधा सवाल दागा कि वह बताएं कि उनके साथ पूरे प्रदेश के कौन से पेंशनर खड़े हैं? पेंशनरों ने साफ किया कि एलआईसी, डाक विभाग या केंद्र के कुछ अन्य कर्मचारी यूनियनों की अपनी मांगें हो सकती हैं, लेकिन उनकी आड़ लेकर पूरे हिमाचल प्रदेश के पेंशनरों का नाम घसीटना सरासर गलत है। महज 10-12 लोगों की टोली जुटाकर पूरे प्रदेश का ठेकेदार बनने का ढोंग रचा जा रहा है।


​मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से अपील: ऐसे नेताओं को कतई मुंह न लगाए सरकार
सभी विभागों के एकजुट पेंशनरों ने माननीय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू जी से पुरजोर अपील की है कि सरकार और प्रशासन ऐसे स्वयंभू नेताओं से पूरी तरह दूरी बनाए रखे। पेंशनरों ने कहा कि ये लोग सिर्फ अपनी नेतागिरी चमकाने और सरकार की छवि खराब करने का काम कर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह प्रदेश के असली व जमीनी पेंशनरों की जायज मांगों—विशेषकर 2016 से 2021 के बकाए एरियर—का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करे।


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