इलेक्ट्रिक बसों की डिलीवरी में देरी करना कंपनी पर पड़ेगा भारी, लगेगा इतना जुर्माना

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शिमला, सुरेंद्र राणा: इलेक्ट्रिक बसों की डिलीवरी तय समय पर न करना कंपनी पर भारी पड़ गया है। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम ने टेंडर में तय की शर्तों के अनुसार बसों की डिलीवरी न करने पर कंपनी को भी इससे नुकसान उठाना पडेगा। टेंडर की शर्तों के अनुसार कुल लागत का दस प्रतिशत जुर्माना लग सकता है। मिली जानकारी के अनुसार इन बसों की खरीद के लिए 424.01 करोड़ रुपये का टेंडर हुआ है। ऐसे में 42 करोड़ के करीब जुर्माना कंपनी पर लग सकता है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में हाल ही में आयोजित निदेशक मंडल (बीओडी) की बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा की गई थी। बीओडी ने निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. निपुण जिंदल को आदेश दिए हैं कि टेंडर की तय शर्तों के अनुसार ही इस मामले में कार्रवाई की जाए। जुर्माना लगाने से पहले कंपनी का पक्ष भी सुन लिया जाए। कंपनी ने बसों की डिलीवरी में देरी के लिए तकनीकी कारण बताए हैं।इसमें कहा गया है कि इन ई-बसों की बैटरी में एक चिप लगती है, यह चीन में निर्मित होती है। चिप आने में हो रही देरी की वजह से ही मामला लटका हुआ है। निगम प्रबंधन का तर्क है कि टेंडर में शर्ते पहले से तय थी। कंपनी को बस की डिलीवरी के लिए पहले ही 11 महीने का समय दिया गया था, जो काफी ज्यादा है। निगम प्रबंधन के अधिकारी मान रहे हैं कि कंपनी ने जो तर्क दिए हैं वह वाजिब है, लेकिन प्रबंधन टेंडर में निहित शर्तों पर अड़ा हुआ है। कंपनी ने निगम प्रबंधन से आग्रह किया है कि उन पर जुर्माना न लगाया जाए, अप्रैल महीने से वह बसों की डिलीवरी करना शुरू कर देंगे। देरी की तकनीकी वजह बताते हुए कहा गया है कि दस प्रतिशत की राशि काफी ज्यादा है। उनका जो प्रॉफिट शेयर है वह भी इतना नहीं है।11 महीने का दिया था समयवर्ष 2025 में ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड को 297 बसों की खरीद का ऑर्डर जारी किया था। 424.01 करोड़ रुपये का टेंडर है। कंपनी ने 11 महीने में यह ऑर्डर पूरा करने का आश्वासन दिया था। कंपनी को 9 जनवरी तक 50 प्रतिशत यानी 149 बसों की डिलीवरी करनी थी। जिस में कंपनी सफल नहीं हुई है।निगम के पास बसों की कमीएचआरटीसी के पास बसों की कमी चल रही है। निगम ने हाल ही में अपने बेड़े से लगभग 100 से ज्यादा पुरानी बसों को हटा दिया है। अभी भी 150 के करीब बसें ऐसी हैं, जिनकी स्थिति बेहद खराब है। ये बसें 10 से 12 साल पुरानी हैं और इनका डेड माइलेज भी बढ़ गया है। इसलिए निगम इन बसों को बदलने की योजना बना रहा है। बसें न आने से निगम को मजबूरी में इन्हें चलाना पड़ रहा है।

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