तेहरान: अमरीका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए जा रहे हमलों के छठे दिन युद्ध का दायरा अब मिडल ईस्ट की सीमाओं को पार कर हिंद महासागर तक फैल चुका है। एक तरफ जहां ईरान के 33 नागरिक और सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ईरान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब केवल संयुक्त राज्य अमरीका, इजरायल, यूरोप और उनके पश्चिमी सहयोगियों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। ईरान की आईआरजीसी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर अमरीका, इजरायल, यूरोप या उनके समर्थक देशों का कोई भी जहाज इस महत्त्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करता है, तो उस पर निश्चित रूप से हमला किया जाएगा और उसे नष्ट कर दिया जाएगा। इससे पहले बुधवार को आईआरजीसी ने कहा था कि होर्मुज सिर्फ चीन के लिए बंद नहीं है। नए ऐलान के बाद अब साफ हो गया है कि भारत भी इस सख्ती से बाहर है और तेल इंडिया को भी मिलेगा। उधर, ईरान की इस कार्रवाई से वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है।
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का लगभग एक पांचवां हिस्सा (20 फीसदी) वहन करता है, जो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। बता दें कि ईरान ने संघर्ष शुरू होने के बाद से ही इस जलमार्ग को बंद कर रखा है। समुद्री ट्रैकिंग वेबसाइटों पर लाइव डाटा से साफ दिख रहा है कि कुवैत के पास उत्तर में और दुबई के तट से दूर सैकड़ों टैंकर और अन्य जहाज लंगर डाले खड़े हैं। जलडमरूमध्य के पूर्वी छोर पर ईरान का अपना बेड़ा भी बंदर अब्बास बंदरगाह के पास रुका हुआ है। जानकारों का मानना है कि पूर्ण नाकाबंदी से एशिया-यूरोप के मुख्य समुद्री मार्गों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन खाड़ी क्षेत्र के व्यापार और तेल-गैस आपूर्ति पर भारी दबाव पड़ेगा
