शिमला, सुरेंद्र राणा: हिमाचल प्रदेश में मानसून की बरसात ने कहार बरपा रखा है। शिमला में जगह-जगह लैंडस्लाइड हर हैं। जिसकी वजह से कई जगह यातायत भी कई घंटे तक बन्द रहा। शिमला के लाइफलाइन कही जाने वाले सर्कुलर सड़क में हिमलैंड के पास बड़ा लैंडस्लाइड आ गया। जिसकी चपेट में आधा दर्जन गाड़ियां आकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस सड़क में हुए स्लाइड का जायज़ा लेने के लिए लोक निर्माण मंत्री विक्रम सिंह अधिकारियों के साथ पहुंचे।
मीडिया से रूबरू विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकर सड़कों को खोलने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। खासकर सेब बहुल इलाकों में कई सड़कें बंद हैं। उनको खोलने के लिए 20 किलोमीटर की दुरी के बीच एसडीओ जेई तैनाट किए गए हैं, ताकि सेब बागवानों को अपना सेब मंडियों तक पहुंचाने में दिक्कत पेश ना आये। धर्मपुर बस अड्डे के बह जाने पर उन्होंने बताया कि सरकर ने ये फैसला लिया है कि आगे से नदी नालों के 100 मीटर की दुरी पर दफ्तर और मकानों का निर्माण न हो, ताकि नुकसान कम हो।
विक्रमादित्य सिंह ने ठेकेदारों और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सड़क निर्माण के मलबे को चयनित जगह पर ही डंप करें। जो ऐसा नहीं करेेगा उनके खिलाफ कड़ी करवाई अमल में लाई जायेगी। दोषी ठेकेदारों का लाइसेंस रदद किया जाएगा, जबकि अधिकारियों को चार्जशीट किया जाएगा। क्योंकि यही मलबा बारिश के पानी के साथ मिलकर तबाही मचा रहा है।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा की केंद्र सरकर हिमाचल प्रदेश की मदद तो कर रही है लेकिन आपदा के हिसाब से ये नाकाफी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल दौरे के दौरान 1500 करोड़ देने का एलान किया है। उसके लिए वह उनका धन्यवाद और आभार व्यक्त करते हैं। लेकिन जिस तरह की आपदा हिमाचल प्रदेश में आई है और उससे जो नुकसान हुआ है, उसको देखते हुए हिमाचल प्रदेश को बड़ी मदद की दरकार है। ताकि राहत पुनर्वास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
उन्होंने कहा की हिमाचल प्रदेश में अभी भी हजार से ज्यादा सड़कें बंद है। जिनको खोलने के लिए मशीनरी लगाई हुई है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती उन सड़कों को खोलने की है जिन सड़कों के बड़े हिस्से बह गए है। ऐसी सड़कों के लिए आगे से मजबूत दीवारों को लगाने की जरूरत है।
