ठियोग (निशांत ठाकुर): हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर से गुटबाजी का जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। शांत माने जाने वाले ठियोग की राजनीतिक फिजाओं में इन दिनों जबरदस्त सियासी तूफान देखने को मिल रहा है। वन निगम के अध्यक्ष केहर सिंह खाची के एक तीखे बयान ने पार्टी के भीतर नई हलचल पैदा कर दी है, जिसके बाद विवाद को थामने के लिए खुद कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह को मैदान में उतरकर मोर्चा संभालना पड़ा है।
सियासत की यह चिंगारी तब भड़की जब केहर सिंह खाची ने स्थानीय विधायक और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर पर सीधा और तीखा निशाना साधा। खाची ने तंज कसते हुए दो टूक शब्दों में कह दिया कि चुनाव से पहले ठियोग में राठौर को गिने-चुने लोग ही जानते थे। बात यहीं नहीं रुकी, उन्होंने भविष्य की दावेदारी को लेकर भी बड़ा दावा ठोकते हुए कहा कि आगामी चुनावों में पार्टी का टिकट किसे मिलेगा, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा। इस अप्रत्याशित बयान ने ठियोग से लेकर शिमला तक कांग्रेस के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
खाची के इस बेबाक बयान के बाद सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। विवाद को बढ़ता देख कुलदीप सिंह राठौर के मजबूत बचाव में सीधे तौर पर कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने ढाल बनकर एंट्री ली। विक्रमादित्य ने खाची के दावों पर पलटवार करते हुए राठौर के लंबे राजनीतिक संघर्ष और कांग्रेस पार्टी के प्रति उनके ऐतिहासिक योगदान की जमकर पैरवी की। उन्होंने अपनी बात रखते हुए साफ संदेश दिया कि राठौर पार्टी के कद्दावर नेता हैं और उनके समर्पण को किसी भी हाल में कम करके नहीं आंका जा सकता।
इस तीखी जुबानी जंग के बाद अब ठियोग में कांग्रेस के अंदर नेतृत्व और टिकट की दावेदारी को लेकर नए सियासी समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। नेताओं की इस आपसी बयानबाजी ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में यहां वर्चस्व की लड़ाई और भी दिलचस्प होने वाली है।
ऐसी ही सटीक, निष्पक्ष और बेबाक खबरों के लिए पंजाब दस्तक के यूट्यूब चैनल, फेसबुक पेज और वेबसाइट को लाइक, फॉलो और सब्सक्राइब करना न भूलें। आपके सब्सक्राइब करने से हमारा मनोबल बढ़ता है। अगर आपके पास भी अपने क्षेत्र की कोई खबर है, तो हमारे मीडिया प्लेटफॉर्म पर जरूर भेजें।
देखते रहें पंजाब दस्तक!

