विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा
पंजाब दस्तक ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश की 14वीं विधानसभा के आगामी सत्र को लेकर शिमला की सियासी फिजाओं में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा सचिवालय पूरी तरह एक्शन मोड में है और सत्र के रणनीतिक संचालन का खाका तैयार कर लिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष ने मीडिया से मुखातिब होते हुए स्पष्ट किया कि सदन के भीतर जनहित के मुद्दों पर नियमों के तहत पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही तय होगी। आगामी सत्र में कुल 10 महत्वपूर्ण बैठकें (Sittings) आयोजित की जाएंगी, जिनमें जनहित से जुड़े कई अहम सरकारी विधेयकों को पटल पर रखा जाएगा।
1036 सवालों की गूंज और कड़े नियमों के तहत नोटिसों की फेहरिस्त
सदन में जनता के मुद्दों को उठाने के लिए पक्ष और विपक्ष के विधायकों की ओर से रिकॉर्ड नोटिस प्राप्त हुए हैं। 18 तारीख की तय समय-सीमा तक विधानसभा सचिवालय को कुल 1036 प्रश्नों की ऑनलाइन सूचनाएं मिली हैं। इनमें 787 तारांकित (Starred) और 249 अतारांकित (Unstarred) प्रश्न शामिल हैं, जिन्हें विधिवत उत्तर तैयार करने के लिए राज्य सरकार को भेज दिया गया है।
नियम 62 (ध्यानाकर्षण प्रस्ताव / Call Attention): 13 नोटिस
नियम 63 (दो घंटे की विशेष चर्चा / Two Hours Discussion): 2 नोटिस
नियम 101 (गैर-सरकारी सदस्य कार्य दिवस / Private Members’ Day): 5 नोटिस (संबंधित कार्य दिवस पर होगी विस्तृत चर्चा)
नियम 130 (प्रदेश हित के ज्वलंत विषय): 15 नोटिस (सत्तारूढ़ और विपक्ष दोनों पक्षों के समान मुद्दों को क्लब/टैग किया गया है, जिन पर न्यूनतम 2 घंटे से लेकर आवश्यकतानुसार 2 दिन तक विस्तृत चर्चा चलेगी)
सत्र का शेड्यूल, सर्वदलीय बैठक और 132% प्रोडक्टिविटी का रिकॉर्ड
विधानसभा का यह सत्र 21 तारीख को प्रातः 11:00 बजे आरंभ होगा। पहले दिन यानी 21 तारीख की कार्यसूची (Business List) को 20 तारीख को अंतिम रूप दिया जाएगा। सदन की कार्यवाही सुचारू और मर्यादित ढंग से चले, इसके लिए 20 तारीख को सायं 4:30 बजे सर्वदलीय बैठक (All Party Meeting) बुलाई गई है।
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि 14वीं विधानसभा की कार्य उत्पादकता (Productivity) पूरे देश में मिसाल बनी है। सदन ने 90% से ऊपर का कार्य निष्पादन करते हुए 132% तक का ऐतिहासिक स्तर दर्ज किया है। पक्ष और विपक्ष दोनों के सहयोग से प्रदेश के हर वर्ग से जुड़े मसलों पर बेबाक और सार्थक चर्चा होगी।
इन तीन बड़े मोर्चों पर केंद्रित रहेंगे सवाल
सदस्यों द्वारा भेजे गए सवालों में मुख्य रूप से तीन बड़े जनहित के मुद्दे शामिल हैं:
शिक्षा का ढांचा: दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षकों के रिक्त पद, सीबीएसई पैटर्न पर अधिसूचित स्कूलों में प्रिंसिपलों की नियमित तैनाती और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से चयनित अंग्रेजी व गणित के अलावा अन्य विषयों के प्रवक्ताओं (Lecturers) की पदस्थापना।
स्वास्थ्य एवं मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर: प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में अत्याधुनिक मशीनरी की उपलब्धता, दवाओं व जरूरी तकनीकी उपकरणों की निर्बाध सप्लाई और रिक्त पदों को भरना।
आपदा का प्रभाव: भारी बरसात और प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और पेयजल योजनाओं के पुनर्निर्माण का मुद्दा।
सूचनाओं की समय-सीमा और हिमाचल के नियमों का पूरे देश में डंका
सवालों के जवाब में लगने वाले समय पर अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सूचना मांगना माननीय सदस्यों का लोकतांत्रिक अधिकार है और उसे उपलब्ध कराना सचिवालय का दायित्व। जब सरकार अतिरिक्त समय मांगती है, तो उसी दिन जवाब देने के लिए बाध्य करने का कोई नियम न तो राज्य विधानसभाओं में है और न ही लोकसभा में।
देशभर के विधायी सदनों में नियमों और प्रक्रियाओं की एकरूपता (Uniform Rules) सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा द्वारा गठित समिति को रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है। पूरे देश में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के नियमों और कार्यप्रणाली को सबसे उत्कृष्ट और आदर्श आंका गया है।
मंत्रियों के आश्वासनों पर नजर: गठित होगी स्वतंत्र ‘एश्योरेंस कमेटी’
सदन के भीतर मंत्रियों द्वारा की जाने वाली घोषणाओं और आश्वासनों पर अध्यक्ष ने कहा कि पूर्व में विधानसभा में अलग से एश्योरेंस कमेटी होती थी, जिसके बाद यह दायित्व संबंधित स्टैंडिंग कमेटियों के दायरे में आ गया था। यदि स्टैंडिंग कमेटियों में आश्वासनों पर त्वरित कार्रवाई नहीं पाई गई, तो याचिका समिति और शून्यकाल की तर्ज पर विधानसभा अध्यक्ष के विशेषाधिकार के तहत एक स्वतंत्र ‘एश्योरेंस कमेटी’ का पुनः गठन किया जाएगा। सदन के रिकॉर्ड पर कही गई प्रत्येक बात पूर्णतः सत्य और प्रामाणिक मानी जाती है, लिहाजा मंत्रियों द्वारा सदन में दिए गए आश्वासनों का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित कराना विधानसभा का दायित्व है।
विधायकों पर एफआईआर, गिरफ्तारी और विशेषाधिकार हनन पर स्थिति स्पष्ट
प्राथमिकी व गिरफ्तारी नियम: किसी भी विधायक पर एफआईआर दर्ज होते ही संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) द्वारा उसकी प्रति विधानसभा सचिवालय और माननीय न्यायालय को भेजी जाती है। नियमानुसार विधानसभा स्तर पर निलंबन (Suspension) की कार्रवाई केवल गिरफ्तारी (Arrest) की स्थिति में ही होती है; जमानत मिलने पर न्यायिक प्रक्रिया अपने तय कानूनी नियमों से चलती है।
विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion): ऐसे मामलों की प्रारंभिक सुनवाई स्पीकर स्तर पर चेंबर में की जाती है, जहां अधिकांश विवाद आपसी समन्वय और समझ से सुलझा लिए जाते हैं। फिलहाल केवल 5 से 7 मामले प्रक्रियाधीन हैं। इंस्पेक्टर से जुड़ा पुराना प्रकरण सुलझ चुका है और राज्यसभा सांसद से संबंधित कोई भी मामला लंबित नहीं है।
याचिका समिति (Petitions Committee): प्राप्त 150 से अधिक जन-याचिकाओं में से लगभग 75 का सफल निस्तारण किया जा चुका है, जिसमें 99.9% मामलों में याचिकाकर्ताओं को सीधा न्याय और राहत मिली है।
100 वर्षीय ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण और भविष्य का परिसीमन
वर्ष 1925 में स्थापित इस ऐतिहासिक विधानसभा भवन के 100 वर्ष पूरे होने पर इसके मूल स्वरूप को संरक्षित रखते हुए छत की मरम्मत और स्थायी फसाड लाइटिंग (Facade Lighting) से इसका सौंदर्य निखारा गया है। वर्तमान में दो सीटें रिक्त होने से सदन की वास्तविक संख्या 64 के आसपास है। भविष्य में परिसीमन (Delimitation) के बाद यदि सदस्यों की संख्या बढ़ती है, तो नए विधानसभा परिसर के निर्माण की संभावनाओं पर विचार करना होगा।
समिति प्रणाली की गोपनीयता और संसदीय मर्यादा
पीएसी (PAC) और पीयूसी (PUC) जैसी वित्तीय समितियों की बैठकों के ब्योरे को सीधे सार्वजनिक न करने पर स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि सीएजी (CAG) की रिपोर्ट की जांच के दौरान कई ऑडिट आपत्तियां ड्रॉप होती हैं और कई में सुधार होता है। संसदीय गरिमा और नियमों के तहत जब तक समिति की अंतिम रिपोर्ट सदन के पटल पर प्रस्तुत नहीं हो जाती, तब तक आंतरिक चर्चा को प्रेस या सार्वजनिक दायरे में जारी नहीं किया जा सकता।
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