विशेष रिपोर्ट: भेषज, धर्मशाला
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं धर्मशाला के लोकप्रिय विधायक सुधीर शर्मा के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध में धर्मशाला की सड़कों पर भाजपा कार्यकर्ताओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। जिले के विभिन्न मंडलों और बूथ स्तर से पहुंचे कार्यकर्ताओं ने सुक्खू सरकार के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी और इसे सीधे तौर पर ‘सुधीर शर्मा के बढ़ते सियासी कद व जनप्रिय छवि को धूमिल करने की राजनीतिक साजिश’ करार दिया।
प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेता संजीव शास्त्री ने दो टूक कहा कि धर्मशाला नगर निगम चुनाव से लेकर हर मोर्चे पर सुधीर शर्मा की मजबूत पकड़ और लोकप्रियता जगजाहिर है। जब सरकार ने पूरा जोर लगा दिया था, तब भी सुधीर शर्मा के नेतृत्व में नगर निगम में शानदार जीत दर्ज की गई थी। आज उसी जमीनी पकड़ और भारी जनसमर्थन से बौखलाकर कांग्रेस सरकार उनकी बेदाग छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए झूठे मुकदमों का सहारा ले रही है। शास्त्री ने स्पष्ट किया कि भाजपा कार्यकर्ता अपने लोकप्रिय नेता के साथ चट्टान की तरह खड़ा है और सरकार के इस दबाव तंत्र के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेगा।
सुधीर के शक्ति प्रदर्शन से ‘काजल’ गायब: कांगड़ा भाजपा में खींचतान सतह पर
एक तरफ जहां सुधीर शर्मा के समर्थन में भारी जनदबाव और एकजुटता दिखी, वहीं दूसरी ओर इस विरोध प्रदर्शन ने कांगड़ा भाजपा के भीतर धधक रही अंदरूनी गुटबाजी का कच्चा-चिट्ठा भी बेपर्दा कर दिया। सुधीर शर्मा के समर्थन में आयोजित इस बड़े जमावड़े से कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक पवन काजल पूरी तरह नदारद रहे।
चर्चा है कि पवन काजल न केवल खुद इस रैली से दूर रहे, बल्कि सूत्रों के अनुसार कांगड़ा मंडल के कार्यकर्ताओं को भी धर्मशाला रैली में जाने से रोकने के सख्त अंदरूनी निर्देश दिए गए थे। कांगड़ा से न तो नेता पहुंचे और न ही कार्यकर्ता, जिसने यह साबित कर दिया कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। सुधीर शर्मा के बढ़ते सियासी प्रभाव और क्षेत्र में उनके दबदबे के बीच संकट की इस घड़ी में पड़ोसी विधायक का खुलकर दूरी बनाना पार्टी हाईकमान के लिए बड़ा सवाल खड़ा कर गया है।
सियासी गलियारों में सुलगते सवाल
जब धर्मशाला में अपनी मजबूत पकड़ और जनसमर्थन का लोहा मनवा चुके वरिष्ठ विधायक को राजनीतिक द्वेष के तहत निशाना बनाया जा रहा है, तब पड़ोसी विधानसभा क्षेत्र के कद्दावर भाजपा विधायक का किनारा कर लेना क्या पार्टी अनुशासन को खुली चुनौती नहीं है?
क्या सुधीर शर्मा की बढ़ती लोकप्रियता और नगर निगम से लेकर क्षेत्र तक के सियासी प्रभाव से कांगड़ा भाजपा का एक खेमा असहज महसूस कर रहा है?
क्या भाजपा नेतृत्व इस अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी पर समय रहते लगाम कस पाएगा या फिर यह वर्चस्व की जंग आने वाले दिनों में और विकराल रूप लेगी?
सरकार विरोधी प्रदर्शन के बीच कांगड़ा भाजपा में उपजा यह ‘शीतयुद्ध’ अब पूरे प्रदेश के सियासी हलकों में सबसे गर्म चर्चा का विषय बन चुका है।
(ऐसी ही हर ब्रेकिंग, सटीक और बेबाक ग्राउंड रिपोर्ट देखने व पढ़ने के लिए पंजाब दस्तक की वेबसाइट पर जाएं, यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें तथा फेसबुक पेज को फॉलो व शेयर करें। हर पल की निष्पक्ष खबरों के लिए जुड़े रहें और देखते रहें—पंजाब दस्तक)

