हिमाचल में सरकारी गाड़ियों के दुरुपयोग पर पंजाब दस्तक की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

हिमाचल में सरकारी गाड़ियों की अनियंत्रित लूट पर पंजाब दस्तक की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: कैसे होता है फर्जी लॉगबुक का खेल, क्या केंद्र की तर्ज पर हिमाचल में भी लागू होगी ‘एक अफसर, एक गाड़ी’ की नीति?

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​’डाक ड्यूटी’ और फर्जी ‘मीटिंग्स’ के नाम पर बेधड़क दौड़ रही हैं गाड़ियां; वीआईपी कल्चर (VIP Culture) पर केंद्र सख्त, अब हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू से कड़े फैसले की आस


​शिमला (विशेष प्रतिनिधि – सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक)
हिमाचल प्रदेश में जहाँ एक तरफ वित्तीय स्थिति को सुधारने और आपदा प्रभावितों की मदद के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू पाई-पाई सहेजने के लिए कड़े व ऐतिहासिक फैसले ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य की नौकरशाही सरकारी संसाधनों पर बेधड़क डाका डाल रही है।
​हाल ही में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (व्यय विभाग) ने वीआईपी कल्चर पर कड़ा प्रहार करते हुए और सरकारी खर्च में कटौती के लिए नौकरशाही के लिए “एक अधिकारी, एक सरकारी गाड़ी” (One Officer, One Official Car) की नीति लागू कर दी है। इसके तहत यदि किसी अधिकारी को अतिरिक्त विभाग की जिम्मेदारी (Additional Charge) मिलती है, तो उसे दूसरी सरकारी गाड़ी नहीं दी जाएगी। केंद्र के इस सख्त कदम के बाद अब पंजाब दस्तक की ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए हिमाचल प्रदेश में भी इसी तर्ज पर नीति लागू करने की जोरदार मांग उठी है।


​कैसे होता है फर्जीवाड़े का ‘एडजस्टमेंट’? लॉगबुक में ऐसे भरा जाता है फर्जी किलोमीटर
​पंजाब दस्तक की पड़ताल में सामने आया है कि अफसर और उनका निजी स्टाफ किस प्रकार कागजों में हेरफेर करके गाड़ियों का दुरुपयोग छिपाते हैं:
​’डाक ड्यूटी’, मीटिंग्स और अन्य बहानों का सहारा: लॉगबुक में ‘डाक ड्यूटी’ (Dak Duty), ‘अदालती कार्यवाही’, ‘साइट विजिट’ या ‘विशेष बैठक’ (Meeting) जैसे अन्य तमाम बहाने बनाकर फर्जी एंट्रियां ठोंक दी जाती हैं।
​मीटिंग्स का सच: जमीनी हकीकत यह है कि ये मीटिंग्स और आधिकारिक दौरे अक्सर कागजों में ही सीमित रहते हैं या निजी सहूलियत के दौरों को मीटिंग का नाम दे दिया जाता है।


​जूनियर स्टाफ पर दबाव: अफसर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जूनियर कर्मचारियों और ड्राइवरों से लॉगबुक पर दस्तखत करवा लेते हैं, ताकि निजी दौरों (जैसे परिवार को घुमाना, खरीदारी, बच्चों को स्कूल छोड़ना या मंदिरों में दर्शन) को सरकारी काम में एडजस्ट किया जा सके।


​ब्लॉक स्तर तक फैला मकड़जाल: PWD और जल शक्ति (IPH) विभाग में खुली छूट
​केवल सचिवालय ही नहीं, बल्कि ब्लॉक स्तर तक सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जिन अनुबंधित (Outsourced) टैक्सियों को युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से विभागों में लगाया था, उनका इस्तेमाल अधिकारी अपनी निजी संपत्ति की तरह कर रहे हैं।
​एसडीओ (SDO) स्तर तक मिसयूज: जल शक्ति विभाग (IPH) और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी इन टैक्सियों का प्रयोग अपने माता-पिता, बच्चों और रिश्तेदारों को घुमाने में कर रहे हैं।
​चंडीगढ़ और बाहरी टूर: सरकारी बैठकों के नाम पर चंडीगढ़ और अन्य राज्यों के निजी दौरों का पूरा खर्चा सरकारी खजाने से वसूला जा रहा है।


​पंजाब दस्तक के दर्शकों और जनता की मांग: कड़ा फैसला लें मुख्यमंत्री
​पंजाब दस्तक पर इस मुद्दे के सामने आने के बाद जनता और हमारे दर्शकों के लगातार बेहद कड़े और समर्थन भरे कमेंट्स आ रहे हैं। हिमाचल की जनता को अपने लोकप्रिय और तड़क-भड़क कड़े फैसले लेने वाले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू से पूरी उम्मीद है कि वे इस फिजूलखर्ची पर नकेल कसेंगे।


​जनहित और ग्राउंड रिपोर्ट से सीधे सुझाव:
​’एक अफसर – एक गाड़ी’ की नीति: केंद्र सरकार की तर्ज पर हिमाचल में भी तत्काल अधिसूचना जारी हो। प्रभार चाहे 4 विभागों का हो, गाड़ी सिर्फ एक ही मिलेगी।
​केंद्रीकृत नियंत्रण कक्ष (Centralized Control Room): एक स्टेट लेवल कंट्रोल रूम बने, जो हर विभाग की कुल गाड़ियों, उनकी लाइव लोकेशन और महीने के कुल पेट्रोल-डीजल खर्च पर सीधी नजर रखे।
​नो-रनिंग डे (No-Running Day): पूर्व सरकारों की तर्ज पर हफ्ते में एक दिन (जैसे शनिवार या सोमवार) सरकारी वाहनों के चलने पर पूर्ण रोक लगे। इससे सीधे तौर पर करोड़ों रुपये बचेंगे।
​डिजिटल और जीपीएस मैपिंग: डाक ड्यूटी और अन्य बहानों के नाम पर फर्जी किलोमीटर भरने का खेल खत्म करने के लिए हर वाहन में जीपीएस अनिवार्य किया जाए।


​(नोट: प्रशासनिक अधिकारियों के बाद पंजाब दस्तक अपनी अगली ग्राउंड रिपोर्ट में मंत्रियों और उच्च स्तरीय व्यवस्था में वाहनों के दुरुपयोग पर बड़ा पर्दाफाश करेगा।)

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