शिमला (मीनाक्षी): हिमाचल प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) और बकाया एरियर को लेकर प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सक्षम अधिकारियों को छह सप्ताह की तय समय-सीमा दी है, ताकि कर्मचारियों के लम्बित दावों पर विधिवत निर्णय लेकर पात्र पाए जाने पर तुरंत राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
बराबरी के हक की मांग पर अदालत का रुख
राज्य सरकार के कर्मियों की ओर से दायर आठ अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने यह व्यवस्था दी। कर्मचारियों का मुख्य पक्ष था कि:
1 जुलाई 2022 से रुकी देनदारी: सरकार के पूर्व ज्ञापनों के आधार पर कर्मचारियों को डीए की पांच किस्तों और बकाया एरियर का भुगतान अभी तक लटका कर रखा गया है।
भेदभाव का आरोप: याचिकाओं में सवाल उठाया गया कि जब राज्य सरकार ने एक विशेष वर्ग को केंद्रीय दरों के आधार पर तय तिथियों से डीए का लाभ दे दिया है, तो बाकी कर्मियों के साथ यह दोहरा रवैया क्यों? सभी को समान अधिकार मिलना चाहिए।
सरकार के पाले में गेंद, 42 दिन का अल्टीमेटम
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों ने सक्षम प्राधिकारियों के सामने 18 मई 2026 को ही अपनी मांग रख दी थी, मगर महीनों बीतने के बावजूद प्रशासन मौन साधे बैठा रहा।
अदालत ने याचिकाओं का निपटारा करते हुए सरकार को 6 सप्ताह का समय दिया है कि वह नियमों की कसौटी पर इन मांगों का परीक्षण करे। यदि कर्मचारी नियमानुसार पात्र हैं, तो इसी निर्धारित मियाद के भीतर उनके बकाए का भुगतान खाते में डालना होगा। अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब प्रदेश सरकार पर वित्तीय देनदारियों को लेकर दबाव बढ़ गया है।
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हिमाचल हाई कोर्ट से मीनाक्षी की ग्राउंड रिपोर्ट

