राजधानी की प्यास पर कुदरत और सिस्टम की दोहरी मार, SJPNL ने हाथ खड़े कर जारी किया अल्टीमेटम; शिमला वासियों व होटल कारोबारियों की बढ़ीं धड़कनें
शिमला (विशेष ग्राउंड रिपोर्ट – सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक)
पहाड़ों की रानी शिमला पर एक बार फिर पेयजल का बड़ा संकट मंडरा गया है। राजधानी के लाखों बाशिंदों और यहाँ पहुंचे हजारों सैलानियों के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद भारी गुजरने वाले हैं। शहर के अधिकांश वार्डों में नलों से पानी पूरी तरह नदारद रहेगा और जलापूर्ति का पूरा ढांचा बुरी तरह ठप हो चुका है।
मानसूनी बारिश के प्रचंड रूप के बीच प्रमुख पेयजल परियोजनाओं पर गाद (सिल्ट) का भयावह हमला हुआ है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य ट्रांसफार्मर जलने से पानी की लिफ्टिंग सिस्टम पूरी तरह धड़ाम हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (SJPNL) ने औपचारिक चेतावनी जारी कर हाथ खड़े कर दिए हैं।
1. सिल्ट का ‘सर्जिकल अटैक’ और फुंका ट्रांसफार्मर: गिरी-गुम्मा ठप
पंजाब दस्तक की एक्सक्लूसिव पड़ताल के अनुसार, शिमला की लाइफलाइन मानी जाने वाली गिरी और गुम्मा पेयजल परियोजनाओं की कमर टूट गई है:
गाद की जलप्रलय: कैचमेंट एरिया में हो रही मूसलाधार बारिश से नदियों में पानी के साथ आई भारी सिल्ट (गाद व कीचड़) ने पंपिंग टरबाइनों का दम घोंट दिया है। मटमैले पानी के कारण लिफ्टिंग पूरी तरह रोकनी पड़ी है।
ट्रांसफार्मर ब्लास्ट: रही-सही कसर बिजली आपूर्ति के मुख्य ट्रांसफार्मर के अचानक जलने और आई भीषण तकनीकी खराबी ने पूरी कर दी। इसके चलते पानी को शिमला तक खींचने की क्षमता शून्य के करीब पहुंच चुकी है।
2. युद्ध स्तर पर जंग जारी, लेकिन तुरंत राहत के आसार कम
SJPNL के आला अधिकारी और इंजीनियरों की विशेष टीमें घटनास्थल पर मोर्चा संभाले हुए हैं। जले हुए ट्रांसफार्मर की मरम्मत करने और पंपिंग हाउस से सैकड़ों टन सिल्ट को हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। हालांकि, जल स्रोतों में गाद का स्तर इतना अधिक है कि व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने में अभी कुछ दिनों का वक्त लगेगा।
3. पंजाब दस्तक का बड़ा अलर्ट: सहेजें पानी, वरना तरसेंगे!
पेजजल संकट की इस विकराल आहट को देखते हुए पंजाब दस्तक शिमला के तमाम नागरिकों, व्यावसायिक संस्थानों, रेस्तरां और होटल संचालकों को आगाह करता है कि स्थिति सामान्य होने तक पानी की हर एक बूंद की कीमत समझें।
पंजाब दस्तक की सीधी एडवाइजरी:
पानी का विवेकपूर्ण उपयोग: गाड़ियों की धुलाई, निर्माण कार्य और पार्कों में पानी देने जैसी फिजूलखर्ची पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगाएं।
भंडारण व संयम: घर में मौजूद पानी का उपयोग केवल अति-आवश्यक कार्यों के लिए ही करें ताकि संकट के इस दौर में हर घर तक सीमित सप्लाई भी पहुंच सके।
प्रशासनिक दावों के बीच जमीनी सच्चाई यही है कि जब तक नदियों में सिल्ट का अटैक कम नहीं होता और ट्रांसफार्मर पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, तब तक शिमला वासियों को पानी की एक-एक बूंद सहेज कर रखनी होगी।
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