वाराणसी (यूपी ब्यूरो – विशाल यादव):
यूपी में जहाँ एक तरफ योगी सरकार का अपराधियों और भ्रष्टाचारियों पर सख्त डंडा चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ सरकारी बाबुओं की भूख शांत होने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला वाराणसी का है, जहाँ स्टेट जीएसटी (State GST) विभाग की डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह (सेक्टर-6) को 50,000 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया गया। इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि कानून के हाथ कितने लंबे हैं, लेकिन साथ ही यह शर्मनाक हकीकत भी सामने ला दी है कि इन बड़े अफसरों की नीयत कितनी गिर चुकी है।
आखिर कितनी भूख बाकी है?
आज पूरे भारतवर्ष के लोग और पंजाब दस्तक यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इन अफसरों को सरकार से कितनी सैलरी और सुविधाएं चाहिए? देश में ऐसे न जाने कितने करप्ट अफसर छिपे बैठे हैं, जिन पर अभी कैमरे की नजर नहीं पड़ी है और जो सिर्फ अपनी काली कमाई का राज मचाए हुए हैं। मोदी सरकार और राज्य सरकार की ओर से इन्हें हर महीने लाखों रुपये की मोटी तनख्वाह, गाड़ियां और बंगले दिए जाते हैं। जनता के टैक्स के पैसे से ऐश करने वाले इन अफसरों का पेट फिर भी नहीं भरता। 50 हजार रुपये की रिश्वत के लिए एक जिम्मेदार पद पर बैठी महिला अधिकारी ने अपनी पूरी साख और विभाग की इज्जत को नीलाम कर दिया। क्या इन अफसरों का गुजारा अब ईमानदारी के पैसों से नहीं हो रहा है?
हाई-वोल्टेज ड्रामा और गिरफ्तारी
मामला एक प्राइवेट फर्म की जीएसटी फाइल क्लियर करने का था, जिसके बदले यह मोटी रकम मांगी गई थी। विजिलेंस की टीम ने भेलूपुर/चेतगंज इलाके में पूरा जाल बिछाया और जैसे ही केमिकल लगे नोटों के साथ जालसाजी पकड़ी गई, वैसे ही साहिबा का सारा रौब काफूर हो गया। इन भ्रष्टाचारियों को यह समझ लेना चाहिए कि कभी न कभी कैमरे की मार और कानून का फंदा इन पर कसना तय है, और तब इंसाफ की ताकत अपना असली रूप दिखाएगी। रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद जो ड्रामा हुआ, उसने पूरे महकमे को शर्मसार कर दिया है।
योगी सरकार में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर सिर्फ निलंबन की कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि इन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजकर ऐसी सख्त सजा दी जानी चाहिए जो पूरे सिस्टम के लिए एक नजीर बने।
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