जुब्बल के रामपुरी जातर मेले के समापन समारोह में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर

​जुब्बल के ऐतिहासिक रामपुरी जातर मेले का भव्य समापन: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर बोले— ‘जुब्बल-कोटखाई में ₹550 करोड़ के विकास कार्य प्रगति पर, युद्ध स्तर पर जारी है ऐतिहासिक निर्माण’

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पंजाब दस्तक
जुब्बल (शिमला)
​विशेष रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ


जुब्बल:शिमला जनपद के ऐतिहासिक क्षेत्र जुब्बल में तीन दिवसीय जिला स्तरीय रामपुरी जातर मेले का आज पारंपरिक हर्षोल्लास और भव्यता के साथ समापन हो गया। मेले के इस गरिमामयी समापन अवसर पर प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने मुख्य अतिथि के रूप में विशेष तौर पर शिरकत की। रामपुरी पहुंचने पर स्थानीय जनता, मेला कमेटी और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने मुख्य अतिथि का ढोल-नगाड़ों व पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों के साथ अत्यंत भव्य और गर्मजोशी से स्वागत किया।


​समारोह को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने क्षेत्रवासियों को मेले की बधाई देने के साथ-साथ जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों के बड़े आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग (PWD) के माध्यम से लगभग 550 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत के विकास कार्य प्रगति पर हैं। इस राशि से समूचे क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण सड़कों एवं सरकारी भवनों का निर्माण कार्य तेजी से करवाया जा रहा है, जिससे जुब्बल-नावर-कोटखाई में विकास कार्यों को एक नई गति मिली है।


​शिक्षा मंत्री ने कहा कि आईटीआई जुब्बल में लगभग 11 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित ‘शहरी आजीविका केंद्र’ का भव्य भवन जनता को समर्पित किया जा चुका है। इसके साथ ही, स्थानीय लोगों व श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रामपुर मेला मैदान तक जाने वाली सड़क का पक्कीकरण (टारिंग) कार्य भी पूरी तरह संपन्न कर लिया गया है। उन्होंने क्षेत्र को मिली एक और बड़ी सौगात का जिक्र करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत पराली के डिकेड में ‘स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल मैनेजमेंट एंड ट्रेनिंग’ (SIEMAT – सीमैट) जुब्बल का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, जो प्रदेश में शैक्षिक नियोजन, प्रबंधन और अनुसंधान को नई ऊंचाइयां देगा।
​शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने मेले के सफल संचालन के लिए मेला कमेटी को अपनी ऐच्छिक निधि से ₹50,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।


​अपने संबोधन में उन्होंने विशेष जोर दिया कि हमारी समृद्ध देव संस्कृति, प्राचीन परंपराएं और इस तरह के ऐतिहासिक मेले हिमाचल प्रदेश की असली पहचान हैं। यह मेले न केवल हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक कलाओं को नई पीढ़ी के लिए संजोए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और सौहार्द की भावना को भी निरंतर सुदृढ़ करते हैं।


​तीन दिनों तक चले इस जिला स्तरीय मेले के समापन अवसर पर स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक महासूई नाटी ने उपस्थित जनसमूह को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया। शिक्षा मंत्री ने मेला प्रबंध समिति के प्रयासों की जमकर सराहना की और विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों व कलाकारों को सम्मानित किया।
​इस ऐतिहासिक समापन समारोह में स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधि, मेला कमेटी के सदस्य, गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में स्थानीय मातृशक्ति व क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।


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