माता-पिता के चरण स्पर्श करते हुए युवक, सनातन परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

पंजाब दस्तक विशेष: सनातन और मॉडर्न साइंस – सच या संयोग (एपिसोड 1)​पैर छूने से बदलता है आपका भाग्य: जानिए इस सनातनी परंपरा के पीछे छिपा ‘इलेक्ट्रिक सर्किट’

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​बाय: वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र राणा
​न्यूज डेस्क, पंजाब दस्तक
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बच्चों में उच्च संस्कारों की नींव मजबूत करने और उन्हें सनातन संस्कृति के वैज्ञानिक पहलुओं से जागरूक करने के लिए पंजाब दस्तक हर रविवार (संडे) एक विशेष प्रस्तुति लेकर आएगा। आज की युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए यह हमारी एक नई और अनोखी मुहिम है।


​बचपन से ही हमें अपने माता-पिता, गुरुजनों, बुजुर्गों और बड़ों के पैर छूना सिखाया जाता है। हम सब इसे केवल बड़ों के प्रति आदर, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का एक माध्यम मानते आ रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे त्रिकालदर्शी ऋषियों-मुनियों ने सम्मान प्रकट करने के लिए सिर्फ पैर छूने की ही परंपरा क्यों बनाई? वे चाहते तो हाथ मिलाने (Handshake), गले मिलने या सिर्फ दूर से नमस्ते करने का नियम भी बना सकते थे। आखिर झुककर चरण स्पर्श करने और बड़ों का आशीर्वाद लेने के पीछे का वास्तविक रहस्य क्या है?


​पंजाब दस्तक की बिल्कुल नई और बेहद दिलचस्प श्रृंखला ‘सनातन और मॉडर्न साइंस: सच या संयोग’ के इस पहले एपिसोड में आज हम इसी अद्भुत रहस्य से पर्दा उठाने जा रहे हैं कि कैसे मां-बाप और गुरुओं के चरण छूने से आपका भाग्य बदल जाता है।


​चरण स्पर्श के पीछे का ‘क्लोज्ड लूप सर्किट’
​विज्ञान के अनुसार, मानव शरीर में ऊर्जा का प्रवाह लगातार होता रहता है और यह ऊर्जा हमेशा पॉजिटिव पोल (धनात्मक ध्रुव) से नेगेटिव पोल (ऋणात्मक ध्रुव) की तरफ बहती है। हमारा सिर ऊर्जा का मुख्य केंद्र (पॉजिटिव पोल) माना जाता है और पैर ऊर्जा को ग्रहण करने वाले केंद्र होते हैं।


​जब आप पूरी श्रद्धा के साथ झुककर अपने माता-पिता, बुजुर्गों या गुरुजनों के पैर छूते हैं, तो एक अदभुत वैज्ञानिक घटना घटती है:
​ऊर्जा का प्रवाह: झुकते समय आपके हाथों की उंगलियां (जो ऊर्जा को बाहर छोड़ती हैं) सामने वाले पूजनीय व्यक्ति के पैरों को स्पर्श करती हैं।
​आशीर्वाद का चक्र: ठीक उसी समय, सामने वाले बुजुर्ग या गुरु का हाथ आपके सिर (पॉजिटिव पोल) पर आशीर्वाद देने के लिए उठता है।
​बायो-इलेक्ट्रिक सर्किट: विज्ञान की भाषा में इसे ‘क्लोज्ड लूप सर्किट’ (Closed Loop Circuit) कहा जाता है। आपके हाथ उनके पैरों पर और उनका हाथ आपके सिर पर—यह एक पूरा विद्युत परिपथ (सर्किल) तैयार कर देता है।


​कैसे बदलता है आपका भाग्य?
​इस पवित्र स्पर्श और क्लोज्ड लूप सर्किट के बनते ही दोनों शरीरों के बीच बायो-इलेक्ट्रिक ऊर्जा (Bio-electric Energy) का आदान-प्रदान शुरू हो जाता है। जब हम अपने माता-पिता, गुरुओं और बड़ों के पांव छूकर उनका आशीर्वाद लेते हैं, तो उनके शरीर की सकारात्मक ऊर्जा और बरसों का अनुभव आशीर्वाद के रूप में हमारे भीतर प्रवेश करने लगता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है, बुद्धि का विकास होता है और शरीर में सकारात्मकता का संचार होता है। जब आपके विचार और ऊर्जा सकारात्मक हो जाते हैं, तो आपका भाग्य अपने आप बदलने लगता है।


​हमारे महान ऋषियों ने कितनी सरलता और खूबसूरती से गहरे विज्ञान को हमारी रोजमर्रा की जीवन शैली और संस्कारों का हिस्सा बना दिया था। तो अगली बार जब आप अपने माता-पिता, गुरुजनों या बुजुर्गों के चरण स्पर्श करें, तो केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि इस वैज्ञानिक सच को ध्यान में रखकर पूरी श्रद्धा से झुकें।


​यह इस श्रृंखला का पहला एपिसोड था। बच्चों को जागरूक करने और उनमें अच्छे संस्कार जगाने के लिए हम अगले हर संडे को एक नया और बेहद दिलचस्प एपिसोड लेकर आपके सामने हाजिर होंगे।


​संस्कारों और विज्ञान से जुड़ी ऐसी ही ज्ञानवर्धक खबरें और आगामी एपिसोड देखने के लिए देखते रहें पंजाब दस्तक। हमारे चैनल को लाइक, शेयर, फॉलो और सब्सक्राइब करना न भूलें।

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