वेव एस्टेट में 1 अगस्त से कैम चार्जेस बढ़ाने के फैसले पर भड़का चौतरफा आक्रोश: निवासियों को आपस में लड़ाने और क्लब हाउस-स्विमिंग पूल के मुख्य मुद्दे से भटकाने की बड़ी साजिश का आरोप

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​मोहाली, 19 जुलाई 2026
वेव एस्टेट (Wave Estate, Sector 85) में मूलभूत सुविधाओं की बदहाली और मेंटेनेंस (CAM) शुल्क में लगातार की जा रही मनमाने ढंग की बढ़ोतरी को लेकर यहाँ के निवासियों में भारी आक्रोश भड़क चुका है। मैनेजमेंट द्वारा 1अगस्त 2026 से लागू किए जा रहे नए कैम (CAM) शुल्क को लेकर निवासियों ने सीधे तौर पर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। पंजाब दस्तक की टीम से बात करते हुए यहाँ के जागरूक परिवारों ने प्रबंधन की एक बहुत बड़ी चालबाज़ी और साज़िश का पर्दाफाश किया है।


​वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र राणा की विशेष रिपोर्ट
​पंजाब दस्तक की टीम के माध्यम से वेव एस्टेट के कोठियों और फ्लैट्स के निवासियों ने प्रबंधन से सीधे ये तीखे, धारदार और चुभते सवाल पूछे हैं:
​1. हमें कम्युनिटी सेंटर नहीं, पूरा क्लब हाउस और बड़ा स्विमिंग पूल चाहिए!
सोसायटी के लोगों का सबसे बड़ा और मुख्य आक्रोश इसी बात पर है कि जब उनसे एक आलीशान, भव्य क्लब हाउस और बच्चों के लिए स्विमिंग पूल का वादा किया गया था, तो किस नियम के तहत उन्हें एक छोटा सा कम्युनिटी सेंटर थमाकर चुप कराने की कोशिश की जा रही है? कोठियों और फ्लैट्स के निवासियों ने दो टूक शब्दों में प्रबंधन से कह दिया है कि “हमें कम्युनिटी सेंटर नहीं चाहिए, हमें हमारा पूरा और असली क्लब हाउस चाहिए।”


​हकीकत यह है कि वेव गार्डन में भी जो स्विमिंग पूल बनाया गया है, वह पूरी आबादी के हिसाब से बेहद छोटा है। अब वेव गार्डन-2 (Wave Garden-2) के लिए बड़ी-बड़ी एडवर्टाइजमेंट और ऐड (Ads) देकर लाखों रुपए की मशहूरी (विज्ञापन) की जा रही है और नए खरीदारों को बड़े-बड़े सुनहरे सपने दिखाए जा रहे हैं। निवासियों ने पूछा कि जब नए फेज की मार्केटिंग के लिए लाखों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, तो पुराने निवासियों, कोठियों और जॉय होम्स व कैनवस के परिवारों के हिस्से का क्लब हाउस और स्विमिंग पूल कहाँ गायब हो गया? किसके इशारे पर यह भेदभाव हुआ? वहां जिम के नाम पर मात्र 4-5 मशीनें और थोड़ा सा सामान रखकर जो ड्रामा शुरू किया गया है, क्या उसमें वेव एस्टेट के सैकड़ों बच्चे और पूरा परिवार कभी एडजस्ट कर पाएगा? हमारे बच्चों के लिए वादा किया गया असली स्विमिंग पूल कहाँ है? निवासियों का आरोप है कि कैम चार्जेस में अचानक की गई यह बढ़ोतरी सिर्फ लोगों का ध्यान इस मुख्य मुद्दे से भटकाने की एक सोची-समझी चाल है। कोठियों और फ्लैट्स के लोगों ने साफ कह दिया है कि “1 अगस्त से यह बढ़ोतरी किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने दी जाएगी।”


​2. कौन से नियम-कानून के तहत 5.60 से 8 और फिर 3 महीने में 9 रुपए किए?
निवासियों का सीधा सवाल है कि आखिर किस नियम और किस कानून के तहत पहले मेंटेनेंस चार्जेस को ₹5.60 से बढ़ाकर ₹8 किया गया, और फिर मात्र तीन महीने के भीतर ही इसे दोबारा 1 अगस्त से बढ़ाकर ₹9 प्रति वर्ग गज करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया गया? प्रबंधन को यह साफ समझ लेना चाहिए कि यहाँ रहने वाले परिवारों के पैसे पेड़ों पर या आसमान में नहीं उगते हैं। वेव एस्टेट एक प्रतिष्ठित नाम है, लेकिन इस बड़े नाम की आड़ में कोठियों और फ्लैट्स के लोगों पर जब चाहे सीधा आर्थिक बोझ लादना पूरी तरह नाजायज है। लोगों ने हमेशा आगे बढ़कर खुद अपने मेंटेनेंस चेक और पैसे समय पर जमा करवाए ताकि व्यवस्था बनी रहे, लेकिन प्रबंधन ने उनके इस सहयोग का सिला सिर्फ धोखे और दादागिरी से दिया है।


​3. बाहर चमचमाते गेट का शीशा, अंदर ‘फिश मार्केट’ जैसी लटकी बदरंग तारें
प्रबंधन की कथनी और करनी का अंतर सोसायटी के प्रवेश द्वार पर ही साफ दिख जाता है। निवासियों का कहना है कि गेट नंबर 1 पर तो बड़े-बड़े शीशे लगाकर आगे तक इसे खूब सजाया-संवारा गया है ताकि बाहर से देखने वालों को मूर्ख बनाया जा सके। लेकिन जैसे ही कोई इस गेट से अंदर प्रवेश करता है और आगे मुख्य चौक से शुरुआत होती है, वहाँ से वेव एस्टेट का असली और बदहाल रूप सामने आ जाता है। वादे के मुताबिक यहाँ बिजली की तरह इंटरनेट और नेटवर्किंग की तमाम चीजें पूरी तरह अंडरग्राउंड (जमीन के नीचे) होनी थीं, लेकिन आज हकीकत यह है कि एयरटेल (Airtel) और अन्य तमाम कंपनियों की इंटरनेट की तारें खंभों और पेड़ों पर इस कदर बेतरतीब लटकी हुई हैं कि पूरी सोसायटी की शोभा खराब हो रही है और पॉश इलाका एक ‘फिश मार्केट’ (मछली बाजार) जैसा भद्दा नजर आने लगा है।


​4. स्टाफ की कमी से गेस्ट गेट पर 3 साल से ताला, सुरक्षा पूरी तरह फेल
सोसायटी में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह खोखला बताते हुए लोगों ने सबसे बड़ा खुलासा किया है कि यहाँ रेजिडेंट्स और मेहमानों (गेस्ट) के लिए दो अलग-अलग गेट बनाए गए थे। वादे के मुताबिक गेस्ट गेट से बाहर से आने वालों की एंट्री होनी थी, लेकिन हकीकत यह है कि पिछले तीन सालों से गेस्ट गेट पर ताला लटका हुआ है! प्रबंधन के पास सुरक्षा स्टाफ ही नहीं है कि वे दूसरे गेट को चला सकें। नतीजा यह है कि कोठियों और फ्लैट्स के निवासियों तथा गेस्ट, दोनों को एक ही गेट से आना-जाना पड़ता है। गाड़ियों को चेक करना अच्छी बात है और लोग सुरक्षा जांच के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जांच करने के लिए पूरा स्टाफ ही मौजूद नहीं है। गेट पर मात्र एक कर्मचारी खड़ा कर दिया जाता है, जो सिर्फ register पर एंट्री करने की फॉर्मेलिटी (खानापूर्ति) करता है, जबकि बिना किसी पुख्ता चेकिंग के धड़ाधड़ गाड़ियां अंदर आ रही हैं। इस अव्यवस्था के कारण आए दिन चोरियां हो रही हैं और लोग खुद को पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। क्या हम वेव एस्टेट में वाकई सेफ हैं?


​5. हाईटेक स्कैनिंग का वादा निकला पूरी तरह झूठा
Management ने लोगों से वादा किया था कि गेट पूरी तरह हाईटेक होंगे, जहां गाड़ियों की ऑटोमैटिक स्कैनिंग तकनीक होगी और स्कैन होते ही तुरंत गेट खुल जाएंगे। लेकिन आज तक वह हाईटेक तकनीक ग्राउंड पर नहीं आ पाई। बिना तकनीक और बिना स्टाफ के केवल यहाँ रहने वाले परिवारों को परेशान किया जा रहा है।


​6. स्टाफ में भारी कटौती: न मेंटेनेंस, न अच्छे पार्क और हॉर्टिकल्चर
चार्जेस बढ़ाने में अव्वल रहने वाला मैनेजमेंट ग्राउंड पर स्टाफ कम करता जा रहा है। सुरक्षा स्टाफ के साथ-साथ मेंटेनेंस और हॉर्टिकल्चर (बागवानी) का पूरा स्टाफ भी पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। वादे के मुताबिक अच्छे पार्क और बेहतर रखरखाव तो दूर, पार्कों की हालत बेहद खस्ता है। सिर्फ पार्क नंबर 12 में थोड़ी सी रबड़ की पाइलें लगा देने और चार तालियां बजा देने से पूरे वेव एस्टेट के पार्क ठीक नहीं हो जाते। हालत यह है कि लोगों को अपने घरों का कूड़ा उठवाने के लिए भी बार-बार फोन करके स्टाफ को बुलाना पड़ता है।


​7. बदहाल सड़कें, गहरे खड्डे और आवारा कुत्तों का जानलेवा आतंक
लोगों ने पूछा है कि आखिर किस मुंह से मेंटेनेंस शुल्क बढ़ाया गया है? क्या कोठियों और फ्लैट्स के सामने की टूटी सड़कें, बदहाल रोड्स और गहरे खड्डे ठीक हो गए हैं? क्या सिक्योरिटी के लिए वादे के मुताबिक स्कूटी पेट्रोलिंग दुरुस्त हो गई है? सबसे गंभीर बात, रात के समय बच्चों और बुजुर्गों पर सीधे हमला करने वाले आवारा कुत्तों के आतंक से क्या मुक्ति मिली? जब इन बुनियादी समस्याओं का कोई समाधान नहीं हुआ, तो जनता की जेब पर डाका क्यों डाला जा रहा है?


​सुविधाएं नहीं तो पैसे नहीं, अब आर-पार की लड़ाई: एकता ही एकमात्र रास्ता
वेव एस्टेट के परिवारों ने अब साफ ठान लिया है कि “पहले हमें पूरी सुविधाएं दें, गेस्ट गेट खोलें, इंटरनेट की लटकती तारों को अंडरग्राउंड करें, सुरक्षा दुरुस्त करें, पूरा स्टाफ बहाल करें, पूरा क्लब हाउस और स्विमिंग पूल दें, तब जाकर चार्जेस की बात करें।”
​अब वक्त आ गया है कि कोठियों और फ्लैट्स के सभी निवासी और RWA अपने आपसी मतभेद भुलाकर एक झंडे के नीचे आएं, सघन बैठकें करें और एकजुट होकर इस तानाशाही के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें। आवारा कुत्तों के आतंक और बुनियादी हकों के खिलाफ सभी परिवारों को मिलकर ‘एकता की मशाल’ जलानी होगी और एकजुट होकर इस अपील का साथ देना होगा।

‘पंजाब दस्तक’ की टीम इस तानाशाही और झूठे वादों के खिलाफ लोगों के हक में पूरी मुस्तैदी से खड़ी है और इन सवालों का लिखित व स्पष्ट जवाब मिलने तक यह मुहिम और खबरों का सिलसिला थामने वाली नहीं

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