विशेष रिपोर्ट: राजेंद्र नेगी, किन्नौर
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में हक-हकूक और ‘नौतोड़ अधिकार’ को लेकर सुलग रही चिंगारी अब पूर्ण आंदोलन का रूप ले चुकी है। जनजातीय जिला किन्नौर और लाहौल-स्पीति की वादियों से उठी यह आवाज अब सत्ता के गलियारों तक पहुंचने वाली है। कांग्रेस ने जनजातीय अधिकारों की बहाली के लिए ‘नौतोड़ अधिकार यात्रा’ का आगाज कर दिया है। साफ चेतावनी दी गई है कि यदि हक नहीं मिला, तो यह संघर्ष जल्द ही प्रदेश की राजधानी शिमला की सड़कों पर नजर आएगा।
जनजातीय लोगों के सब्र का बांध टूटा: जगत सिंह नेगी
राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अपने अधिकारों के इंतजार में जनजातीय जनता के सब्र का पैमाना छलक चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रथम चरण के तहत किन्नौर और लाहौल-स्पीति में आंदोलन का शंखनाद किया गया है। आने वाले दिनों में प्रदेश के तमाम जनजातीय इलाकों को इस आंदोलन की परिधि में शामिल कर संघर्ष को और अधिक धार दी जाएगी।
मंत्री जगत सिंह नेगी ने कड़ा रुख अपनाते हुए खुलासा किया कि नौतोड़ अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रस्ताव बीते तीन वर्षों से राजभवन (राज्यपाल कार्यालय) में लंबित पड़ा है। लंबे समय से स्वीकृति न मिलने के चलते जनजातीय बाशिंदों में रोष बढ़ता जा रहा है।
स्पीति में विधायक अनुराधा राणा ने संभाली कमान
घाटी में इस जन-आंदोलन को संगठित रूप देते हुए लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा के नेतृत्व में जोरदार अभियान शुरू किया गया है। स्थानीय जनता अपने पारंपरिक और वैधानिक अधिकारों को लेकर सड़कों पर उतर आई है।
क्या है नौतोड़ अधिकार?
नौतोड़ नियमों के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों के गरीब, निर्धन और पात्र परिवारों को आजीविका व गुजर-बसर के लिए सरकारी भूमि आवंटित करने का प्रावधान रहा है। लंबे अर्से से इस व्यवस्था के ठप रहने से स्थानीय आबादी भूमिहीनता और भविष्य के संकट से जूझ रही है। अब जनजातीय समाज आर-पार की लड़ाई के मूड में है।
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