शिमला/सोलन/ऊना/कांगड़ा/हमीरपुर, 29 मार्च 2026
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू जहाँ एक ओर ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के संकल्प के साथ प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत करने और किसानों को सशक्त बनाने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिला स्तर पर प्रशासनिक ढिलाई उनकी इस मेहनत को प्रभावित कर रही है। ‘पंजाब दस्तक’ की राज्य-स्तरीय पड़ताल में यह कड़वा सच सामने आया है कि प्रदेश की प्रमुख मंडियों में बिचौलियों का बोलबाला है, जिसके कारण न तो किसान को पसीने की पूरी कीमत मिल रही है और न ही आम जनता को वाजिब दाम पर सब्जियां मिल रही हैं।
आज के प्रमाणित थोक भाव बनाम बाजार के दाम (तथ्यों पर आधारित):
टमाटर (प्रीमियम): मंडी थोक ₹22-25/kg — बाजार में ₹50-60/kg (सीधा ₹35 का डाका)
मटर (लोकल): मंडी थोक ₹26-30/kg — बाजार में ₹65-75/kg (दोगुने से ज्यादा दाम)
केला (G-9/अन्य): मंडी थोक ₹28-32 (गुच्छा) — बाजार में ₹70-80 (दर्जन)
अंगूर (हरा/काला): मंडी थोक ₹115-130/kg — बाजार में ₹180-220/kg (भारी मुनाफाखोरी)
आलू/प्याज: मंडी थोक ₹14-18/kg — बाजार में ₹30-35/kg (आम जनता पर बोझ)
फूलगोभी: मंडी थोक ₹15-18/kg — बाजार में ₹40-45/kg (किसान को क्या मिला?)
मनगढ़ंत बहाने और जिला प्रशासन की चुप्पी
शिमला की ढली मंडी हो, सोलन, ऊना या कांगड़ा की मंडियां—हर जगह किसान बेहाल है। दुकानदार अक्सर युद्ध, पेट्रोल के खर्चों और “दुकान के भारी किराए” का बहाना बनाकर महंगाई का बोझ जनता पर डाल रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि मंडी और रिटेल की कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर है। सवाल यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के इंस्पेक्टरों ने बाजारों का औचक निरीक्षण करना बंद कर दिया है? मुख्यमंत्री जी की जनहितैषी छवि को इन अधिकारियों की लापरवाही से गहरा धक्का लग रहा है।
हिमाचल की जनता की जोरदार मांग
प्रदेश की जनता अब इस खुली लूट को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है और जिला प्रशासनों से निम्नलिखित कदम उठाने की जोरदार मांग कर रही है:
फील्ड टीमें सक्रिय हों: सभी जिलों के जिला प्रशासन अपनी फील्ड टीमें तुरंत भेजें और बाजारों का औचक निरीक्षण करें।
रेट लिस्ट की अनिवार्यता: यह सुनिश्चित किया जाए कि हर दुकान के बाहर आधिकारिक रेट लिस्ट लगी हो ताकि जनता को लूटा न जा सके।
सख्त कार्रवाई: जो दुकानदार निर्धारित मार्जिन से अधिक वसूल रहे हैं, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाए और उनके लाइसेंस रद्द किए जाएं।
निष्कर्ष:
विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री जी प्रदेश के महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्त हैं, ऐसे में जिलाधीशों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। हिमाचल की जनता चाहती है कि मुख्यमंत्री सुक्खू जी की मंशा के अनुरूप प्रशासन सक्रिय हो और बिचौलियों की इस मनमानी को तुरंत बंद किया जाए।
राज्य ब्यूरो रिपोर्ट: पंजाब दस्तक (हिमाचल प्रदेश)
