शिमला: सुरेंद्र राणा;पंचायती राज संस्थानों और नगर निकायों के चुनावों में चिट्टे से संबंधित नए कानून को लागू करने में बेशक अभी राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार हो, लेकिन सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के कारण चुनाव लडऩे पर प्रतिबंध लग जाएगा। प्रदेश के उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए हालिया फैसलों के बाद यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जिस किसी व्यक्ति ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया है, वह चुनाव लडऩे के लिए अयोग्य माना जाएगा। यदि किसी व्यक्ति ने सरकारी जमीन पर कब्जे को वैध (रेगुलराइजेशन) कराने के लिए आवेदन भी किया है, तो उसे अतिक्रमणकारी माना जाएगा। ऐसे व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। हिमाचल हाई कोर्ट ने राम लाल बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार और गुरदेव बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार जैसे मामलों में स्पष्ट किया है कि चुनाव लडऩे की अयोग्यता के लिए केवल अतिक्रमण किया होना ही काफी है।
कोर्ट ने आदेश दिया कि हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 122(1)(सी) और नगरपालिका अधिनियम की धारा 16(1)(सी) के तहत यह जरूरी नहीं है कि व्यक्ति को आधिकारिक तौर पर अतिक्रमणकारी घोषित किया गया हो। यदि उसने कब्जा किया है, तो भी वह चुनाव से बाहर है। दिसंबर, 2025 के आदेश के अनुसार शिमला के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी ने सभी एसडीएम और खंड विकास अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे आगामी चुनावों के दौरान रिटर्निंग अधिकारियों को इन नियमों की जानकारी दें, ताकि नामांकन के समय ही ऐसे उम्मीदवारों की छंटनी की जा सके।
