हिमाचल की आर्थिकी की ‘ऊँची उड़ान’: मुख्यमंत्री ने पेश किया 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण; 8.3% की विकास दर का अनुमान

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पंजाब दस्तक
​हिमाचल की आर्थिकी की ‘ऊँची उड़ान’: मुख्यमंत्री ने पेश किया 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण; 8.3% की विकास दर का अनुमान
​ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा
​शिमला | हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने आज विधानसभा के पटल पर वित्तीय वर्ष 2025-26 का ‘आर्थिक सर्वेक्षण’ प्रस्तुत किया। अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा तैयार यह महत्वपूर्ण दस्तावेज़ प्रदेश की आर्थिक स्थिति का वास्तविक, साक्ष्य-आधारित और मूल्यवान विश्लेषण प्रस्तुत करता है। सर्वेक्षण के आंकड़े तस्दीक करते हैं कि राज्य की अर्थव्यवस्था ने कठिन भौगोलिक चुनौतियों और वैश्विक मंदी के दौर के बावजूद विकास की एक नई और तेज रफ्तार पकड़ी है।
​GSDP में ऐतिहासिक उछाल और विकास दर
​आर्थिक सर्वेक्षण के अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) ₹1,56,881 करोड़ अनुमानित है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) में यह ₹1,50,656 करोड़ दर्ज किया गया था।
​विकास दर में रिकॉर्ड वृद्धि: वर्ष 2024-25 के प्रथम संशोधित अनुमानों में दर्ज 6.4% की तुलना में, वर्ष 2025-26 के लिए 8.3% की प्रभावशाली वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया है। यह उछाल राज्य सरकार की सुदृढ़ आर्थिक नीतियों और बेहतर वित्तीय प्रबंधन का परिणाम माना जा रहा है।
​क्षेत्रवार प्रदर्शन: प्राथमिक और सेवा क्षेत्र की मजबूती
​राज्य की अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख स्तंभों—प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक—में इस वर्ष सकारात्मक बदलाव और उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है:
​प्राथमिक क्षेत्र (कृषि एवं बागवानी): हिमाचल की आर्थिकी की रीढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र के सकल मूल्यवर्धन (GSVA) में स्थिर मूल्यों पर 8.4% की दर से वृद्धि होने की प्रबल संभावना है।
​सेवा क्षेत्र (Service Sector): पर्यटन, बैंकिंग और अन्य सेवा क्षेत्रों में अग्रिम अनुमानों के अनुसार 7.5% की वृद्धि दर दर्ज होने की आशा है।
​निरंतर आर्थिक प्रगति: प्राथमिक क्षेत्र का योगदान निरंतर बढ़ रहा है। वर्तमान मूल्यों पर सकल राज्य मूल्यवर्धन पिछले वित्त वर्ष के ₹22,000 करोड़ के अनुमानों से बढ़कर वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमानों में ₹32,415 करोड़ तक पहुँच गया है।
​भविष्य का रोडमैप और प्रति व्यक्ति आय
​सर्वेक्षण में प्रति व्यक्ति आय (PCI) और क्षेत्रवार योगदान के पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने सदन को जानकारी दी कि यह सर्वेक्षण केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह भविष्य की जन-कल्याणकारी योजनाओं, बजट आवंटन और राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए एक निर्णायक आधार सिद्ध होगा। अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा तैयार यह रिपोर्ट दर्शाती है कि हिमाचल अब आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।
​मुख्य आकर्षण:
​विकास दर: 6.4% से बढ़कर 8.3% तक पहुँची।
​कुल GSDP: ₹1,56,881 करोड़ का ऐतिहासिक लक्ष्य।
​कृषि क्षेत्र का योगदान: ₹32,415 करोड़ के पार।

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