शिमला, सुरेंद्र राणा: शिमला शहर में चल रहे स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच सफाई कर्मचारियों की हड़ताल की चेतावनी ने नगर निगम प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कर्मचारियों ने लंबित मांगों और वेतन बढ़ोतरी को लेकर कल से अनिश्चित्कालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था और स्वच्छता रैंकिंग पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सफाई कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से वेतन बढ़ोतरी और समान कानून लागू करने की मांग उठा रहे हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। सफाई कर्मियों ने आरोप लगाया कि हाल ही में सात साल बाद हुई एजीएम में लिए गए फैसले उनके हितों के खिलाफ रहे, जिसके विरोध में यूनियन ने हड़ताल का नोटिस जारी किया है। सेहब सोसाइटी कर्मचारी यूनियन के उपाध्यक्ष अमित भाटिया ने कहा कि कर्मचारियों को मिलने वाली हर साल की 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि इस बार रोक दी गई है। उनकी मांग है कि मई महीने की सैलरी के साथ यह इन्क्रीमेंट बहाल किया जाए। इसके अलावा सभी कर्मचारियों के लिए समान कानून लागू करने की भी मांग की जा रही है। प्रशासन द्वारा ESMA लगाने और कार्रवाई की चेतावनी पर कहा कि कर्मचारी पिछले 18 वर्षों से शिमला को स्वच्छ रखने में योगदान दे रहे हैं, लेकिन अब उन्हें डराया और दबाया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो कर्मचारी भूख हड़ताल तक का रास्ता अपना सकते हैं और आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं नगर निगम शिमला के आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने हड़ताल के फैसले पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान हड़ताल पर जाना उचित नहीं है और इससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो प्रशासन ESMA के तहत कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेशों के तहत शहर की सफाई व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में स्वच्छता व्यवस्था बाधित नहीं होने दी जाएगी।
