हमीरपुर, सुरेन्द्र राणा: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला के नरेश कुमार को केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) में उप महानिरीक्षक (DIG) के पद पर पदोन्नत किया गया है। 1 मई 1972 को हमीरपुर जिला के तरकवाडी गांव में जन्मे नरेश कुमार के पिता किशन सिंह (सेवानिवृत्त डीएसपी) और माता प्रकाशो देवी हैं। बचपन से ही उनमें अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और वर्दीधारी सेवा के प्रति विशेष आकर्षण रहा। प्रारंभिक शिक्षा शिमला तथा बाद में अपने गांव के आसपास के विद्यालयों—कंजियान, डेरा पारोल और भोरंज—से पूर्ण करने के पश्चात उन्होंने वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी से स्नातक तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। वर्दी के प्रति जुनून और देशसेवा की भावना से प्रेरित होकर उन्होंने वर्ष 1996 में सीआरपीएफ जॉइन किया। माउंट आबू में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ आउटडोर प्रशिक्षु घोषित किया गया।करीब तीन दशकों की सेवायात्रा में उन्होंने देश के लगभग सभी संघर्षग्रस्त क्षेत्रों—जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, असम, त्रिपुरा और उत्तर कश्मीर—में अत्यंत चुनौतीपूर्ण दायित्व निभाए। उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में सफल अभियानों का नेतृत्व किया, कोबरा (CoBRA) जैसी विशिष्ट इकाई का कमान संभाला और उच्च जोखिम वाले अभियान व वीवीआईपी सुरक्षा के लिए पांच वर्ष तक राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) में सेवाएं दीं। प्रशिक्षण क्षेत्र में भी उन्होंने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया और कोयंबटूर स्थित सीआरपीएफ प्रशिक्षण महाविद्यालय में उप प्राचार्य के रूप में भावी अधिकारियों को मार्गदर्शन दिया।
व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के लिए उन्होंने रॉक क्लाइम्बिंग, एंटी टेररिस्ट एंड वीआईपी सिक्योरिटी कमांडो कोर्स, वेपन एंड टैक्टिक्स, जीपीएस, इंटेलिजेंस ओरिएंटेशन, जूनियर, मिडिल और सीनियर कमांड कोर्स, स्टाफ ऑफिसर्स कोर्स, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एवं मानवीय कानून, कंप्यूटर एवं साइबर अपराध कोर्स, तथा पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के उन्नत कार्यक्रम जैसे अनेक प्रतिष्ठित कोर्स पूरे किए। उनके उत्कृष्ट नेतृत्व और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें पुलिस पदक फॉर मेरिटोरियस सर्विस, अति उत्कृष्ट सेवा पदक, उत्कृष्ट सेवा पदक, अंतरिक सुरक्षा पदक, एसपीजी मेडल, डीजी डिस्क एवं प्रशंसा प्रमाण पत्र (सीआरपीएफ व एनएसजी) तथा पुलिस स्पेशल ड्यूटी मेडल जैसे अनेक अलंकरणों से सम्मानित किया गया।ड्यूटी की कठोरताओं के बीच भी उन्होंने पारिवारिक जीवन का संतुलन बनाए रखा। उनकी पत्नी अंजलि हैं, पुत्री पर्निका टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई में स्नातकोत्तर कर रही हैं और पुत्र सार्थक संयुक्त राज्य अमेरिका में अध्ययनरत हैं। उनकी यह पदोन्नति केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सीआरपीएफ की गौरवशाली परंपरा, समर्पण, साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक है।
