हिमाचल प्रदेश के पेंशनर्स फिर से संघर्ष की राह पर, 17 अक्तूबर को हर जिला मुख्यालय में करेंगे रैलियां

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शिमला, सुरेन्द्र राणा; हिमाचल प्रदेश के पेंशनर्स अब एक बार फिर सरकार के खिलाफ संघर्ष की राह पर उतरने जा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के चेयरमैन सुरेश ठाकुर (जिला कांगड़ा), महासचिव इन्द्र पाल शर्मा (जिला सोलन) और अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा (जिला शिमला) ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार पेंशनरों की मांगों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रही है और उनका रवैया लगातार नकारात्मक और टालमटोल भरा रहा है।

नेताओं ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि बुजुर्ग पेंशनरों को उम्र के इस पड़ाव में भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लाखों रुपये की बकाया राशि सरकार पिछले आठ वर्षों से रोककर बैठी है और हर बार वित्तीय संकट का बहाना बनाकर पेंशनरों को धोखा दिया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर सरकार अपने खर्चों में कटौती न करके नए-नए चेयरमैन और सलाहकार नियुक्त कर रही है तथा माननीयों की पेंशन व भत्तों में लगातार वृद्धि की जा रही है।

पेंशनर्स नेताओं ने कहा कि उन्हें ग्रेच्युटी, कम्युटेशन, लीव इनकैशमेंट, वेतन आयोग की लंबित किश्तें, मंहगाई भत्ते की बकाया राशि और चिकित्सा भत्ते का लाभ अभी तक नहीं मिला है। हिमाचल पथ परिवहन निगम और विद्युत बोर्ड सहित विभिन्न बोर्डों-निगमों के पेंशनरों को भी उनकी बकाया राशि नहीं दी गई है। पुलिस पेंशनरों को सेना की तर्ज पर चिकित्सा सुविधा और उनके बच्चों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग भी लटकी हुई है।

समिति ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते इन मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आगामी 17 अक्तूबर 2025 को प्रदेश के हर जिला मुख्यालय में विशाल रैलियां और धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद आंदोलन का दूसरा चरण दीपावली के बाद 26 अक्तूबर से लगातार शुरू किया जाएगा।

इस आंदोलन को हिमाचल प्रदेश के विभिन्न संगठनों, संघों और महासंघों ने पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है। संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से अपील की है कि राज्य के लाखों पेंशनरों की जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर उन्हें उनका अधिकार दिया जाए, अन्यथा पेंशनर्स अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।

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