शिमला, सुरेंद्र राणा: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद भाजपा और कांग्रेस में आरोप प्रत्यारोप की सियासत शुरू हो गई है। हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी शत प्रतिशत महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन बीजेपी सरकार महिलाओं के नाम पर डीलिमिटेशन का खेल, खेल रही थी। विपक्ष ने एकजुट होकर इस बिल को रोक दिया।
हिमाचल के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि कांग्रेस और सभी विपक्षी दल लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के पूर्ण रूप से पक्षधर है। विक्रमादित्य सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तीन बिल एक साथ लाई थी। एक राज्यों का डीलिमिटेशन, दूसरा केंद्र शासित प्रदेशों का डीलिमिटेशन और तीसरा महिला आरक्षण बिल। महिला सशक्तिकरण की आड़ में देश की डेमोग्राफी बदलने की कोशिश की जा रही थी। 1971 की जनगणना को आधार बनाकर उत्तर भारत की सीटें दक्षिण भारत से तीन गुना बढ़ जातीं, जिससे उन राज्यों को नुकसान होता जिन्होंने फैमिली प्लानिंग और शिक्षा पर काम किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने मांग की थी कि 2023 में लाए गए महिला आरक्षण बिल को 545 सीटों के आधार पर ही 33 फीसदी आरक्षण के साथ पास किया जाए तो सभी दल सर्वसम्मति से समर्थन करेंगे। लेकिन सरकार की मंशा राजनीतिक हित साधने की थी, इसलिए यूनाइटेडअपोजिशन ने इसे रोक दिया। विक्रमादित्य ने कहा कि महिला आरक्षण की नींव कांग्रेस ने रखी थी। कराची अधिवेशन में मोतीलाल नेहरू के समय 33 फीसदी आरक्षण का प्रस्ताव पारित हुआ था। वहीं विक्रमादित्य सिंह ने कंगना रनौत के उस बयान पर निशाना साधा जिसमें उन्होंने कहा कि हिमाचल में एक विधायक है। उन्होंने कहा। कि ऐसे लोग महिला हितैषी होने की बात करे तो इससे हास्यास्पद नहीं हो सकता। जिन्हें मालूम नहीं है कि यहां तीन महिला विधायक है। कहा कि राजीव गांधी ने पंचायती राज में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण लेकर आए। उन्होंने कहा कि वेस्ट बंगाल, असम, केरल में चुनाव के चलते ध्रुवीकरण के लिए स्पेशल सेशन में यह बिल लाया गया, जबकि सरकार को पता था कि दो तिहाई बहुमत नहीं है। प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने भी सदन में यह मुद्दा उठाया। कांग्रेस महिला सशक्तिकरण के साथ खड़ी है, लेकिन महिलाओं के नाम पर छिपकर डेमोग्राफी बदलने का खेल नहीं चलने देगी।
