सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ
शिमला। सुजानपुर नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव विवाद में आज माननीय न्यायालय ने ऐसा कानूनी हंटर चलाया है जिससे सत्ता की हनक और प्रशासनिक मनमानी पूरी तरह से पस्त हो गई है। अदालत ने आनन-फानन में चुने गए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के शपथ ग्रहण पर अगले आदेशों तक पूरी तरह से रोक लगा दी है। कोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद सुजानपुर नगर परिषद में फिलहाल यथास्थिति (स्टेटस को) बनी रहेगी। इस फैसले से सत्तापक्ष और प्रशासन की पूरी बिसात धरी की धरी रह गई है। आयोजन स्थल पर कुर्सियां सज चुकी थीं, जश्न की तैयारियां थीं, लेकिन अब आगामी आदेशों तक कोई भी पद और गोपनीयता की शपथ नहीं ले पाएगा।
हाथ में संविधान की किताब, दिल में वोट चोरी की नीयत: राजेंद्र राणा
इस पूरे सियासी ड्रामे और प्रशासनिक घालमेल पर सबसे तीखा हमला बोलते हुए पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कांग्रेस सरकार की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। राजेंद्र राणा ने सीधे तौर पर सत्तापक्ष को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि एक तरफ तो कांग्रेस के नेता देश भर में हाथ में संविधान की किताब लेकर घूमने का पाखंड करते हैं, और दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर सरेआम लोकतंत्र का गला घोटने पर उतारू हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह जनता के पवित्र जनमत पर सीधा डाका और ‘वोट चोरी’ का निकृष्ट उदाहरण है, जिसे सुजानपुर की स्वाभिमानी जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।
प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ सुजानपुर की सड़कों पर फूटा था भाजपा का गुस्सा
इस विवाद की जड़ें दो दिन पहले के उस घटनाक्रम से जुड़ी हैं, जब प्रशासन और सत्तापक्ष ने तमाम लोकतांत्रिक मर्यादाओं और नियमों को ताक पर रखकर जबरन अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष घोषित कर दिए थे। उस समय इस सरकारी तानाशाही के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूरे सुजानपुर में मोर्चा खोल दिया था। भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता ने सड़कों पर उतरकर एक अभूतपूर्व आक्रोश रैली निकाली थी और पूरे शहर में जुलूस निकालकर इस मनमानी को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया था।
तानाशाही पर भारी पड़ी कानून की चौखट, मिला न्याय
सत्ता के बल पर की गई इसी वोट चोरी और प्रशासनिक गुंडागर्दी के खिलाफ तुरंत अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था। आज माननीय न्यायालय ने इस पूरी गैर-कानूनी प्रक्रिया पर ब्रेक लगाकर यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में तानाशाही नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ कानून का राज चलेगा। सुजानपुर के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि न्याय का सम्मान ही लोकतंत्र की असली पहचान है और इस ऐतिहासिक फैसले से जनता का न्यायपालिका पर विश्वास और ज्यादा मजबूत हुआ है। फिलहाल, इस अदालती आदेश के बाद सुजानपुर की राजनीति में एक ऐसा भूचाल आ गया है जिसने सत्ताधारियों की रातों की नींद उड़ा दी है।
