पंजाब दस्तक डेस्क
‘धर्मो रक्षति रक्षितः’
(अर्थात: जो कानून, नीति और न्याय की रक्षा करता है, न्याय भी उसी की ढाल बनता है।)
शिमला (पंजाब दस्तक डेस्क):
खाकी की साख, कानून की मर्यादा और आम जनता के विश्वास को अक्षुण्ण रखने का दायित्व जिन कंधों पर टिका होता है, जब उन्हीं प्रशासनिक गलियारों से वित्तीय अनैतिकता की बू आने लगे, तो सच को सामने लाना बेहद जरूरी हो जाता है। राज्य की सुरक्षा और कानून व्यवस्था का दावा करने वाला हिमाचल प्रदेश पुलिस महकमा इस वक्त एक अभूतपूर्व प्रशासनिक व वित्तीय बवंडर के मुहाने पर खड़ा है।
विश्वस्त सूत्रों से मिली बेहद एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, पुलिस महकमे के भीतर ‘हिमाचल प्रदेश रोड सेफ्टी फंड एंड एक्टिविटीज रूल्स 2022’ को ठेंगा दिखाकर करोड़ों रुपये की बंदरबांट का एक संगीन मामला तेजी से गरमाता जा रहा है।
30 करोड़ का बजट और नियमों की उड़ती धज्जियां
सड़कों को सुरक्षित बनाने और आम जनता का जीवन बचाने के पावन उद्देश्य से राज्य में मंजूर की गई लगभग ₹30 करोड़ की विशाल राशि के आवंटन व उपयोग में जिस तरह की मनमानी बरती गई, उसने पूरी पारदर्शिता की बखिया उधेड़ कर रख दी है।
पंजाब दस्तक की एक्सक्लूसिव पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
गायब मिले मूल रिकॉर्ड: इतने विशाल बजट के बावजूद अत्यंत संवेदनशील व प्राथमिक दस्तावेज—जैसे कि कैश बुक और फंड एलोकेशन रजिस्टर—तक कायदे से मेंटेन नहीं किए गए।
कागज़ों पर मंज़ूरी, ज़मीन पर गोलमाल: प्रशासनिक स्वीकृतियों (Administrative Approvals) और व्यय संस्वीकृतियों (Expenditure Sanctions) की आड़ में मनमाने तरीके से सरकारी खजाना लुटाया गया।
वित्तीय अनुशासन का कत्ल: वर्ष 2022 के नियमावली की मूल भावना से खिलवाड़ कर वित्तीय अनुशासन को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया, ताकि नियमों की आड़ में हुई धांधली पर पर्दा डाला जा सके।
सच बोलना पड़ा भारी: DIG संजीव गांधी ने खोली थीं परतें
सूत्रों के मुताबिक, जब DIG (TTR) संजीव गांधी ने इस पद की जिम्मेदारी संभाली, तो उन्होंने रोड सेफ्टी फंड से हुई तमाम खरीद-फरोख्त और वित्तीय लेन-देन की गहराई से पड़ताल की।
इस जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताओं, गड़बड़ियों और संदिग्ध भुगतानों की विस्तृत रिपोर्टें तैयार कर सीधे राज्य सरकार को प्रेषित की गईं। इन गोपनीय रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से उजागर किया गया कि विभाग के भीतर रोड सेफ्टी फंड के नाम पर नियमों को कुचलकर सरकारी धन का भारी दुरुपयोग हुआ है।
AG ऑडिट की मांग से मचा हड़कंप, ध्यान भटकाने का चला गया दांव!
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया, जब DIG संजीव गांधी ने निष्पक्षता की मिसाल पेश करते हुए इस पूरे ₹30 करोड़ के फंड का अकाउंटेंट जनरल (AG) के जरिए स्वतंत्र व निष्पक्ष ऑडिट करवाने का कड़ा प्रस्ताव रखा।
गुप्त सूत्रों की मानें तो निष्पक्ष AG ऑडिट की बात सुनते ही पुलिस मुख्यालय के शीर्ष गलियारों में हड़कंप मच गया!
इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया गया। इतना ही नहीं, मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने आनन-फानन में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उल्टे उसी सरकारी आवास का समिति के जरिए ऑडिट कराने का ऐलान कर दिया, जिसमें खुद DIG संजीव गांधी निवास कर रहे हैं।
पंजाब दस्तक के तीखे सवाल
खाकी की साख और जनता के भरोसे का सवाल अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर है। कानून के रखवाले यदि खुद नियम-पुस्तिका को दरकिनार कर करोड़ों का हिसाब छिपाने में लग जाएं, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करें?
क्या निष्पक्ष AG ऑडिट होने से किसी बड़े चेहरे का बेनकाब होना तय था, जिसे रोकने के लिए यह पलटाव किया गया?
क्या राज्य सरकार इस पूरे मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच के आदेश देगी, या फिर यह मामला भी प्रशासनिक फाइलों में दबा दिया जाएगा?
पंजाब दस्तक इस पूरे मामले की हर परत पर अपनी पैनी नज़र बनाए हुए है। सच उजागर होता रहेगा!
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