बठिंडा में सरपंचों के लिए ₹10,000 मासिक मानदेय की घोषणा करते मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान।

पंजाब में सरपंचों को मिलेगा ₹10,000 मासिक मानदेय, बठिंडा में सीएम मान का बड़ा ऐलान

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​बठिंडा, सुरेंद्र राणा (पंजाब दस्तक)
​बठिंडा:

पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने राज्य की पंचायती राज व्यवस्था और ग्रामीण विकास को नई गति देने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। बठिंडा में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य के सरपंचों के लिए एक बड़ा ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पंजाब में सरपंचों का मासिक मानदेय बढ़ाकर अब सीधे 10,000 रुपये प्रति महीना कर दिया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार का यह नया और बढ़ा हुआ मानदेय 15 अगस्त 2025 से ही प्रभावी रूप से देय होगा, जिसके तहत सरपंचों को पिछले महीनों का पूरा बकाया (एरियर) भी जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा बठिंडा की धरती से किए गए इस फैसले से जहां सरपंचों को बड़ी वित्तीय मजबूती मिलेगी, वहीं गांवों के विकास कार्यों और पंचायतों को भी एक नया बल मिलेगा।


​पंजाब में सरपंचों के मानदेय के इतिहास पर नजर डालें तो इसमें समय-समय पर बदलाव देखने को मिले हैं। शुरुआती दौर में पंजाब में सरपंचों को महज 1200 रुपये मासिक मानदेय मिलता था, जिसे बाद में बढ़ाकर 4800 रुपये किया गया था। अब मान सरकार द्वारा इसे सीधे 10,000 रुपये करने और इसे 15 अगस्त 2025 से लागू मानकर पिछला बकाया देने के फैसले को ग्रामीण राजनीति और पंचायती सशक्तिकरण के लिहाज से एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।


​मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि पंचायतें लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद हैं और सरपंच इस व्यवस्था की वह पहली ईंट हैं जो दिन-रात ग्रामीण सुधारों के लिए जमीनी स्तर पर काम करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरपंचों को समाज में पूरा मान-सम्मान और गरिमा मिलनी चाहिए, ताकि वे बिना किसी आर्थिक या मानसिक दबाव के गांवों की तरक्की के लिए काम कर सकें। इस निर्णय के बाद अब सरपंच अधिक प्रतिबद्धता के साथ अपने क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को सुधारने में ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।


​शासन में पारदर्शिता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने सभी सरपंचों से अपील की कि वे सरकारी अनुदान और टैक्सपेयर्स के पैसे का इस्तेमाल पूरी ईमानदारी के साथ केवल विकास कार्यों में करें। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि राज्य सरकार गांवों के विकास के लिए फंड की कोई कमी नहीं होने देगी, लेकिन हर एक पैसे का हिसाब पारदर्शी होना चाहिए। इस बड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को सशक्त करना और सरपंचों को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि पंजाब के गांवों को आधुनिक और आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जा सके।

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