पंजाब दस्तक
वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र राणा की शिमला से विशेष ग्राउंड रिपोर्ट:
क्या पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशें हिमाचल के कर्मचारियों के लिए नई मुसीबत बनने वाली हैं?
विभिन्न कर्मचारी और पेंशनर संगठनों का साफ कहना है कि यदि बिना जमीनी हकीकत और बिना व्यापक समीक्षा के इन सिफारिशों को सीधे थोप दिया गया, तो कई श्रेणियों के कर्मचारियों पर इसका बेहद विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इस फैसले से कर्मचारियों के अलग-अलग वर्गों में भारी असमानता पैदा होने का डर सता रहा है।
₹5,500 करोड़ का अतिरिक्त बोझ और सरकार की वित्तीय सेहत
रिपोर्टों के अनुसार, यदि पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू किया जाता है, तो हिमाचल सरकार पर लगभग ₹5,500 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है। प्रदेश सरकार पहले से ही भारी आर्थिक तंगहाली और कर्ज के दबाव का सामना कर रही है। ऐसे में कर्मचारियों से जुड़े इस संवेदनशील मसले पर चर्चाएं और कयासबाजी का बाजार गर्म हो चुका है।
2016 से नया स्केल तो मिला, पर 10 साल से एरियर और पेंशन लाभ लापता!
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा और कड़वा सच यह है कि साल 2016 में नया वेतनमान (Scale) तो घोषित कर दिया गया था, लेकिन आज करीब 10 साल बीत जाने के बाद भी कर्मचारियों को उनका वाजिब एरियर (बकाया राशि) नहीं मिल पाया है।
यही नहीं, महंगाई भत्ता (DA) और उसके बकाए को लेकर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। सबसे बदतर हालात उन बुजुर्ग कर्मचारियों के हैं जो इस आस में रिटायर हो गए कि उन्हें बुढ़ापे का सहारा मिलेगा, लेकिन सालों बाद भी उनके पेंशन ड्यूज (पेंशन के बकाए) का भुगतान नहीं किया गया है। कर्मचारियों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि जब पिछले 10 सालों का पुराना एरियर और पेंशन का हक ही नहीं मिला, तो नई सिफारिशों के नाम पर उन्हें असल में क्या हासिल होगा?
कर्मचारियों की मुख्य चिंताएं:
फिटमेंट फैक्टर पर उलझा पेंच: कर्मचारी वर्ग असमंजस में है कि नया फिटमेंट फैक्टर उनके मूल वेतन को बढ़ाएगा या इसमें नई विसंगतियां पैदा करेगा।
वेतन विसंगतियों (Pay Anomalies) की मार: आशंका है कि नए वेतन निर्धारण से अलग-अलग कैडर के बीच सैलरी का फासला और बढ़ जाएगा, जिससे विवाद सुलझने के बजाय और उलझ जाएगा।
रिटायरमेंट लाभों पर सन्नाटा: जो कर्मचारी रिटायर होने वाले हैं या हो चुके हैं, वे ग्रैच्युटी, लीव एनकैशमेंट और पेंशन एरियर के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
किन वर्गों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी संगठनों के अनुसार, इस पूरे बदलाव की सबसे ज्यादा मार और चर्चा इन प्रमुख वर्गों में है:
सचिवालय (Secretariat) एवं क्लेरिकल कैडर
शिक्षक और शिक्षा विभाग का वर्ग
तकनीकी कर्मचारी (Technical Staff)
पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल
फील्ड स्टाफ और ऑडिट क्षेत्र के कर्मचारी
कर्मचारियों का स्पष्ट मानना है कि यदि वेतन निर्धारण की प्रक्रिया में संतुलन और संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई, तो नई विसंगतियां खड़ी हो जाएंगी, जिसका सीधा असर लाखों परिवारों की आर्थिक रीढ़ पर पड़ेगा।
कर्मचारी संगठनों की दोटूक मांग: व्यापक परामर्श के बिना कुछ भी मंजूर नहीं
विभिन्न कर्मचारी महासंघों और संगठनों ने साफ कर दिया है कि सरकार को किसी भी बड़े फैसले पर मुहर लगाने से पहले व्यापक परामर्श, प्रभाव मूल्यांकन और सभी वर्गों की राय लेनी ही होगी। ‘कुछ को फायदा और कुछ को नुकसान’ वाली नीति अब प्रदेश में नहीं चलेगी। सरकार को एक ऐसी संतुलित और पारदर्शी नीति बनानी चाहिए जिससे कार्यरत कर्मचारियों के साथ-साथ जीवनभर सेवा करने वाले पेंशनरों के हित भी पूरी तरह सुरक्षित रहें।
मुख्य बातें (Key Highlights):
पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर हिमाचल के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों में भारी रोष।
नया वेतनमान देने के 10 साल बाद भी एरियर, डीए और पेंशन के बकाए का भुगतान न होना सबसे बड़ा मुद्दा।
सरकार पर ₹5,500 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ, जिससे फैसले लेने में हो रही देरी।
सचिवालय, क्लर्क, शिक्षक, पुलिस और तकनीकी कर्मचारियों में वेतन विसंगतियों को लेकर बढ़ी चिंता।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार को दी चेतावनी, बिना व्यापक चर्चा के कोई भी फैसला थोपना मंजूर नहीं।
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