पंजाब दस्तक
(पंजाब, हरियाणा और हिमाचल की आवाज़)
विशेष रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ
स्थान: चंडीगढ़
15 दिनों में DA जारी करने और 31 अगस्त तक रिपोर्ट देने का हुक्म
पंजाब के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के हक में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पंजाब सरकार की एलपीए (LPA) को पूरी तरह खारिज (डिसमिस) कर दिया है। अदालत ने सरकार के तमाम तर्कों को दरकिनार करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि पंजाब के कर्मचारियों को भी आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) और न्यायिक अधिकारियों की तर्ज पर केंद्रीय पैटर्न पर बराबर महंगाई भत्ता (DA) दिया जाए।
अदालत ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि अगले 15 दिनों के भीतर रुका हुआ DA जारी किया जाए। इसके साथ ही पंजाब के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को सख्त हिदायत दी गई है कि 31 अगस्त तक इस फैसले पर हर हाल में अमल सुनिश्चित किया जाए और इस संबंध में हाईकोर्ट को सूचित किया जाए।
सरकार की सब-कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट और तर्क खारिज
गौरतलब है कि 8 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 94 पन्नों के अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट कहा था कि “महंगाई भत्ता कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है, यह कोई दान नहीं है।” इस फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार ने वरिष्ठ वकीलों को खड़ा करके एलपीए दाखिल की थी।
सरकार ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की अगुवाई वाली कैबिनेट सब-कमेटी (जिसमें मंत्री अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर शामिल थीं) की अंतरिम रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत में तर्क दिया था कि:
पंजाब के कर्मचारी पड़ोसी राज्यों और केंद्र से पहले ही अधिक वेतनमान ले रहे हैं।
भले ही केंद्र में 60% DA मिल रहा हो और पंजाब में 42%, फिर भी कुल वेतनमान ज्यादा हैं।
केंद्र द्वारा साल में दो बार (जनवरी और जुलाई) दिए जाने वाले DA को उसी समय देने के लिए पंजाब सरकार बाध्य नहीं है, यह सरकार के वित्तीय स्रोतों पर निर्भर करता है।
17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती कर्मचारियों के लिए DA पर विचार किया जा सकता है।
कर्मचारियों के वकीलों ने पेश किया पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का आदेश
कर्मचारियों और पेंशनरों के वकीलों ने सरकार के तर्कों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने अदालत के सामने पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का वह ऐतिहासिक पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें निर्देश दिया गया था कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर आईएएस अफसर तक, सभी को एक ही समय और एक ही दर से DA की किस्तें दी जाएं। वकीलों ने सवाल उठाया कि जब आईएएस, आईपीएस और ज्यूडिशियल अफसरों को समय पर DA मिल रहा है, तो बाकी कर्मचारियों से भेदभाव क्यों? अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए कर्मचारियों की जीत पर मुहर लगा दी।
हिमाचल के पेंशनरों और कर्मचारियों में भारी रोष: 8 तारीख को नूरपुर में संयुक्त संघर्ष समिति की महाबैठक
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले की गूंज अब पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में भी तेजी से सुनाई देने लगी है। हिमाचल में वर्ष 2016 से 2022 के बीच का एरियर और डीए (DA) न मिलने के कारण कर्मचारियों और पेंशनरों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। बकाया न मिलने के कारण कई पेंशनर तो इस दुनिया को छोड़कर भी जा चुके हैं, जिससे वर्ग में बेहद गुस्सा है।
पंजाब सरकार को लगे इस कानूनी झटके के बाद हिमाचल के कर्मचारियों और पेंशनरों की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं। पंजाब दस्तक से विशेष बातचीत करते हुए पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के जनरल सेक्रेटरी भूपराम जी और प्रेस सेक्रेटरी नेगी जी ने हाईकोर्ट के इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है।
भूपराम जी ने बताया कि:
”हिमाचल सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों से 31 अगस्त तक का जो वादा किया था, उसे पूरा नहीं किया गया है। इसलिए अब आर-पार की लड़ाई का समय आ गया है।”
इसी संदर्भ में 8 तारीख को नूरपुर में संयुक्त संघर्ष समिति की एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है।
अध्यक्षता: इस महाबैठक की अध्यक्षता संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर जी करेंगे।
संगठनों का जमावड़ा: इस बैठक में 18 से अधिक विभिन्न कर्मचारी व पेंशनर संगठन एक मंच पर एकत्र होंगे।
मुख्य एजेंडा: बैठक में पंजाब हाईकोर्ट के इस फैसले को आधार बनाते हुए आगामी उग्र आंदोलन और रणनीति का खाका तैयार किया जाएगा।
महामंत्री भूपराम जी ने राज्य के हर ब्लॉक और जिले का तूफानी दौरा करके पेंशनरों को एकजुट किया है। हिमाचल के पेंशनरों और कर्मचारियों का स्पष्ट मानना है कि पंजाब हाईकोर्ट का यह फैसला उनके हक की लड़ाई के लिए एक मजबूत कानूनी ढाल बनेगा।
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