रिपोर्ट: वरिष्ठ पत्रकार काजल
पंजाब दस्तक: दुनिया भर के कैलेंडर में साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन भारत की दिग्गज टेलीकॉम कंपनियों के हिसाब में साल 13 महीनों का बना दिया गया है! आज के दौर में इंटरनेट और मोबाइल हर आम नागरिक की बुनियादी जरूरत बन चुके हैं, लेकिन इसी मजबूरी का फायदा उठाकर रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी कंपनियां जनता की जेब पर सरेआम डाका डाल रही हैं।
28 दिनों का खेल: कंपनियों का महा-मुनाफा
कंपनियां 30 दिन की जगह 28 दिनों की वैलिडिटी वाले प्लान क्यों देती हैं? इसका गणित सीधा और चौंकाने वाला है। यदि आप हर बार 28 दिन का रिचार्ज कराते हैं, तो साल के 365 दिन पूरे करने के लिए आपको 12 नहीं, बल्कि पूरे 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है। इस एक अतिरिक्त महीने के ‘अदृश्य रिचार्ज’ के जरिए ये कंपनियां हर साल आम जनता की जेब से हजारों करोड़ रुपए का अतिरिक्त मुनाफा खींच रही हैं।
सालाना प्लान के बाद भी जेब कतरने का खेल!
हैरानी की बात तो यह है कि अगर कोई उपभोक्ता पूरे साल का रिचार्ज भी करवाता है, तब भी साल पूरा खत्म होने से पहले ही दिन घट जाते हैं और कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए अलग से एक या दो दिन का अतिरिक्त रिचार्ज करवाना पड़ता है। हाल ही में प्लान्स के दाम बढ़ाकर जनता पर और भारी बोझ डाल दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद नेटवर्क का बुरा हाल है। कई इलाकों में टावरों की रेंज गायब रहती है और इंटरनेट की स्पीड रुला देती है। यानी पैसे पूरे वसूलने के बाद भी हर तरफ से केवल उपभोक्ता का आर्थिक शोषण हो रहा है।
सरकार और TRAI की चुप्पी पर उठे सवाल
सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक आम जनता में भारी गुस्सा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) और सरकार इस खुली मनमानी पर सख्त कदम क्यों नहीं उठाते? अब जनता की यह मांग जोर पकड़ रही है कि कंपनियों के लिए पूरे 30 दिनों और पूरे 365 दिनों की वास्तविक वैधता वाले प्लान अनिवार्य किए जाएं, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग को इस लूट से राहत मिल सके।
इस मनमानी और अंधाधुंध मुनाफे पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में अपने विचार जरूर लिखें। ऐसी निष्पक्ष और बेबाक खबरें देखने के लिए देखते रहें ‘पंजाब दस्तक’। पेज को लाइक करें, शेयर करें और फॉलो करना न भूलें!

