इंजीनियर मस्त राम बराकटा का पेंशनरों की मांगों पर बयान

इंजीनियर मस्त राम बराकटा की दो-टूक: ‘मुख्यमंत्री की छवि ईमानदार व मेहनती, लेकिन सरकार 18 पेंशनर संगठनों के असली प्रतिनिधियों से ही करे 21 तारीख की वार्ता’

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ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा | पंजाब दस्तक, शिमला
​शिमला:


‘इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ (आईएनटीयूसी / INTUC) के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर मस्त राम बराकटा ने हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों, कामगारों और विशेष रूप से 1 लाख 60 हजार से अधिक पेंशनरों के हितों को लेकर बड़ा और बेबाक बयान जारी किया है। इंजीनियर बराकटा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री एक बेहद ईमानदार, कर्मठ और दिन-रात जनता के लिए पसीना बहाने वाले नेता हैं, जिनकी छवि बेदाग है। परंतु सरकार में बैठे कुछ अवसरवादी और स्वार्थी तत्व वास्तविक मुद्दों को दबाने तथा सरकार और पेंशनरों के बीच खाई पैदा करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और सरकार को खरी सलाह दी है कि वे ऐसे चाटुकार नेताओं से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें और धरातल पर काम कर रहे असली प्रतिनिधियों की आवाज सुनें।


​सुरेश ठाकुर व भूपराम वर्मा की अगुवाई वाला मंच ही 1,60,000 पेंशनरों का सच्चा प्रतिनिधि
​इंजीनियर मस्त राम बराकटा ने आगामी 21 तारीख को होने वाली अहम बैठक को लेकर सरकार को दो-टूक आगाह किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 18 प्रमुख पेंशनर संगठनों के संयुक्त मंच के अध्यक्ष श्री सुरेश ठाकुर और महामंत्री श्री भूपराम वर्मा की राज्य कार्यकारिणी ही हिमाचल के 1.60 लाख से अधिक पेंशनरों का वास्तविक प्रतिनिधित्व करती है। सरकार को किसी भी तथाकथित, स्वयंभू या बिचौलिए नेता के बहकावे में आने के बजाय 21 तारीख की बैठक में केवल और केवल सुरेश ठाकुर व भूपराम वर्मा की अधिकृत कार्यकारिणी को ही औपचारिक वार्ता की मेज पर बुलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि असली प्रतिनिधियों से सीधी बातचीत होगी, तभी वरिष्ठ पेंशनरों की वर्षों से लंबित समस्याओं का ठोस और सम्मानजनक समाधान निकल पाएगा।


​इंजीनियरिंग का प्रशासनिक अनुभव और नियमों की पक्की समझ
​लोक निर्माण विभाग (PWD) में लंबे समय तक अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) के पद पर सेवाएं दे चुके इंजीनियर मस्त राम बराकटा सरकारी नियमों, तकनीकी प्रक्रियाओं और वित्तीय बारीकियों के गहरे जानकार हैं। PWD में विकास कार्यों को पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता के साथ धरातल पर उतारने का उनका दशकों का प्रशासनिक अनुभव आज कर्मचारियों और पेंशनरों के अधिकारों की लड़ाई में सबसे बड़ी ताकत साबित हो रहा है। वे बिना किसी लाग-लपेट के सीधे तथ्यों और नियमों के आधार पर बात रखते हैं, जिसके चलते पूरे प्रदेश के कर्मचारी और पेंशनर उन्हें अपना सबसे मजबूत और भरोसेमंद पैरोकार मानते हैं।


​आईएनटीयूसी का गौरवशाली इतिहास और गांधीवादी दर्शन
​इंजीनियर बराकटा ने संगठन के इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया कि ‘इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ (आईएनटीयूसी / INTUC) देश का सबसे पुराना, प्रतिष्ठित और जिम्मेदार राष्ट्रीय श्रमिक महासंघ है। 3 मई 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और आचार्य कृपलानी जैसे महान राष्ट्रनिर्माताओं के मार्गदर्शन में गठित यह संगठन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और लोकतांत्रिक संवाद के सिद्धांतों पर कार्य करता है। आईएनटीयूसी बेवजह टकराव या राजनीति के बजाय नियमों के तहत बातचीत से समाधान निकालने में विश्वास रखता है, लेकिन जब कर्मचारियों और 1.60 लाख पेंशनरों के हक की बात आए, तो संगठन किसी भी स्तर पर पीछे नहीं हटेगा।


​पेंशनरों और कर्मचारियों के हित में उठाई गईं प्रमुख मांगें
​इंजीनियर मस्त राम बराकटा ने प्रदेश के 1,60,000 से अधिक पेंशनरों और कर्मचारियों की ज्वलंत मांगों को उठाते हुए सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील की:
​1.60 लाख से अधिक पेंशनरों के संशोधित वेतनमान का बकाया एरियर, लंबित वित्तीय लाभ और महीनों से अटके मेडिकल प्रतिपूर्ति बिलों का बिना किसी देरी के तुरंत भुगतान किया जाए।
​21 तारीख की प्रस्तावित बैठक में केवल 18 पेंशनर संगठनों के अधिकृत नेताओं—सुरेश ठाकुर और भूपराम वर्मा की टीम को ही आमंत्रित कर अंतिम निर्णय लिया जाए।


​आउटसोर्स, अनुबंध और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक पारदर्शी और स्थायी नीति तुरंत लागू की जाए।
​न्यूनतम मजदूरी में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए और सभी वर्गों के मानदेय का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित हो।
​निर्माण एवं असंगठित क्षेत्र के कामगारों को ईपीएफ, स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा का पूरा लाभ धरातल पर दिया जाए।
​सरकार ऐसे बिचौलिए नेताओं को वार्ता से पूरी तरह बाहर रखे जो केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनरों के हक से खिलवाड़ करते हैं।


​इंजीनियर बराकटा ने अंत में कहा कि प्रदेश के नवनिर्माण में अपना पूरा जीवन खपा देने वाले पेंशनर और दिन-रात मेहनत करने वाले कामगार ही राज्य की असली रीढ़ हैं। जब तक समाज के इस सबसे सम्मानित वर्ग को उनका पूरा बकाया हक, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल जाती, तब तक आईएनटीयूसी का यह संघर्ष पूरी निष्ठा और मजबूती के साथ जारी रहेगा।


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