प्रशासनिक नालायकी की हद: एरोसिटी पार्क में गमाडा की बिछाई ‘मौत की तार’ ने ली जान, वीआईपी सिटी में बुनियादी सुविधाओं का जनाजा निकला
अलर्ट: मोहाली के 50 वार्डों पर मंडराया मौत का साया; गमाडा, बिजली विभाग, नगर निगम और हॉर्टिकल्चर के आला अफसर एसी कमरों में दुबके, बरसातों से पहले शहर बना बारूद का ढेर
मोहाली, 20 जून (ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा):
पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य के सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले सफेदपोश टैक्स चोरों और बड़े वैट (VAT) व जीएसटी (GST) डिफाल्टरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के कड़े और सीधे आदेशों के बाद आबकारी एवं कराधान विभाग ने मोहाली सहित पूरे ट्राईसिटी में डिफाल्टरों की चल-अचल संपत्तियों को अपने कब्जे में लेकर उनकी पब्लिक ऑक्शन (सार्वजनिक नीलामी) शुरू कर दी है। मोहाली में इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से उन रसूखदारों में हड़कंप मच गया है जो सालों से सरकारी राजस्व पर कुंडली मारकर बैठे थे।
सरकारी पैसे की डकैती बर्दाश्त नहीं, ‘पंजाब दस्तक’ के पास पुख्ता दस्तावेज
’पंजाब दस्तक’ के पास मौजूद आधिकारिक प्रशासनिक रिकॉर्ड और पुख्ता इनपुट्स गवाही दे रहे हैं कि विभाग इस बार किसी भी सिफारिश या दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। जिन डिफाल्टरों ने बार-बार दिए गए कानूनी नोटिसों को रद्दी का टुकड़ा समझा, अब विभाग उनकी संपत्तियां कुर्क कर पाई-पाई वसूल रहा है।
वित्त मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, सरकार ने व्यापारियों को एक आखिरी मौका देते हुए ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (OTS-3) योजना की समय सीमा को बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दिया है। सरकार का रुख बिल्कुल साफ और सख्त है—या तो तय तारीख तक ईमानदारी से टैक्स सेटल करें, वरना अपनी संपत्तियों पर सरकारी बोर्ड और ताला देखने के लिए तैयार रहें। मोहाली में जमीनी स्तर पर शुरू हुई इस नीलामी ने यह साबित कर दिया है कि पंजाब सरकार अब डिफाल्टरों के साथ कोई हमदर्दी नहीं रखने वाली।
गमाडा (GMADA) की खूनी लापरवाही: वीआईपी एरोसिटी में गरीब की मौत
एक तरफ सरकार टैक्स वसूली के लिए डंडा चला रही है, तो दूसरी तरफ उसी टैक्स के पैसे से ऐश करने वाले मोहाली के स्थानीय अधिकारी और गमाडा (GMADA) की रूह कँपा देने वाली नालायकी सामने आई है। मोहाली के सबसे महंगे और पॉश इलाकों में शुमार एरोसिटी (C-Block) के एक पब्लिक पार्क में गमाडा के निकम्मेपन ने एक निर्दोष की जान ले ली।
पार्क के भीतर, जहां बच्चे खेलते हैं और बुजुर्ग टहलते हैं, वहां जमीन के ऊपर खुले छोड़ दिए गए हाई-वोल्टेज बिजली के नंगे तारों की चपेट में आने से एक गरीब प्रवासी मजदूर की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे मोहाली प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं।
महा-अलर्ट: मोहाली के 50 वार्डों में बिछा है मौत का जाल, पेड़ों से छू रही हैं हाई-वोल्टेज तारें
’पंजाब दस्तक’ की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट के मुताबिक, एरोसिटी का यह दर्दनाक हादसा तो सिर्फ एक बानगी है। हकीकत यह है कि मोहाली के सभी 50 वार्डों में इस समय मौत का तांडव होने की पूरी तैयारी है। शहर के लगभग हर वार्ड में बिजली की हाई-वोल्टेज तारें नीचे की तरफ लटक रही हैं। हद तो यह है कि अनगिनत पेड़ इन नंगे तारों के बिल्कुल बीचों-बीच उग चुके हैं, लेकिन संबंधित विभागों ने आज तक इन पेड़ों की छंटाई करने की जहमत नहीं उठाई।
15-20 दिन में मॉनसून की दस्तक, खतरा दोगुना: मौसम विभाग के अनुसार, अगले 15 से 18 दिनों के भीतर पंजाब में भारी बरसात का मौसम शुरू होने वाला है। बरसात के दिनों में हरियाली और नमी के कारण करंट फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। अगर पेड़ की गीली टहनी भी इन लटकती तारों से छू गई, तो पूरे इलाके के पार्कों और सड़कों पर करंट दौड़ जाएगा।
एसी के पंखों के नीचे दुबके ‘सफेद हाथी’; ग्राउंड जीरो से गायब जिम्मेदार अधिकारी
मोहाली की जनता इस भयानक खतरे के साए में जीने को मजबूर है, लेकिन जिन अधिकारियों के कंधों पर शहर को संभालने की जिम्मेदारी है, वे दफ्तरों के ठंडे एसी और पंखों के नीचे कुंडली मारकर बैठे हैं। ‘पंजाब दस्तक’ सीधे तौर पर इन विभागों के आला अफसरों की जवाबदेही तय करता है:
पावरकॉम (PSPCL) और गमाडा के इलेक्ट्रिकल विंग: बिजली विभाग और गमाडा के इलेक्ट्रिकल विंग के एक्सियन (XEN), एसडीओ (SDO) और जेई (JE) पूरी तरह field से गायब हैं। लटकती तारों और खुले पैनलों को दुरुस्त करने की सुध किसी को नहीं है।
हॉर्टिकल्चर (बागवानी) विभाग के अफसर: हॉर्टिकल्चर विभाग के अधिकारियों को सड़कों और पार्कों में लगे उन पेड़ों की छंटाई (Pruning) तुरंत करवानी चाहिए थी जो बिजली की तारों को छू रहे हैं, लेकिन इनकी लापरवाही के कारण पेड़ आज मौत का जरिया बन रहे हैं।
नगर निगम और सैनिटेशन (सफाई) विंग: सड़कों के किनारे लगे कूड़े के ढेरों को साफ करवाने की जिम्मेदारी जिन सैनिटेशन अफसरों, चीफ सैनिटरी इंस्पेक्टरों और सुपरवाइजरों की है, वे भी फील्ड में उतरने को तैयार नहीं हैं।
सीवरेज, पीडब्ल्यूडी (PWD) और ड्रेनेज विंग: सीवरेज और सड़कों का रखरखाव देखने वाले इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हैं।
सड़कों पर कूड़े के अंबार; गटर जाम होने से शहर के डूबने का रास्ता साफ
प्रशासनिक निकम्मेपन की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। मोहाली के 50 वार्डों की सड़कों के किनارهای पर इस समय कूड़े के विशाल ढेर लगे हुए हैं। ‘पंजाब दस्तक’ प्रशासन को आगाह कर रहा है कि गमाडा, निगम और ड्रेनेज विंग के पास अब सिर्फ 15 दिन का समय बचा है। अगर तुरंत इन कूड़े के ढेरों को नहीं हटाया गया, तो पहली ही तेज बरसात में यह सारा कूड़ा पानी के साथ बहकर गटरों, नालियों और रोड-गुलियों (Stormwater drains) में समा जाएगा। इसके बाद पूरे मोहाली के गटर पूरी तरह चोक हो जाएंगे, ड्रेनेज सिस्टम ठप हो जाएगा और गंदा पानी सड़कों पर बहता हुआ लोगों के घरों में घुसना तय है, जिससे भारी आर्थिक और जान-माल का नुकसान होगा।
मोहाली व्यापार मंडल का तीखा पलटवार: “सुविधाएं शून्य, टैक्स में सख्ती क्यों?”
इस दोहरे घटनाक्रम के बीच मोहाली व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों ने मेयर और निगम कमिश्नर के साथ एक बेहद तल्ख माहौल में आपात बैठक की है। व्यापारियों ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को घेरा कि एक तरफ सरकार संपत्तियां नीलाम कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ मोहाली के मुख्य बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं है। बाजारों में पार्किंग का नामोनिशान नहीं है, सीवरेज पूरी तरह ठप होकर उबल रहे हैं और सफाई व्यवस्था का जनाजा निकल चुका है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि टैक्स के बदले बुनियादी सुविधाएं न मिलीं, तो पूरा व्यापार मंडल व्यापार ठप कर सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।
पूछते हैं मोहाली के लोग और टैक्स पेयर्स: “हम टैक्स दे रहे हैं, हमारी सुविधाएं कब मिलेंगी?”
मोहाली के जागरूक नागरिक और टैक्स पेयर्स अब प्रशासन से सीधे सवाल कर रहे हैं। जनता का पूछना है कि जब हम समय पर पूरा टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स और भारी-भरकम मेंटेनेंस चार्जेस सरकार के खजाने में जमा कर रहे हैं, तो हमें नरक जैसी जिंदगी जीने पर क्यों मजबूर किया जा रहा है? क्यों हमें सड़कों पर बदबूदार कूड़े के ढेर, उबलते गटर और पार्कों में मौत बनकर लटकती बिजली की तारें मिल रही हैं? बरसातों का मौसम सिर पर है और जनता डरी हुई है कि अफसरों की इस नालायकी के कारण होने वाले भारी नुकसान की भरपाई कौन करेगा? मोहाली के लोग जानना चाहते हैं कि हमारी सुख-सुविधाओं और सुरक्षा की गारंटी कब मिलेगी?
’पंजाब दस्तक’ के जरिए मोहाली की जनता और टैक्स पेयर्स की हुंकार: “तुरंत ऐक्शन ले प्रशासन”
’पंजाब दस्तक’ के इस अभियान के साथ जुड़कर मोहाली की आम जनता, सभी 50 वार्डों के निवासी और टैक्स पेयर लोग एकजुट होकर प्रशासन से पुरजोर मांग कर रहे हैं कि:
मोहाली के सभी 50 वार्डों में तैनात जिम्मेदार अधिकारी तुरंत एसी दफ्तरों से बाहर निकलें और हर गली-मोहल्ले का खुद दौरा कर जमीनी हकीकत देखें।
मॉनसून के आने से पहले, यानी अगले 15 दिनों के भीतर युद्धस्तर पर उन पेड़ों की छंटाई (Pruning) करवाई जाए जो बिजली की हाई-वोल्टेज तारों से छू रहे हैं, ताकि किसी और बेगुनाह की जान न जाए।
सड़कों के किनारों और खाली प्लॉटों में लगे कूड़े के ढेरों को 24 घंटे के अंदर साफ किया जाए, ताकि बरसाती पानी के साथ यह कूड़ा बहकर गटरों को चोक न कर सके।
सारे शहर के सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई का काम समय रहते पूरा किया जाए ताकि मोहाली को डूबने से बचाया जा सके।
’पंजाब दस्तक’ ब्यूरो की दो टूक टिप्पणी
ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा की पैनी नजर: मोहाली की मौजूदा स्थिति अफसरों की तानाशाही और प्रशासनिक दोगलेपन को उजागर करती है। सरकार द्वारा टैक्स डिफाल्टरों पर हंटर चलाना शत-प्रतिशत सही और न्यायसंगत है, क्योंकि देश और राज्य के विकास के लिए टैक्स की चोरी महापाप है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जो जनता ईमानदारी से भारी-भरकम टैक्स दे रही है, उसे बदले में क्या मिल रहा है? एरोसिटी के पार्क में मौत का जाल, 50 वार्डों में लटकती बिजली की तारें, सड़कों पर गंदगी के ढेर और सिर पर मंडराता मॉनसून का खतरा!
टैक्स वसूलने में जितनी तेजी और कड़ाई दिखाई जा रही है, वैसी ही मुस्तैदी गमाडा, बिजली विभाग, हॉर्टिकल्चर और निगम के उन निकम्मे और गैर-जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई करने में क्यों नहीं दिखाई जाती जो दफ्तरों से बाहर नहीं निकलते? ‘पंजाब दस्तक’ मोहाली की जनता और टैक्स पेयर्स की इस जायज मांग का पूरी तरह समर्थन करता है और प्रशासन को चेतावनी देता है कि अगर अगले 15 दिनों के भीतर इन समस्याओं को ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले नुकसान की पूरी जिम्मेदारी गमाडा और निगम के आला अधिकारियों की होगी। अगर अब कोई अनहोनी हुई, तो सीधे तौर पर इन लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
— पंजाब दस्तक ब्यूरो, सुरेंद्र राणा (मोहाली, पंजाब)।
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