पंजाब दस्तक
ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा
शिमला – हिमाचल प्रदेश की गरमाई सियासत, बेपटरी होती अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने शिमला स्थित हॉलिडे होम में पंजाब दस्तक से खास और सीधी बातचीत की।
बातचीत की शुरुआत करते हुए जब पंजाब दस्तक ने शिमला में आयोजित इस प्रेस वार्ता के मुख्य एजेंडे और वर्तमान शासन प्रणाली पर सवाल उठाया, तो राजेंद्र राणा ने तीखे तेवरों में कहा, “देखिए सुरेंद्र जी, इस बार लोग मुंहतोड़ जवाब देंगे…” उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में इस समय जनता द्वारा चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। राज्य में केवल एक ‘सिंडिकेट’ हावी है। प्रदेश के बहुमूल्य संसाधनों और सरकारी तंत्र का इस्तेमाल आम जनता की भलाई के लिए नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री अपने खास चहेतों और मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए कर रहे हैं।
बिना पद का ‘पावरफुल शख्स’ और 5 विवादित कीर्तिमान
बातचीत के दौरान राजेंद्र राणा ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि शिमला के गलियारों में इस बात की बड़ी चर्चा है कि सिंडिकेट में एक सरदार जी (सिख व्यक्ति) बेहद पावरफुल हैं। न तो उनके पास सरकार में कोई संवैधानिक पद है और न संगठन में जिम्मेदारी, लेकिन वे इतने ‘शक्तिमान’ बने हुए हैं कि सीधे चीफ सेक्रेटरी और प्रिंसिपल्स सेक्रेटरी के कमरों में जाकर फैसले डिक्टेट कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री के कार्यकाल पर हमला बोलते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि सुखविंदर सिंह सुखू के राज में 5 ऐसे ‘कीर्तिमान’ स्थापित हो चुके हैं, जो प्रदेश के इतिहास में कभी नहीं देखे गए:
उत्तर भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड।
राज्य पर रिकॉर्ड तोड़ कर्ज का बोझ लादना।
जनता से सबसे अधिक झूठे चुनावी वादे करना।
अपने राजनीतिक विरोधियों पर चुन-चुनकर मुकदमे दर्ज कराना।
और पूरी सरकार को केवल ‘मित्र मंडली’ के इशारों पर चलाना।
’हिमाचल ऑन सेल’: मुनाफे वाले 6 होटल और 200 करोड़ी ‘हिमाचल निकेतन’ बेचने की साठगांठ
बातचीत में आगे बढ़ते हुए राजेंद्र राणा ने सरकार की नीतियों पर ‘हिमाचल ऑन सेल’ का बड़ा आरोप लगाया:
प्रॉफिट मेकिंग होटलों पर नजर: उन्होंने कहा कि फागू और रोहड़ू समेत पर्यटन निगम (HPTDC) के कम से कम 6 ऐसे होटल जो लगातार मुनाफे (प्रॉफिट) में हैं, उन्हें भी किसी प्राइवेट हाथों में सौंपने की गुपचुप तैयारी चल रही है।
200 करोड़ का हिमाचल निकेतन: दिल्ली में जनता के टैक्सपेयर्स के लगभग 200 करोड़ रुपये से बने ‘हिमाचल निकेतन’ को भी प्राइवेट खिलाड़ियों के हवाले करने की साठगांठ रची जा रही है।
कर्मचारियों का बुरा हाल: टूरिज्म कॉर्पोरेशन के कर्मचारियों को 20 तारीख तक वेतन नहीं मिल रहा और एचआरटीसी (HRTC) के मुलाजिमों की हालत भी बदतर हो चुकी है।
”5 अटैचियों में से 3 दिल्ली जा रही हैं, झूठी FIR से BJP नहीं डरेगी”
पार्टी के अंदरूनी भ्रष्टाचार और राजनीतिक मुकदमों पर तीखे जुबानी तीर चलाते हुए राजेंद्र राणा ने कहा:
अटैचियों (टैचियों) का सिंडिकेट: उन्होंने कहा कि कांग्रेस के ही अपने लोग आरोप लगा रहे हैं कि प्रदेश से 5-5, 6-6 अटैचियां (सूटकेस) भरी जा रही हैं, जिनमें से 3 अटैचियां दिल्ली हाईकमान को जाती हैं और 2 हिमाचल के सिंडिकेट में बंटती हैं। हिमाचल कांग्रेस हाईकमान के लिए एटीएम बन चुका है और तथाकथित ईमानदार मुख्यमंत्री की इस पर चुप्पी ही उनकी स्वीकारोक्ति है।
बॉल जितना दबाओगे, उतना उछलेगी: मुख्यमंत्री को गलतफहमी है कि झूठी एफआईआर से भाजपा नेता डर जाएंगे। बॉल या वॉलीबॉल को जितना वैक्यूम में दबाया जाता है, वह उतनी ही तेजी से ऊपर उछलती है।
हिटलर जैसा अहंकार न पालें: इतिहास गवाह है कि हिटलर ने करोड़ों लोगों को मरवा दिया था, लेकिन अंत में उसका क्या हश्र हुआ, सब जानते हैं। मुख्यमंत्री हिटलर की भूमिका में न रहें, जनता ने सेवा के लिए चुना है, तो सेवा करें। उन्होंने कहा कि यह स्थिति कांग्रेस के कफन पर आखिरी कील ठोकने जैसी है; जैसे यूपी की 403 सीटों में से आज कांग्रेस 1 सीट पर सिमट गई है, वैसा ही हाल हिमाचल में होने वाला है।
51 साल का रिकॉर्ड 4 साल में टूटा, वित्तीय ढांचा ध्वस्त
प्रदेश की माली हालत और वित्तीय संकट पर आंकड़ों का हवाला देते हुए राजेंद्र राणा ने स्पष्ट किया कि साल 1971 से 2022 तक यानी 51 वर्षों में हिमाचल की तमाम सरकारों ने मिलकर कुल 68,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। लेकिन मौजूदा सरकार ने महज 4 साल के भीतर ही 44,600 करोड़ रुपये का नया कर्ज लाद दिया है। हर साल औसतन 12,000 करोड़ रुपये का कर्ज उठाया जा रहा है, जिससे हिमाचल की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा चुकी है।
बातचीत के अंत में जब आगामी चुनावों पर चर्चा हुई, तो राजेंद्र राणा ने दोटूक अंदाज में कहा कि जनता सब देख रही है और सही समय पर इसका हिसाब चुकता करेगी। उन्होंने दावा किया कि वादाखिलाफी का नतीजा यह होगा कि आने वाले विधानसभा चुनावों में सत्ताधारी दल दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगा और महज 4 सीटों पर सिमट कर रह जाएगा।
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