शिमला में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और वेंडिंग जोन की मांग

​सड़कें आम जनता और वाहनों के लिए, अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं: हिमाचल में तय बाजारियों पर कार्रवाई का जनता ने किया समर्थन, पुनर्वास की भी उठाई मांग

Spread the love

पंजाब दस्तक (विशेष रिपोर्ट):
​विशेष कवरेज: सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ — पंजाब दस्तक


शिमला – हिमाचल: राजधानी शिमला सहित प्रदेश भर के प्रमुख शहरों और तहसील स्तर के बाजारों में अनधिकृत रेहड़ी-फड़ी और तय बाजारियों के अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई पर जन-समर्थन और विरोध दोनों चरम पर हैं। शिमला के 103 सुरंग क्षेत्र से अवैध खोखों को हटाए जाने के बाद जहां यातायात सुगम हुआ है, वहीं अब पूरे शिमला और प्रदेश भर के बाजारों को अतिक्रमण मुक्त करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है।


​”सड़कें आवाजाही के लिए हैं, दुकानों के लिए नहीं” — सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला
​आम जनता और स्थानीय निवासियों का स्पष्ट कहना है कि सड़कें और फुटपाथ आम जनता के पैदल चलने, बसों, गाड़ियों और एम्बुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों के लिए हैं, न कि सड़क किनारे दुकानें और तंबू सजाने के लिए। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों का हवाला देते हुए लोगों का मानना है कि सड़क किनारे अवैध कब्जे दुर्घटनाओं को न्योता देते हैं।


​जनता ने शिमला के इन प्रमुख इलाकों में सख्त कदम उठाने की मांग की है:
​घोड़ा चौकी, तारा देवी, संकट मोचन और शोघी: सड़कों के किनारे अवैध तंबुओं और खोखों के कारण सड़कें सिकुड़ गई हैं।
​न्यू शिमला, बालूगंज, समरहिल, संजौली, ढली, छोटा शिमला और कसूमटी: व्यस्त बाजारों में फुटपाथों पर कब्जों से पैदल चलना दूभर हो गया है।
​सुरक्षा पर बड़ा सवाल: लोअर बाजार जैसे तंग इलाकों में एम्बुलेंस का निकलना मुश्किल रहता है। यदि कहीं आग लग जाए तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तक नहीं पहुंच सकतीं।


​प्रदेश भर के मुख्य और तहसील बाजारों का एक जैसा हाल
​अतिक्रमण की यह समस्या केवल शिमला तक सीमित नहीं है। हमीरपुर, चंबा, मंडी, कांगड़ा, कुल्लू, ऊना और बिलासपुर के मुख्य बाजारों के साथ-साथ तहसील स्तर के बाजारों में भी सड़क किनारे बैठे तय बाजारियों के कारण रोजाना भयंकर ट्रैफिक जाम लगता है। लोग आए दिन लगने वाले इस जाम से बेहद परेशान हैं और प्रशासन की इस सफाई मुहिम का स्वागत कर रहे हैं।


​कालीबाड़ी अधिवेशन में छलका तय बाजारियों का दर्द: “गरीबों पर गाज, बड़े व्यापारियों को छूट”
​दूसरी ओर, इस कार्रवाई के खिलाफ शिमला के कालीबाड़ी हॉल में तय बाजारी यूनियन का एक अहम अधिवेशन आयोजित किया गया। लोअर बाजार तय बजारी यूनियन के प्रधान पवन शर्मा ने सरकार, नगर निगम प्रशासन और व्यापार मंडल पर निशाना साधते हुए कहा:
​”हमने इस सरकार का पूरा समर्थन किया, लेकिन आज हमें दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंका गया। अब इनका रुझान सिर्फ बड़े लोगों और व्यापारियों की तरफ है। गरीबों को केवल वोट के समय याद किया जाता है। अभी कुर्सी की गर्मी दिमाग पर है, लेकिन आठ-नौ महीने बाद जब चुनाव आएंगे, तब गरीबों की याद आएगी।”


​पवन शर्मा ने आरोप लगाया कि गंज बाजार में बड़े दुकानदारों (लालों) द्वारा बाहर तक सामान सजाने पर जब कार्रवाई हुई, तो व्यापारी तुरंत मेयर के पास चले गए और उसके बाद वहां कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा:
​”हम मुख्य बाजार में बैठने की जिद नहीं कर रहे, लेकिन कम से कम हमें ऐसी जगह तो दी जाए जहां हमारा रोजगार चले और हमारे बच्चे भूखे न मरें।”


​संतुलित समाधान: अतिक्रमण मुक्त सड़कें और उचित ‘वेंडिंग ज़ोन’
​आम जनता और पंजीकृत व्यापारियों का मानना है कि वे किसी के रोजगार के खिलाफ नहीं हैं। लोगों ने सरकार से अपील की है कि:
​सड़कें पूरी तरह खाली हों: सड़कों और खतरनाक मोड़ों पर किसी भी हाल में रेहड़ी-फड़ी या खोखे न लगने दिए जाएं।
​उचित स्थान पर पुनर्वास: तय बाजारियों के लिए बाजार से हटकर एक व्यवस्थित ‘वेंडिंग ज़ोन’ बनाया जाए ताकि उनका रोजगार भी चलता रहे और यातायात व्यवस्था भी दुरुस्त रहे।


​खबरें देखने के लिए ‘पंजाब दस्तक’ को सब्सक्राइब करें, फॉलो करें और शेयर करें। देखते रहिए ‘पंजाब दस्तक’।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *