हिमाचल सरकारी स्कूलों में बिना TET नहीं चलेगी मास्टरी, 2028 तक अल्टीमेटम

सुखू सरकार का बड़ा एक्शन: हिमाचल के सरकारी स्कूलों में बिना TET नहीं चलेगी ‘मास्टरी’, 2028 तक का अल्टीमेटम, फेल हुए तो नियमों के तहत रुकेगी तरक्की और होगी सख्त कार्यवाही!

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​विशेष रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ)
पंजाब दस्तक
​सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शिक्षा विभाग का सबसे बड़ा हंटर; दांव पर लगी हजारों ‘इन-सर्विस’ शिक्षकों की प्रतिष्ठा!
​शिक्षा की गुणवत्ता से रत्ती भर समझौता नहीं; बिना परीक्षा पास किए शिक्षकों का शिमला मुख्यालय में रिकॉर्ड तलब


​शिमला: हिमाचल प्रदेश की सुखू सरकार ने सूबे की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने और सरकारी स्कूलों में ‘क्वालिटी एजुकेशन’ (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) का परचम बुलंद करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा फैसला ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त और ऐतिहासिक आदेशों के बाद, शिमला स्थित शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अब सरकारी स्कूलों में सिर्फ सेवाकाल काटने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर ‘इन-सर्विस’ (कार्यरत) शिक्षक को अपनी काबिलियत की परीक्षा देनी ही होगी।


​सरकार के नए और कड़े फरमान के मुताबिक, प्रदेश के जिन भी सरकारी शिक्षकों ने अभी तक ‘शिक्षक पात्रता परीक्षा’ (TET) पास नहीं की है, उन्हें 31 अगस्त 2028 तक हर हाल में यह टेस्ट क्लियर करना होगा। विभाग ने दो टूक स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर जो भी शिक्षक इस परीक्षा को पास करने में नाकाम रहता है, उसके खिलाफ नियमों के अनुसार आगे की कड़ी विभागीय कार्यवाही अमल में लाई जाएगी, जिसके तहत पदोन्नति (प्रमोशन) और अन्य सेवा लाभों पर सीधा असर पड़ना तय है।


​सुप्रीम कोर्ट के हंटर से हिला महकमा, खत्म हुआ ढुलमुल रवैया
​यह आर-पार का निर्णय माननीय उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा सिविल अपील संख्या 1385/2025 और इससे जुड़ी समीक्षा याचिका पर दिए गए अंतिम आदेशों के तहत लिया गया है। पहले इन शिक्षकों को इस परीक्षा को पास करने के लिए सिर्फ 2 साल की मोहलत दी जा रही थी, जिसे अदालत ने थोड़ा और समय देते हुए बढ़ाकर 3 साल किया। इसी आखिरी मौके को आधार बनाकर सुखू सरकार ने 31 अगस्त 2028 की ‘डेडलाइन’ तय कर दी है। सरकार का सीधा संदेश है—नौकरी में बने रहना है और आगे बढ़ना है, तो योग्यता साबित करनी ही होगी।


​बिना TET वालों का खंगाला जा रहा रिकॉर्ड, साल में दो बार परीक्षा का मौका
​शिमला मुख्यालय से जारी आदेशों के बाद पूरे प्रदेश के शिक्षा महकमे में कसरत तेज हो गई है। ऐसे सभी कार्यरत शिक्षकों का पूरा रिकॉर्ड और डेटा तुरंत तलब किया जा रहा है, जिन्होंने सालों से सेवा में रहने के बावजूद आज तक TET परीक्षा पास नहीं की है। इन शिक्षकों की एक अलग सूची तैयार की जा रही है ताकि उनके मामले पर पैनी नजर रखी जा सके।


​हालांकि, सरकार शिक्षकों को पूरा और फेयर चांस देने के मूड में है। शिक्षकों को तैयारी का पूरा अवसर मिले, इसके लिए साल में दो बार विशेष TET परीक्षा आयोजित करने का एक फुलप्रूफ प्लान तैयार किया गया है। इसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा ताकि कोई शिक्षक इस महत्वपूर्ण सूचना से वंचित न रह सके।


​आगे बढ़ना है तो बढ़ानी होगी ‘गुणवत्ता’, लापरवाही पर लगेगा फुल स्टॉप
​शिक्षा विभाग ने इस पूरे मामले को ‘अत्यंत महत्वपूर्ण और समयबद्ध’ घोषित करते हुए स्कूल शिक्षा निदेशकों को तुरंत आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दे दिए हैं। सरकार का साफ मानना है कि सरकारी स्कूलों के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए शिक्षकों की शैक्षणिक क्षमता और व्यावसायिक दक्षता को परखना अनिवार्य है। जब तक शिक्षक खुद अपडेट और योग्य नहीं होंगे, तब तक नौनिहालों को ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा’ (Quality Education) नहीं मिल सकती। विभाग ने साफ संकेत दे दिए हैं कि 2028 के बाद नियमों के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे और लापरवाही बरतने वालों की मुश्किलें बढ़ना तय है।


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