हिमाचल प्रदेश बॉर्डर पर Fastag और ANPR कैमरों से लैस डिजिटल टोल बैरियर

पंजाब दस्तक ब्यूरो : हिमाचल बॉर्डर्स पर ‘मैन्युअल पर्ची’ का दौर खत्म: सभी 55 बैरियरों को डिजिटल करने की डेडलाइन समाप्त, जून के अंत में प्रशासन का बड़ा एक्शन

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फास्टैग और ANPR कैमरों से लैस हुए सूबे के प्रवेश द्वार, बाहरी गाड़ियों का टैक्स सीधे खाते से कटेगा; हिमाचल नंबरों को बिना रुके ‘फ्री-वे’ की बड़ी राहत


​विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक
​शिमला/चंडीगढ़। हिमाचल प्रदेश को पूरी तरह ‘जाम-मुक्त और डिजिटल’ बनाने की दिशा में राज्य सरकार और राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने जून के इस अंतिम सप्ताह में अपना सबसे बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। 1 अप्रैल से लागू हुई नई टोल नीति के तहत प्रदेश के सभी 55 बॉर्डर बैरियरों को पूरी तरह फास्टैग और हाईटेक कैमरों से लैस करने की जो 45 दिनों की सख्त समय-सीमा (डेडलाइन) ठेकेदारों को दी गई थी, वह अब जून खत्म होने के साथ ही समाप्त हो चुकी है।


​पंजाब दस्तक की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, ब्यूरो प्रमुख सुरेंद्र राणा ने राज्य के प्रमुख बॉर्डर्स का जायजा लेने के बाद बताया कि आबकारी विभाग के आला अधिकारियों ने मैदानी स्तर पर इस पूरे सिस्टम की चेकिंग और कड़ा एक्शन शुरू कर दिया है। जिन ठेकेदारों या कंपनियों ने तय समय के भीतर बैरियरों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और फास्टैग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित नहीं किया है, उन्हें ब्लैकलिस्ट करने और उनके लीज एग्रीमेंट को रद्द करने के कड़े निर्देश जारी हो चुके हैं।


​इस पूरी खबर का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बॉर्डर पर अब स्थानीय लोगों को कतारों में नहीं लगना पड़ेगा। जैसे ही हिमाचल प्रदेश (HP नंबर) की कोई भी निजी कार, जीप या स्थानीय कमर्शियल टैक्सी बैरियर के पास पहुंचेगी, वहां लगे अत्याधुनिक ANPR कैमरे ऑटोमैटिक तरीके से नंबर प्लेट को रीड कर लेंगे। सॉफ्टवेयर तुरंत पहचान जाएगा कि गाड़ी हिमाचल की है और बैरियर बिना रुके अपने आप ऊपर उठ जाएगा। हिमाचल के लोगों को न तो गाड़ी रोकनी होगी, न कोई पर्ची दिखानी होगी और न ही उनका फास्टैग से कोई पैसा कटेगा। बॉर्डर बैरियर के दोनों तरफ 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों और उनके छोटे कमर्शियल वाहनों (पिकअप, छोटा हाथी आदि) के लिए जारी किए गए ‘फ्री कॉन्सेशनल पास’ जून महीने से पूरी तरह एक्टिव कर दिए गए हैं।


​विभाग ने राज्य के जिन 6 सबसे व्यस्त और मुख्य प्रवेश द्वारों को पहले फेज में पूरी तरह डिजिटल और ऑटोमैटिक कर दिया है, उनमें गरामौड़ा बैरियर (बिलासपुर) कीर्तपुर-मनाली फोरलेन, परवाणू मुख्य बैरियर और टिपरा बाईपास (सोलन) शिमला-चंडीगढ़ मार्ग, मैहतपुर बैरियर (ऊना) पंजाब सीमा, बद्दी बैरियर (सोलन) औद्योगिक क्षेत्र, कंडवाल बैरियर (कांगड़ा/नूरपुर) पठानकोट-जम्मू मार्ग, और गोविंदघाट बैरियर (सिरमौर) उत्तराखंड/हरियाणा सीमा शामिल हैं।


​हिमाचल के बाहर (जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ आदि) के नंबर वाले वाहनों के लिए विभाग द्वारा निर्धारित की गई नई और संशोधित एंट्री फीस इस प्रकार तय की गई है, जिसमें बाहरी राज्यों की प्राइवेट कार, जीप या वैन के लिए ₹100, बाहरी राज्यों के ऑटो या स्कूटर रिक्शा के लिए ₹30, बाहरी राज्यों के ट्रैक्टर के लिए ₹100, हल्के कमर्शियल वाहन, मिनी बस, छोटा हाथी या पिकअप के लिए ₹320, दो एक्सल वाले मालवाहक ट्रक या बड़ी बसों के लिए ₹320, भारी ट्रक (10, 12 और 14 टायर वाले) के लिए ₹570, मल्टी-एक्सेल और भारी कंस्ट्रक्शन मशीनरी (4 से 6 एक्सल) के लिए ₹800, और बड़े ट्रेलर्स (7 या अधिक एक्सल वाले ओवरसाइज्ड वाहन) के लिए ₹900 की पर्ची कटेगी।


​इस डिजिटल क्रांति के पीछे सरकार के मुख्य उद्देश्य हैं कि बॉर्डर पर ऑटोमैटिक बैरियर चालू होने से गाड़ियों को टोल पर रुकना नहीं पड़ेगा जिससे पंजाब-हरियाणा बॉर्डर पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से परमानेंट मुक्ति मिलेगी, पहाड़ी राज्य के इको-सिस्टम को प्रदूषण से बचाने और वाहनों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था जरूरी की गई है, इस नई डिजिटल प्रणाली से सरकार ने चालू वित्त वर्ष में करीब 185 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है जिसमें चोरी की कोई गुंजाइश नहीं होगी, और एंट्री टैक्स से मिलने वाली शत-प्रतिशत राशि का सीधा उपयोग हिमाचल की सड़कों के रखरखाव, लिंक रोड्स को अपग्रेड करने और पर्यटन स्थलों पर अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित करने में किया जाएगा।


​पंजाब दस्तक की विशेष टिप्पणी के अनुसार, जून का महीना खत्म होने के साथ ही पहले चरण के इन 6 बॉर्डर्स पर इस हाईटेक प्रणाली का ट्रायल और रिव्यू पूरा हो चुका है। अब बरसात के मौसम और आगामी सेब सीजन को देखते हुए विभाग बाकी बचे सभी छोटे बैरियरों को भी इसी डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने जा रहा है। सरकार का यह कदम जहां बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों के सफर को सुगम बनाएगा, वहीं हिमाचल के स्थानीय निवासियों को बॉर्डर पर होने वाली बेवजह की माथापच्ची से हमेशा के लिए निजात दिला चुका है।


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