सुरेंद्र सिंह राणा, ब्यूरो चीफ — पंजाब दस्तक
शिमला / धर्मशाला:
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के बीच सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है। धर्मशाला से भारतीय जनता पार्टी के फायरब्रांड विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) और विजिलेंस के दो आला अधिकारियों के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का प्रस्ताव लाकर सुक्खू सरकार और पुलिस-विजिलेंस तंत्र की कार्यप्रणाली की चूलें हिला दी हैं। विधायक ने इसे लेकर विधानसभा अध्यक्ष को विधिवत अवमानना नोटिस सौंपते हुए सख्त से सख्त संज्ञान लेने की दो टूक मांग की है।
’सदन की गरिमा तार-तार, सत्र के दौरान पूछताछ के लिए शिमला तलब करना सरासर गलत’
विधायक सुधीर शर्मा ने दो-टूक कहा कि जब विधानसभा का सर्वोच्च लोकतांत्रिक सत्र चल रहा हो और चुने हुए जनप्रतिनिधि सदन की कार्यवाही में जनता के मुद्दे उठा रहे हों, उस वक्त उन्हें जांच के नाम पर विजिलेंस दफ्तर तलब करना विशेषाधिकार का खुला हनन और सदन की गरिमा पर सीधा हमला है। उन्होंने सवाल दागा कि जब मामला धर्मशाला विजिलेंस थाने से संबंधित है, तो विधानसभा सत्र के ऐन वक्त पर दबाव बनाने के लिए उन्हें शिमला विजिलेंस कार्यालय क्यों बुलाया गया?
’विकास छोड़ सिर्फ सुधीर शर्मा पर टिका मुख्यमंत्री का एजेंडा’
सुधीर शर्मा ने सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध और बदले की भावना से काम करने का सीधा आरोप मढ़ा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “सरकार की पहली प्राथमिकता प्रदेश का विकास और जनहित होना चाहिए, लेकिन ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री ने समूची सत्ता का एजेंडा सिर्फ सुधीर शर्मा को बना रखा है—और इस सियासी बीमारी का इलाज उनके पास नहीं है।”
बता दें कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस विभाग सुधीर शर्मा के खिलाफ धर्मशाला में केस दर्ज कर जांच कर रहा है। वह 18 अगस्त को बाकायदा धर्मशाला में विजिलेंस के समक्ष पेश हो चुके थे। इसके बावजूद शुक्रवार को सत्र की गहमागहमी के बीच उन्हें शिमला तलब किए जाने के बाद यह सियासी जंग अब विधानसभा के पटल तक पहुंच चुकी है।
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