पंजाब के CM भगवंत मान के कैंप कार्यालय पर CBI रेड

पंजाब की सियासत में महाभूकंप: CM भगवंत मान के कैंप दफ्तर समेत 9 ठिकानों पर CBI की जबर्दस्त रेड, खास सिपहसालार OSD समेत 6 पर FIR दर्ज; सत्ता के गलियारों में मचा हड़कंप

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​सुरेंद्र राणा | चंडीगढ़ पंजाब दस्तक न्यूज़ रूम


​चंडीगढ़: पंजाब के सत्ता के शीर्ष गलियारों में आज उस वक्त हड़कंप और खलबली मच गई, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीमों ने सीधे सत्ता के केंद्र बिंदु पर बड़ा धावा बोल दिया। मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ स्थित कैंप कार्यालय समेत पंजाब के कुल 9 अहम और रसूखदार ठिकानों पर जांच एजेंसी ने एक साथ सघन छापेमारी शुरू कर दी। इस बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई के तहत मुख्यमंत्री के बेहद करीबी और विशेष कार्य अधिकारी (OSD) राजबीर सिंह घुम्मन समेत 6 प्रभावशाली लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत नियमित प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। इस कार्रवाई के बाद से पंजाब की राजनीति में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।


​सुबह-सवेरे गाड़ियों का काफिला और चौतरफा नाकाबंदी: 9 ठिकानों पर एक साथ रेड
​चंडीगढ़ न्यूज़ रूम से मिली ताजा और पुख्ता जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने पूरी रणनीतिक योजना के साथ एक ही समय पर कई शहरों में दबिश दी:
​चंडीगढ़ सेक्टर-2 स्थित मुख्यमंत्री कैंप दफ्तर: सुबह-सवेरे गाड़ियों का काफिला पहुंचा और कैंप दफ्तर के सभी एंट्री गेट बंद कर दिए गए। सुरक्षा घेरा बनाकर अंदर मौजूद संवेदनशील फाइलों, कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क, ईमेल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल डेटा को एजेंसी ने अपने कब्जे में ले लिया।


​मोहाली और पटियाला के वीआईपी इलाके: ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन और उनसे जुड़े करीबी प्रशासनिक और राजनीतिक संपर्कों के निजी आवासों और कारोबारी ठिकानों की गहन तलाशी ली जा रही है।
​लुधियाना, जालंधर और गुरदासपुर: पंजाब के प्रमुख औद्योगिक व सीमावर्ती जिलों में मौजूद संदिग्ध संपत्तियों, दफ्तरों और बिचौलियों के ठिकानों पर भी केंद्रीय जांच दल मुस्तैद हैं और तलाशी अभियान लगातार जारी है।
​विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां पिछले कई महीनों के दौरान मंजूर की गई सरकारी फाइलों, ट्रांसफर-पोस्टिंग के बैकग्राउंड डेटा और लेन-देन से जुड़े डिजिटल सबूतों को जब्त करने में जुटी हैं।


​आरोपों की जड़: ट्रांसफर-पोस्टिंग का सिंडिकेट, CLU मंजूरियां और टेंडरों में बंदरबांट
​यह पूरा मामला महज प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि सत्ता की आड़ में चल रहे एक बड़े संगठित खेल के आरोपों से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जांच के दायरे में ये प्रमुख बिंदु हैं:
​तबादलों और तैनातियों का कथित समानांतर रैकेट: राज्य के मलाईदार पदों, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों व पोस्टिंग को प्रभावित करने के लिए बिचौलियों का नेटवर्क तैयार किया गया था।
​सीएलयू (लैंड यूज़ परिवर्तन) और सरकारी मंजूरियां: रियल एस्टेट, कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स और जमीनों से जुड़े सीएलयू सर्टिफिकेट जारी करने में नियमों को ताक पर रखकर वित्तीय लाभ उठाने के आरोप हैं।


​सरकारी टेंडरों में चहेतों को फायदा: राज्य के बड़े विकास कार्यों और सरकारी आपूर्ति के टेंडरों को चुनिंदा फर्मों के पक्ष में मोड़ने और इसके बदले भारी वित्तीय लेनदेन किए जाने के गंभीर इनपुट मिले हैं।
​गोपनीय सरकारी रिकॉर्ड तक अवैध पहुंच: सचिवालय और मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर के संवेदनशील व गोपनीय दस्तावेजों तक अनाधिकृत व्यक्तियों की सीधी पहुंच बनाई गई।
​पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के कड़े रुख और जांच के स्पष्ट निर्देशों के तुरंत बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक्शन मोड में आते हुए यह व्यापक अभियान छेड़ दिया।


​मुख्यमंत्री भगवंत मान का तीखा पलटवार: ‘चुनावी हार के डर से कांप रही केंद्र सरकार’
​कैंप दफ्तर पर केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई की पुष्टि करते हुए खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मोर्चा संभाल लिया है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का सीधा आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला:
​”पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार और जनता के मिल रहे अपार प्यार से विरोधी दल पूरी तरह बौखला गए हैं। जब वे चुनावी और लोकतांत्रिक मैदान में हमारा मुकाबला नहीं कर पा रहे, तो मुख्यमंत्री के कैंप दफ्तर पर छापे मरवाए जा रहे हैं। यह सिर्फ और सिर्फ पंजाब की चुनी हुई जन-सरकार को बदनाम करने और दबाव बनाने की एक घटिया साजिश है। हम शहीद-ए-आजम भगत सिंह के वारिस हैं, इन गीदड़भभकियों और छापों से झुकने या डरने वाले नहीं हैं। पंजाब की जनता सब देख रही है और वक्त आने पर करारा जवाब देगी।”
​इधर, पंजाब सरकार ने कानूनी दांव चलते हुए उच्च न्यायालय के इस जांच आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में विशेष अनुमति याचिका दायर कर फौरी राहत की मांग की है।


​विपक्ष हमलावर: इस्तीफे की मांग, पंजाब में आर-पार की सियासी जंग
​छापेमारी की खबर फैलते ही पंजाब के विपक्षी खेमों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ चौतरफा हमला बोलते हुए कहा है कि ‘ईमानदार राजनीति’ का दावा करने वाली सरकार का असली चेहरा अब जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। विपक्ष ने सीधे मुख्यमंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की है। वहीं, सत्ता पक्ष इसे आगामी चुनावों के मद्देनजर रची गई राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताकर एकजुटता दिखा रहा है।
​चंडीगढ़ न्यूज़ रूम से लेकर मालवा, माझा और दोआबा के तमाम जिलों तक इस वक्त केवल इसी महा-छापेमारी की गूंज है। प्रशासनिक गलियारों में सन्नाटा पसरा है और आने वाले कुछ घंटों में इस मामले में कई अन्य प्रभावशाली चेहरों पर भी शिकंजा कसने की पूरी संभावना जताई जा रही है।


​हर बड़ी सियासी हलचल, प्रशासनिक एक्शन और जमीनी पड़ताल के लिए जुड़े रहिए सिर्फ ‘पंजाब दस्तक’ के साथ।

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