मीनाक्षी, वरिष्ठ पत्रकार — पंजाब दस्तक
शिमला: राजधानी शिमला के ऐतिहासिक लोअर बाजार सहित प्रतिबंधित सड़कों पर अवैध अतिक्रमण और वेंडर्स की मनमानी पर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्य न्यायाधीश एम. एस. रामचंद्र राव (या जे. एस. संधावालिया) और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि सड़कों और फुटपाथों पर बिना किसी रुकावट चलना आम नागरिकों का बुनियादी और मौलिक अधिकार है, जिससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
’एंबुलेंस का रास्ता रोकना जीवन के अधिकार का सीधा हनन’
वर्ष 2022 में लोअर बाजार के भारी अतिक्रमण के चलते एंबुलेंस फंसने की गंभीर घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में मरीज को बिना किसी देरी अस्पताल पहुंचाना अनिवार्य है। अतिक्रमण के कारण आपातकालीन सेवाओं में पैदा होने वाली रुकावट सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।
वेंडर एसोसिएशन के पदाधिकारियों पर कानूनी गाज
अदालत ने नगर निगम की प्रशासनिक कार्रवाई में बाधा पहुंचाने और ‘नो वेंडिंग जोन’ में अवैध कब्जों को बढ़ावा देने वाले वेंडर एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन शर्मा, ओम प्रकाश और अखिलेश तिवारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के दो टूक निर्देश जारी किए हैं।
आजीविका भवन शिफ्टिंग और हर हफ्ते मॉक ड्रिल का हुक्म
नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, 98 तहबाजारियों (वेंडर्स) को आजीविका भवन में शिफ्ट करने का प्रस्ताव है।
प्रशासन की संयुक्त मॉक ड्रिल के बाद आपातकालीन वाहनों की आवाजाही का समय 14 मिनट से घटकर अब मात्र 4 से 5 मिनट रह गया है।
हाई कोर्ट ने प्रशासन को भविष्य में भी हर हफ्ते अनिवार्य रूप से मॉक ड्रिल आयोजित करने और ‘नो वेंडिंग जोन’ को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त रखने का सख्त आदेश दिया है।
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