विशेष रिपोर्ट: सुरेंदर राणा, ब्यूरो चीफ
शिमला : जिंदगी के 30 से 35 साल प्रदेश के विकास और सचिवालय से लेकर दूरदराज के दुर्गम क्षेत्रों में न्यौछावर करने वाले बुजुर्ग आज लाचार होकर अपनी ही गाढ़ी कमाई के लिए सड़कों पर उतरने को विवश हैं। सरकार के लिए इससे बड़ी शर्म की बात क्या होगी कि जिस उम्र में 60 वर्ष से ऊपर के इन बुजुर्गों को अपने घरों में पोते-पोतियों के साथ सुख-चैन से वक्त बिताना चाहिए था, उस उम्र में वे अपने ही हक और सम्मान के लिए हुक्मरानों की चौखट पर धक्के खाने को मजबूर हैं। हिमाचल प्रदेश के 2 लाख पेंशनरों के सब्र का पैमाना छलक चुका है। सरकार द्वारा एरियर अधिसूचना में किए गए आंशिक संशोधन के बावजूद पेंशनरों का आक्रोश शांत नहीं हुआ है, क्योंकि पेंशनरों को तीन वर्गों में बांटने की विभाजनकारी नीति अब भी बरकरार है। संयुक्त संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि 1 सितंबर को राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान में विधानसभा का ऐतिहासिक महाघेराव होकर रहेगा।
तीन श्रेणियों में बांटने से पेंशनरों में भारी नाराजगी
हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव इंद्रपाल शर्मा और 18 कर्मचारी-पेंशनर संगठनों के अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने संयुक्त रूप से कहा कि सरकार ने भले ही अधिसूचना में मामूली बदलाव कर खानापूर्ति की कोशिश की हो, लेकिन प्रदेश के पेंशनर इससे कतई संतुष्ट नहीं हैं।
इतिहास में पहली बार सेवानिवृत्ति के बाद सभी कर्मचारियों को एक समान मानने की स्थापित परंपरा को दरकिनार कर सरकार ने क्लास-1, क्लास-2 और क्लास-3 के आधार पर पेंशनरों का वर्गीकरण कर दिया है। संघर्ष समिति का सीधा सवाल है कि रिटायरमेंट के बाद यह तीन वर्गों का बंटवारा और भेदभाव क्यों? जब तक सभी पेंशनरों को एक समान नजरिए से पूरा एरियर और वित्तीय लाभ नहीं मिलता, यह लड़ाई नहीं थमेगी।
13 मई 2023 का वादा भूली सरकार: 2016-22 के पेंशनरों का क्या दोष?
महासचिव इंद्रपाल शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 13 मई 2023 की बैठक में जो वादे किए थे, उन्हें पूरा न कर प्रदेश के 2 लाख पेंशनरों के साथ सीधा धोखा और विश्वासघात किया गया है। समिति ने तीखा सवाल उठाया कि वर्ष 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों का क्या कसूर था कि उन्हें ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और कम्यूटेशन के बकाए से लगातार वंचित रखा जा रहा है?
समिति ने आह्वान किया कि अब केवल एकजुटता ही एकमात्र रास्ता है। 1 सितंबर को सुबह 11:00 बजे से पहले हजारों की संख्या में पेंशनर शिमला के ऐतिहासिक चौड़ा मैदान में एकत्रित होकर इस गूंगी-बहरी सरकार के खिलाफ आर-पार का शंखनाद करेंगे।
संशोधित आदेश की स्थिति: राहत के साथ कई सवाल बरकरार
पेंशनरों के दबाव के बाद वित्त विभाग ने 18 अगस्त के कार्यालय ज्ञापन में जो संशोधन किए हैं, उसकी स्थिति इस प्रकार है:
पैरा-2 हटाया गया: सरकार ने कार्यालय ज्ञापन के पैरा-2 को पूरी तरह ओमिट (हटा) कर दिया है, जो उन पेंशनरों के लिए जरूरी था जिनकी भुगतान प्रक्रिया पूर्व ज्ञापनों के तहत चल रही थी।
अधिकतम सीमा में बदलाव: संबंधित श्रेणी में पेंशन की अधिकतम सीमा ₹1,12,050 और पारिवारिक पेंशन की अधिकतम सीमा ₹67,230 तय की गई है।
अंडरटेकिंग पर एरियर: जिनकी वास्तविक बेसिक पेंशन निर्धारित सीमा से अधिक है, उनसे केवल एक अंडरटेकिंग (Undertaking) लेकर एरियर जारी करने का प्रावधान किया गया है।
बैंकों व PDAs की जिम्मेदारी: पेंशन वितरण प्राधिकरणों और बैंकों को 17 सितंबर 2022, 13 मार्च 2024 और 18 अगस्त 2026 के ज्ञापनों के अनुसार सही गणना कर भुगतान की जिम्मेदारी दी गई है।
खाते में कितनी राशि आएगी?: यह आदेश 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच रिटायर हुए कर्मचारियों पर लागू होगा, लेकिन व्यक्तिगत रूप से खाते में कितना पैसा और किस चरण में आएगा, इसे लेकर असमंजस अभी भी बना हुआ है।
1 सितंबर को चौड़ा मैदान में संघर्ष रहेगा जारी
संयुक्त संघर्ष समिति ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि कागजी अधिसूचनाओं और टुकड़ों में दिए जाने वाले आदेशों से 2 लाख पेंशनर बहकावे में नहीं आएंगे। जब तक 2016 से 2022 का पूरा सेवाकाल एरियर, ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और समान अधिकार बहाल नहीं होते, तब तक 1 सितंबर का विधानसभा घेराव और आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।
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