पंजाब दस्तक (विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ):
शिमला: हिमाचल प्रदेश सचिवालय, शिमला में प्रशासनिक कामकाज को अधिक सुगम, आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सचिवालय परिसर में नवनिर्मित अत्याधुनिक ‘एनर्जी फेज-2’ (Energy Phase-2) भवन का विधिवत पूजा-अर्चना के बाद लोकार्पण किया और अपने नए कार्यालय में कार्यभार संभाल लिया। उल्लेखनीय है कि इस महत्वपूर्ण परियोजना का शिलान्यास भी मुख्यमंत्री द्वारा 6 अप्रैल 2025 को किया गया था।
उद्घाटन समारोह में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, आयुष एवं खेल मंत्री यादविंद्र गोमा सहित मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति विशेष रूप से उपस्थित रहे।

परियोजना की रूपरेखा एवं मुख्य बिंदु
स्वीकृति एवं लागत: परियोजना की औपचारिक प्रशासनिक स्वीकृति (A&A) प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) के पत्र संख्या Pr-1&2-F(50)-1/2023 (दिनांक 17-08-2024) के तहत ₹1972.19 लाख (लगभग ₹19.72 करोड़) की अनुमानित लागत से जारी की गई थी। निर्माण कार्य पूर्ण होने पर इसकी कुल लागत लगभग ₹20 करोड़ आई है।
भवन की संरचना: छह मंजिला इस आधुनिक भवन का कुल निर्मित क्षेत्र 3635.68 वर्ग मीटर है। भवन में तीन मंजिलें विशेष रूप से पार्किंग के लिए, दो मंजिलें उच्च स्तरीय प्रशासनिक कार्यालयों के लिए तथा एक मंजिल स्टोर व चालक कक्ष के लिए निर्धारित की गई हैं।
भवन में उपलब्ध सुविधाएं एवं तल-वार विवरण (Details of Accommodation)
बेसमेंट (288.64 वर्ग मीटर): रिकॉर्ड स्टोर एवं ड्राइवर रूम्स की व्यवस्था।
ग्राउंड फ्लोर (534.38 वर्ग मीटर): सुव्यवस्थित वाहन पार्किंग सुविधा।
प्रथम तल (680.61 वर्ग मीटर): वाहन पार्किंग सुविधा।
द्वितीय तल (680.61 वर्ग मीटर): वाहन पार्किंग सुविधा।
तृतीय तल (774.12 वर्ग मीटर): सचिवालय अधिकारियों के कार्यालय, आगंतुकों के लिए वेटिंग एरिया एवं आधुनिक कॉन्फ्रेंस हॉल।
चतुर्थ तल (677.32 वर्ग मीटर): सचिवालय अधिकारियों के कार्यालय, विशेष मीटिंग हॉल एवं उच्च स्तरीय कॉन्फ्रेंस हॉल।
कुल निर्मित क्षेत्र: 3635.68 वर्ग मीटर।
उद्घाटन के उल्लास के बीच अव्यवस्था और बंद दरवाजों ने खड़े किए सवाल
सचिवालय में उद्घाटन के दौरान सुबह से ही भारी चहल-पहल थी और प्रदेश भर से बड़ी संख्या में आगंतुक व लोग भी पहुंचे हुए थे। परंपरा अनुसार जब भी किसी भवन या कार्यालय का उद्घाटन होता है, तो शुभ अवसर पर सभी द्वार खुले रखे जाते हैं। परंतु यहां स्थिति बिल्कुल विपरीत देखने को मिली। बाहर तो उद्घाटन की औपचारिकता पूरी कर ली गई, लेकिन जिस मुख्य कक्ष में माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने बैठना था, उसी कक्ष का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया गया।
हालात यह रहे कि पूजा-पाठ के बाद जब कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी अंदर जाने लगे, तो सुरक्षा के कड़े घेरे के चलते स्वयं मंत्रियों तक को भीतर प्रवेश करने में परेशानी का सामना करना पड़ा। मंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों को काफी मशक्कत के बाद अंदर जाने दिया गया। मौके पर मौजूद लोगों और आगंतुकों के बीच यह चर्चाएं और कयास शुरू हो गए कि क्या भवन अभी पूरी तरह तैयार नहीं था या फिर जल्दबाजी में अधूरा उद्घाटन कर दिया गया।
प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठे कि सुरक्षा प्रोटोकॉल ठीक है, लेकिन ऐसे सार्वजनिक व ऐतिहासिक मौके पर व्यवस्था समन्वय के साथ होनी चाहिए थी। सबसे बड़ी बात यह रही कि मीडिया और पत्रकारों तक को मुख्यमंत्री कक्ष की ओर जाने से रोक दिया गया। प्रदेश के 12 जिलों की जनता, जो शिमला नहीं पहुंच सकती, वह मीडिया और पंजाब दस्तक के लाइव प्रसारण के जरिए अपने मुख्यमंत्री के नए कार्यालय को देखना चाहती थी। लेकिन दरवाजे बंद होने के कारण जनता तक यह सीधा दृश्य नहीं पहुंच सका। बाहर मौजूद लोगों में भी इस बात को लेकर खासी नाराजगी देखने को मिली।
तमाम बंदिशों और चर्चाओं के बावजूद, हकीकत यह है कि आज प्रदेश के मुख्यमंत्री को नया, सुसज्जित कार्यालय मिल चुका है, जहां वे बैठकर राज्य के विकास की रूपरेखा तय करेंगे। इसी भवन में मुख्य सचिव महोदय का कार्यालय और पार्किंग की आधुनिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
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