हिमाचल प्रदेश के पेंशनरों का 1 सितंबर को विधानसभा महाघेराव और विरोध प्रदर्शन

जिस उम्र में पोते-पोतियों संग घर पर बिताना था वक्त, उस उम्र में सड़कों पर हक मांगने को मजबूर 60 पार बुजुर्ग: 1 सितंबर को चौड़ा मैदान में गरजेंगे 2 लाख पेंशनर, विधानसभा महाघेराव का खुला एलान

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​विशेष रिपोर्ट: सुरेंदर राणा, ब्यूरो चीफ
शिमला : जिंदगी के 30 से 35 साल प्रदेश के विकास और सचिवालय से लेकर दूरदराज के क्षेत्रों में सेवा देने वाले बुजुर्ग आज लाचार होकर अपनी ही गाढ़ी कमाई के लिए सड़कों पर उतरने को विवश हैं। सरकार के लिए इससे बड़ी शर्म की बात क्या होगी कि जिस उम्र में 60 वर्ष से ऊपर के इन बुजुर्गों को अपने घरों में पोते-पोतियों के साथ सुख-चैन से वक्त बिताना चाहिए था, उस उम्र में वे अपने ही हक और सम्मान के लिए हुक्मरानों की चौखट पर धक्के खाने को मजबूर हैं। हिमाचल प्रदेश के 2 लाख पेंशनरों के सब्र का पैमाना अब छलक चुका है और उन्होंने सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ आर-पार के संग्राम का बिगुल फूंक दिया है।


​13 मई 2023 का वादा भूली सरकार, 1 सितंबर को शिमला में महाघेराव
हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव इंद्रपाल शर्मा और 18 कर्मचारी-पेंशनर संगठनों के अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने संयुक्त रूप से राज्य सरकार पर गंभीर विश्वासघात का आरोप लगाया है। महासचिव इंद्रपाल शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 13 मई 2023 की बैठक में जो वादे किए थे, उन्हें पूरा न कर प्रदेश के 2 लाख पेंशनरों के साथ सीधा धोखा किया गया है।


​उन्होंने प्रदेश भर के पेंशनरों से पुरजोर आह्वान करते हुए कहा कि अब केवल एकजुटता ही एकमात्र विकल्प है। 1 सितंबर को सुबह 11:00 बजे से पहले हजारों की संख्या में पेंशनर शिमला के ऐतिहासिक चौड़ा मैदान में एकत्रित हों। वहां से एक विशाल रैली निकाल कर इस गूंगी-बहरी और पेंशनर विरोधी सरकार के खिलाफ विधानसभा का ऐतिहासिक महाघेराव किया जाएगा।


​2016 से 2022 के बीच रिटायर हुए कर्मचारियों का क्या दोष?
संघर्ष समिति ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि वर्ष 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों का आखिर क्या कसूर था कि उन्हें ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और कम्यूटेशन के बकाए से पूरी तरह वंचित कर दिया गया?
​अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा ने 18 अगस्त 2026 की अधिसूचना को विसंगतियों का पुलिंदा करार देते हुए कहा:
​₹40,000 का राइडर लगाकर की गई कटौती: 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर क्लास-3 पेंशनर्स को 35% भुगतान का वादा किया गया था, लेकिन अधिसूचना में ₹40,000 बेसिक पेंशन की शर्त लगाकर इसे मात्र 15% के दायरे में समेट दिया गया। इससे 20% पेंशनरों को भारी आर्थिक चपत लगेगी।


​मूल वेतन का वास्तविक एरियर नदारद: 2016 से 2020 के सेवाकाल के संशोधित वेतनमान के तहत बनने वाले लाखों रुपये के वास्तविक एरियर का अधिसूचना में कोई अता-पता नहीं है।
​पेंशनरों में भेदभावपूर्ण वर्गीकरण: इतिहास में पहली बार सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को एक समान मानने की परंपरा को तोड़कर क्लास-1, 2 और 3 में बांटने का विभाजनकारी काम किया गया है।
​पेंशनर्स संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि 21 अगस्त से शुरू हुए विधानसभा सत्र के दौरान विरोध जारी रहेगा और 1 सितंबर के विधानसभा घेराव के साथ यह आंदोलन निर्णायक मोड़ लेगा।


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