विशेष इनसाइड रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ)
पंजाब दस्तक
पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों का मिलकर सामना करेंगी दोनों सरकारें, शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों की पटकथा तैयार
जम्मू-कश्मीर का ‘डिजिटल विंग’ और ‘तबादला फॉर्मूला’ भाया; दोनों राज्य मिलकर बच्चों को देंगे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बढ़ाएंगे युवाओं की रोजगार क्षमता
शिमला: पहाड़ी राज्यों में सरकारी शिक्षा की तस्वीर बदलने और इसे सीधे रोजगार से जोड़ने के लिए हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की सरकारों ने अब तक की सबसे बड़ी साझी मुहिम का शंखनाद कर दिया है। हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने अपने जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान वहां के मुख्यमंत्री डॉ. उमर अब्दुल्ला और शिक्षा मंत्री सकीना मसूद इटू से एक बेहद उच्च स्तरीय और रणनीतिक मुलाकात की।
शिमला मुख्यालय से लेकर श्रीनगर सचिवालय तक इस ‘महामंथन’ की गूंज है। इस विशेष बैठक में दोनों राज्यों के आला अधिकारियों की मौजूदगी में इस बात पर मुहर लगी कि अब लकीर के फकीर बने रहने के बजाय सरकारी स्कूलों को हाईटेक और पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा।

एक जैसी भौगोलिक जंग, अब मिलकर निकलेगा हल
इस विशेष बैठक का मुख्य एजेंडा दोनों राज्यों की एक समान पहाड़ी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां रहीं। भारी बर्फबारी, दूरदराज के दुर्गम इलाकों में स्कूलों का संचालन और वहां स्टाफ की कमी जैसी परेशानियां दोनों ही जगह एक जैसी हैं।
अब तक दोनों राज्य अपनी इस लड़ाई को अकेले लड़ रहे थे, लेकिन इस ऐतिहासिक मुलाकात के बाद दोनों सरकारों ने साफ कर दिया है कि वे एक-दूसरे के ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ (बेहतरीन अनुभवों) और सफल मॉडलों को आपस में साझा करेंगे। मकसद साफ है—गांव और पहाड़ों के आखिरी छोर पर बैठे बच्चे को भी कॉन्वेंट जैसी क्वालिटी एजुकेशन (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) की ताकत मिले।
J&K का ‘स्मार्ट गवर्नेंस’ मॉडल हिमाचल में होगा लागू!
इस महामंथन के दौरान जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा स्कूली शिक्षा में लागू की गई ऑनलाइन निगरानी प्रणाली (Online Monitoring System) पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई और इसके अनुभवों को विस्तार से साझा किया गया। इस डिजिटल तकनीक से स्कूलों की रोजाना की गतिविधियों, पढ़ाई के स्तर और शिक्षकों की उपस्थिति पर सीधे सचिवालय से लाइव नजर रखी जाती है।
इसके साथ ही, जम्मू-कश्मीर में शिक्षकों के लिए तैयार की जा रही पारदर्शी तबादला नीति (Transparent Transfer Policy) के जमीनी अनुभवों को भी गहराई से समझा गया। हिमाचल के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने इस पारदर्शी व्यवस्था में खास दिलचस्पी दिखाई है। सूत्रों की मानें तो हिमाचल प्रदेश भी अपने यहां के ट्रांसफर सिस्टम को पूरी तरह मानवीय दखल से मुक्त और ऑनलाइन करने के लिए इस मॉडल का इस्तेमाल कर सकता है, जिससे बार-बार होने वाले प्रशासनिक फेरबदल पर लगाम लगेगी।
सिर्फ डिग्री नहीं, रोजगार की गारंटी बनेगी स्कूली पढ़ाई
इस बैठक का सबसे क्रांतिकारी फैसला युवाओं की रोजगार क्षमता (Employability) को बढ़ाने को लेकर हुआ। दोनों सरकारों ने इस कड़वी हकीकत को स्वीकार किया कि सिर्फ पारंपरिक किताबी ज्ञान से युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।
लिपिबद्ध किए गए नए विजन के तहत, दोनों राज्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने और युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने पर पूरी तरह सहमत हो गए हैं। दोनों राज्यों के शिक्षा बोर्ड अब पाठ्यक्रम को इस तरह से नए सिरे से डिजाइन (Skill-Based Curriculum) करने जा रहे हैं, ताकि स्कूली पढ़ाई पूरी करते ही युवाओं के हाथ में हुनर हो और उन्हें रोजगार के लिए दर-दर न भटकना पड़े।
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