कांगड़ा, ओमांश: क्षय रोग (टीबी) के इलाज को पूरा कराने में मरीजों को दो-दो साल का इंतजार करना पड़ता था, और हैवी डोज वाली मेडिसिन लेनी पड़ती थी। अब मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी की एमडीआर टीबी से पीडि़त मरीजों का छह माह में बीपीएएलएम दवाई से इलाज हो सकेगा। टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 के लिए बीपीएएलएम सबसे कारगर हथियार बनकर उभरा है। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में बीपीएलएएम को सभी जिलों में सूचारू रूप से किया जा रहा है।
जिससे अब छह माह में ही रोगी दुरूस्त होकर सामान्य जीवन में लौट सकेंगे। हिमाचल प्रदेश में इस बार कुल 15 हज़ार 257 टीबी के रोगी सामने आए हैं, जिनका उपचार चल रहा है। हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों के क्षय केंद्र पर बीपीएएलएम रेजिमेन तकनीक से मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है।चार दवाइयों का मिश्रणजिला स्वास्थ्य अधिकारी कांगड़ा डा. आरके सूद ने बताया कि बीपीएएलएम रेजिमेन तकनीक चार दवाओं का कॉम्बिनेशन है। इसमें बेडाक्विलाईन, प्रीटोमैनिड (नई दवा), लाईनजोलिड, मॉक्सीफ्लोक्सासिन जैसी दवा शामिल हैं। यह दवाएं मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी के संक्रमण को कम करने में मदद करती है। इस दवा को केवल छह माह खाने की जरूरत होती है। इसके साइड इफेक्ट भी बहुत कम हैं।
