सब्जी मंडी से मोहल्ले की दुकान तक लूट का खेल: बिचौलियों की चांदी, जनता बेहाल

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पंजाब दस्तक
​सब्जी मंडी से मोहल्ले की दुकान तक लूट का खेल: बिचौलियों की चांदी, जनता बेहाल
​ब्यूरो चीफ, सुरेंद्र राणा
​हिमाचल प्रदेश:
हिमाचल प्रदेश की सब्जी मंडियों में इन दिनों जो ‘दामों का मायाजाल’ बुना जा रहा है, उसने आम आदमी की रसोई का बजट हिला कर रख दिया है। ताजा सर्वे में यह चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है कि थोक मंडी और मोहल्ले की रिटेल दुकानों के रेट में जमीन-आसमान का अंतर है। पूरे हिमाचल की जनता अब यह मांग कर रही है कि प्रशासनिक अधिकारी केवल दफ्तरों में न बैठें, बल्कि जड़ तक जाकर इस मुनाफाखोरी को रोकें।
​रेट का बड़ा अंतर: कहाँ कितनी लूट?
​बाजार की जमीनी हकीकत कुछ इस प्रकार है:
​फूलगोभी का खेल: थोक मंडी में जो फूलगोभी ₹15 से ₹20 प्रति किलो के भाव बिक रही है, वही आपके मोहल्ले की दुकान तक पहुँचते-पहुँचते ₹50 से ₹55 प्रति किलो हो जाती है। यानी बीच का मोटा मुनाफा बिचौलियों और मुनाफाखोरों की जेब में जा रहा है।
​मटर व अन्य सब्जियां: मटर और अन्य हरी सब्जियों का भी यही हाल है। थोक भाव और रिटेल के बीच 50% से ज्यादा का नाजायज अंतर है, जिससे न किसान खुश है और न ही खरीदार।
​फलों की स्थिति: सेब और अन्य मौसमी फलों की मंडियों में आवक भरपूर है, लेकिन बिचौलिए अंतरराष्ट्रीय संकटों और लड़ाई का झूठा बहाना बनाकर कृत्रिम महंगाई का ‘भंडारा’ रच रहे हैं।
​बिचौलियों की मनमानी और प्रशासन की चुप्पी:
हकीकत में बाजार में माल की कोई कमी नहीं है, सब कुछ सामान्य है। लेकिन बिचौलिए और कुछ बड़े दुकानदार इस स्थिति का नाजायज फायदा उठा रहे हैं। वे किसान से तो कौड़ियों के भाव माल उठाते हैं, लेकिन जनता को ‘महंगाई’ का डर दिखाकर ऊँचे दामों पर बेच रहे हैं। इस अंधेरगर्दी से न केवल जनता लुट रही है, बल्कि सरकार की छवि भी खराब हो रही है।
​जनता की सीधी मांग—फील्ड में उतरें अधिकारी:
जनता का स्पष्ट कहना है कि संबंधित विभागों के इंस्पेक्टर और प्रशासनिक अधिकारी मंडियों और दुकानों का औचक निरीक्षण करें। जब तक अधिकारी मौके पर जाकर रेट लिस्ट की जांच नहीं करेंगे और यह पता नहीं लगाएंगे कि आखिर थोक से रिटेल तक पहुँचते ही दाम ढाई गुना कैसे हो जाते हैं, तब तक यह लूट तंत्र ध्वस्त नहीं होगा।
​प्रशासन को चाहिए कि वह इस मुनाफाखोरी की जड़ तक जाए और उन लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करे जो जनता की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। पंजाब दस्तक जनता की इस जायज आवाज को प्रमुखता से उठा रहा है ताकि सोए हुए तंत्र को जगाया जा सके और आम आदमी को इस ‘दामों के ड्रामे’ से निजात मिल सके।

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