पंजाब दस्तक
🚨 बड़ी खबर: शिमला में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नाम पर जनता से धोखा? टैक्स और कूड़ा शुल्क में भारी बढ़ोतरी, लेकिन सुविधाओं के नाम पर सड़कों पर कचरा और टूटी सड़कें 🚨
— सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ
शिमला: हिमाचल प्रदेश में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दावों के बीच नगर निगम ने जनता पर टैक्स का भारी बोझ तो डाल दिया है, लेकिन धरातल पर सुविधाएं पूरी तरह दम तोड़ चुकी हैं। आगामी 1 अप्रैल से हाउस टैक्स में 8.3% की वृद्धि और कूड़ा शुल्क में 10% का इजाफा होने जा रहा है। पर बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल शुल्क बढ़ाना ही व्यवस्था सुधार है? शिमला की 12 कूड़ा गाड़ियों में से 8 गाड़ियां खराब खड़ी हैं, जिससे कचरा प्रबंधन का ढांचा ढह गया है।
हैरानी की बात यह है कि घरों से कूड़ा उठाने वाले कर्मचारी कचरा लेकर उसे ठिकाने लगाने के बजाय सड़कों के किनारे ही ढेर कर देते हैं। इसके बाद बंदर और आवारा कुत्ते उस कूड़े को पूरी सड़क पर बिखेर देते हैं, जिससे गंदगी और बीमारियां फैल रही हैं। क्या प्रशासन को टैक्स बढ़ाने से पहले नई गाड़ियां और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित नहीं करना चाहिए था? इसके अलावा, सड़कों की हालत भी बदतर है; महावीर नगर कॉलोनी, महावीर घाटी, छोटा शिमला और कृष्णा नगर की सड़कें आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं। एक तरफ कमेटी किराया और टैक्स वसूल रही है, तो दूसरी तरफ जनता गंदगी और टूटी सड़कों के बीच रहने को मजबूर है। शिमला की जनता और सरकार के नुमाइंदे आज पूछ रहे हैं—क्या यही है आपका ‘व्यवस्था परिवर्तन’? आखिर जनता कब तक और क्यों इस अव्यवस्था का खामियाजा भुगतेगी?
