हिमाचल में बनी 72 दवाएं खाने लायक नहीं, CDSCO की ताजा ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में खुलासा

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शिमला, सुरेंद्र राणा: देशभर में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ताजा पड़ताल में देश में निर्मित कुल 194 दवाएं और मेडिकल उत्पाद गुणवत्ता के मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इस फेहरिस्त में हिमाचल प्रदेश के 52 दवा उद्योगों में निर्मित 72 दवाएं और उत्पाद भी शामिल है। यह खुलासा फरवरी माह की ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में हुआ है, जिसने विशेषकर बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ समेत कालाअंब, पांवटा साहिब, ऊना, कांगड़ा और सोलन जैसे प्रमुख फार्मा क्लस्टर्स की गुणवत्ता व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच में सामने आया है कि दवाओं के फेल होने के पीछे कई तकनीकी खामियां जिम्मेदार हैं। कई सैंपलों में दवा की निर्धारित मात्रा मानक से कम या ज्यादा पाई गईए कुछ दवाएं घुलनशीलता टेस्ट में असफल रहीं, तो कुछ में स्टेरिलिटी और माइक्रोबियल कंटैमिनेशन की गंभीर समस्याएं सामने आईं।

राज्य दवा नियंत्रक डा. मनीष कपूर ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सैंपलिंग की संख्या अन्य राज्यों की तुलना में अधिक रखी गई है। यही कारण है कि यहां से फेल सैंपलों की संख्या भी ज्यादा दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल देश का सबसे बड़ा फार्मा हब है, जहां बड़े स्तर पर दवा उत्पादन होता है, इसलिए निगरानी भी व्यापक स्तर पर की जाती है, जिन दवाओं के सैंपल फेल पाए जाते हैं, उनका उत्पादन तुरंत बंद करवाया जाता है और संबंधित कंपनियों को शो.कॉज नोटिस जारी कर जवाब लिया जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाती है।ये दवाइयां फेलएम्ब्रोक्सोल, टरब्यूटालिन व ग्वाइफेनेसिन सिरपय डेक्स्ट्रोमेथॉर्फन, फिनाइलएफ्रिन व क्लोरफेनिरामाइन सिरप, आयरन व फोलिक एसिड सिरप, खांसी-जुकाम व एलर्जी की अन्य सिरप, एसीक्लोफेनाक व पैरासिटामोल टैबलेट, इबुप्रोफेन व पैरासिटामोल टैबलेट, पैरासिटामोल टैबलेट एएमोक्सिसिलिन व क्लैवुलैनिक एसिड दवा, सेफ्यूरॉक्सिम, सेफपोडॉक्सिम व सेफ्ट्रियाक्सोन एंटीबायोटिक, टेल्मिसार्टन (बीपी की दवा), एम्लोडिपिन व एटेनोलोल टैबलेट, पैंटोप्राजोल, रैबेप्राजोल व डोम्पेरिडोन संयोजन दवाएं, मेटफॉर्मिन व ग्लाइमिप्राइड (डायबिटीज दवा), प्रेगाबालिन व गैबापेंटिन (नर्व संबंधी दवाएं), कैल्शियम व विटामिन डी सस्पेंशन, लाइकोपीन, जिंक व मल्टीविटामिन कैप्सूल/टैबलेट, ट्रानेक्सेमिक एसिड इंजेक्शन, रैबेप्राजोल इंजेक्शन, अन्य एंटीबायोटिक इंजेक्शन शामिल है।

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