शिमला, सुरेंद्र राणा: आर्थिक संकट झेल रही कांग्रेस सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमत पांच रुपए प्रति लीटर तक बढ़ाने का फैसला लिया है। इसको लेकर विधानसभा में बिल लाकर उसे पास कर दिया गया है। राज्य सरकार अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए रेगुलर इनकम जुटाने के उद्देश्य से ‘अनाथ और विधवा उपकर’ की बात कह रही है।मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया। आज इस विधेयक पर चर्चा हुई और विपक्ष के जोरदार विरोध के बावजूद इसे पारित कर दिया गया। विपक्ष इस बढ़ोतरी को पहले ही मंहगाई से जूझ रही जनता के लिए अनावश्यक बोझ बता रही है।विपक्ष का कहना है कि इस बढ़ोतरी से डीज़ल 90 रुपए से ज्यादा और पेट्रोल 100 रुपए पहुंच जाएगा जो पड़ोसी राज्यों के मुकाबले ज़्यादा हो जाएगा। हिमाचल प्रदेश में पहले ही पेट्रोल में 17 फीसदी और डीज़ल पर 13.9 फीसदी टैक्स है। पांच रुपए बढ़ाने के बाद लोगों की कमर टूट जाएगी। जो परिस्थितियां विश्व में चल रही है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती है, ऐसे में पांच रूपए सेस लगाना उचित नहीं। इससे पहले ही सरकार 7 रूपये पेट्रोल डीज़ल पर बढ़ा चुकी है। विपक्ष ने अनाथ और विधवा के नाम वाले शब्दों पर भी आपत्ति ज़ाहिर की।विपक्ष का कहना है कि इसका असर न केवल आम आदमी बल्कि किसानों और हर साल हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर आने वाले 3 करोड़ से अधिक टूरिस्ट पर भी पड़ेगा। खाद्य वस्तुओं के दाम में इजाफा और पहाड़ों पर घर बनाना महंगा हो जाएगा। एक साथ पांच रुपए प्रति लीटर की कीमत बढ़ने से निर्माण सामग्री, सेब और किसानों की फसलों की ढुलाई के साथ साथ बस किराए में भी इजाफा हो सकता है। पड़ोसी राज्यों से कोई अब हिमाचल में तेल नहीं खरीदेगा जिससे हिमाचल को नुक्सान होगा। बिल से नाराज विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार का लक्ष्य समाज के कमजोर तबकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। हम विधवा और अनाथ बच्चों के लिए कुछ कर रहे हैं तो भाजपा इसका विरोध कर रही है। केन्द्र 27 रुपए डीज़ल पेट्रोल पर सेस लेती है। हमारे पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा में अभी भी दो रुपए पेट्रोल डीज़ल मंहगा हैं। हिमाचल में अभी भी इन राज्यों से ये सस्ता होगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने विपक्ष को सलाह दी कि केन्द्र में जाकर RDG की बहाल करने और सेस कम करने की मांग करें।यह उपकर उसी दिशा में एक ठोस पहल है, जिससे जरूरतमंदों को निरंतर सहायता मिल सकेगी। सरकार का दावा है कि इस सेस से जुटाई गई पूरी राशि अनाथ एवं विधवा वेलफेयर फंड में जमा होगी। इस फंड का उपयोग सीधे जरूरतमंदों की सहायता और कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार में किया जाएगा।बाइट,,,, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू।सदन में विधेयक के पारित होने के बाद इसे मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिलते ही यह कानून बनकर लागू हो जाएगा। इसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि तय है। विरोधस्वरूप विपक्ष सदन से बाहर आ गया।
