पंजाब दस्तक: विशेष रिपोर्ट,सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफहिमाचल में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का ऐतिहासिक प्रहार: क्या सरकारी गाड़ियों के ‘तेल-पानी’ पर लगेगा ब्रेक? मंत्रियों के काफिले और पायलट गाड़ियों पर भी चल सकती है कैंची
शिमला। हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू एक ऐसा ‘कड़वा और साहसिक’ फैसला लेने जा रहे हैं, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देगी। विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि मुख्यमंत्री जल्द ही प्रदेश में सप्ताह में एक दिन (संभवतः सोमवार) सरकारी गाड़ियों के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगाने का बड़ा कदम उठा सकते हैं। यह फैसला न केवल करोड़ों रुपये के ईंधन की बचत करेगा, बल्कि जनता के बीच ‘सादगी’ का एक बड़ा संदेश भी देगा।क्यों जरूरी है यह कड़ा फैसला? (आर्थिक तथ्य)हिमाचल प्रदेश इस समय गहरे वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है। तथ्यों पर नजर डालें तो स्थिति काफी गंभीर है:1.40 लाख करोड़ का भारी कर्ज: प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़कर 1.40 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है।राजस्व घाटा ग्रांट (RDG) में कटौती: केंद्र से मिलने वाली लगभग 10,000 करोड़ रुपये की सालाना ग्रांट (RDG) में भी बड़ी कटौतियां हो रही हैं, जिससे राज्य की आर्थिकी पर भारी दबाव है।ऐसे में मुख्यमंत्री का यह कदम सरकारी खजाने से होने वाली फिजूलखर्ची को रोकने के लिए ‘संजीवनी’ साबित हो सकता है।सरकारी खजाने पर बोझ: काफिले और पायलट गाड़ियों पर प्रहारमुख्यमंत्री का यह मास्टर स्ट्रोक केवल सामान्य सरकारी गाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगा। सूत्रों के अनुसार, इस योजना के दायरे में मंत्रियों के साथ चलने वाला भारी-भरकम काफिला और पायलट गाड़ियां (Escort Vehicles) भी आ सकती हैं:काफिले का खर्च: मंत्रियों के साथ चलने वाली गाड़ियों और पायलट सुरक्षा के ईंधन व रखरखाव पर हर महीने लाखों रुपये खर्च होते हैं।वीआईपी कल्चर पर लगाम: मुख्यमंत्री का मानना है कि सप्ताह में एक दिन बिना ताम-झाम के चलना न केवल पैसे बचाएगा, बल्कि जनता से जुड़ाव भी बढ़ाएगा।ऐतिहासिक फैसला: क्या सुक्खू दोहराएंगे इतिहास?हिमाचल में पहले पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार जी जैसे नेताओं ने कड़े और अनुशासित फैसले लिए हैं। अब मुख्यमंत्री सुक्खू, जो खुद ई-व्हीकल (E-Vehicle) अपनाकर मिसाल पेश कर चुके हैं, इस ‘गाड़ी बंदी’ के विचार से ‘व्यवस्था परिवर्तन’ को धरातल पर उतारने की तैयारी में हैं।पंजाब दस्तक के दर्शकों का जबरदस्त समर्थनपंजाब दस्तक के माध्यम से जब इस संभावित फैसले की चर्चा आम जनता के बीच पहुंची, तो इसे ‘ऐतिहासिक’ बताया गया। दर्शकों का मानना है कि जब प्रदेश कर्ज के बोझ तले दबा हो, तो मंत्रियों के काफिले और सरकारी गाड़ियों के बेतहाशा बिलों पर लगाम लगाना ही असली ‘राजधर्म’ है। जनता इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रही है क्योंकि इससे सड़कों पर लगने वाले ‘वीआईपी ट्रैफिक’ से भी राहत मिलेगी।
