शिमला, सुरेन्द्र राणा: कांगड़ा के 47 वर्षीय अनुराग शर्मा ने हिमाचल प्रदेश से खाली हुई इकलौती राज्यसभा सीट के लिए नामांकन भर दिया है। किसी अन्य उम्मीदवार के मैदान में न होने के कारण उनका राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है। इसे लेकर मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने प्रतिक्रिया दी है। नरेश चौहान ने कहा कि राज्यसभा के लिए उम्मीदवार का फैसला पार्टी हाईकमान करता है और अनुराग शर्मा के रूप में एक आम कार्यकर्ता को मौका दिया गया है।नरेश चौहान ने कहा कि एक सामान्य कार्यकर्ता का राज्यसभा तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि पार्टी में कार्यकर्ताओं को सम्मान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जिला कांग्रेस अध्यक्षों को भी ताकत दे रहे हैं और इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को यह संदेश जा रहा है कि एक आम वर्कर भी संगठन में आगे बढ़कर बड़े पदों तक पहुंच सकता है।उन्होंने कहा कि दो साल पहले जैसी परिस्थितियां इस बार नहीं बनी हैं। नरेश चौहान ने खरीद-फरोख्त की राजनीति के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पिछली बार छह विधायक कांग्रेस के टिकट पर जीतने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी में चले गए थे और उस समय सत्ता का दुरुपयोग किया गया था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र संख्या बल के आधार पर चलता है और इसी वजह से इस बार भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा।वहीं डिजास्टर एक्ट हटने के बाद पंचायत चुनाव को लेकर भी मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने सरकार की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पंचायत चुनाव करवाने के लिए पूरी तरह तैयार है और 30 मई तक सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी।नरेश चौहान ने कहा कि पंचायत चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं होते हैं, इसलिए यह पूरी तरह स्थानीय स्तर का लोकतांत्रिक चुनाव होता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा किए गए प्रयासों को जनता सराहेगी।उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां जनता के सामने स्पष्ट और पारदर्शी हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बनने जा रहा है जो दूध को न्यूनतम मूल्य देने की व्यवस्था लागू करेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का मुख्य ध्येय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है और इसकी झलक आने वाले बजट में भी देखने को मिलेगी।नरेश चौहान ने कहा कि जब वर्तमान सरकार सत्ता में आई थी तब प्रदेश की अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में नहीं थी, लेकिन हिमाचल के लोग समझते हैं कि सरकार किस दिशा में काम कर रही है और प्रदेश के विकास के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
